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  • By: Sayed Amir
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  • 14.11.2020

Alim e Deen ki Fazilat

आलिम ए दीन की फजीलत,Alim e Deen ki Fazilat एक आबिद यानी (इबादत गुज़ार) पर ऐसी है जैसे मेरी फजीलत तुम्हारे छोटे पर, इसके बाद फिर फरमाया कि अल्लाह ताला और उसके फरिश्ते और तमाम आसमान और जमीन वाले और यहां तक कि जो चिटियां अपने बिल में है और यहां तक की मछली जो समुद्र में उसकी भलाई के क्यों ख्वाहिश मंद है जो लोगों को अच्छी चीज की तालीम देता है

यानी इसका मतलब यह है कि जो बंदा किसी दूसरे आदमी को किसी अच्छी चीज की तालीम देता है उसको कोई अच्छी चीज बताता है दीन की दावत देता है तो समुंदर की मछलियां और जो बिल में रहने वाली चिटियां है और आसमान के फरिश्ते और जमीन में रहने वाले जितने लोग हैं वह सब उस बंदे के लिए भलाई की दुआ करते हैं।

Alim ki Fazilat hadees ki Roshni me

एक दूसरी हदीस में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने Alim e Deen ki Fazilat के बारे में फरमाया एक आलिम,या फकीह हजार आबिद से ज्यादा शैतान पर सख्त है मतलब की एक आलिम 1000 इबादत गुजार आदमियों से ज्यादा अफजल है।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया इल्म का हासिल करना हर मुसलमान पर फर्ज है और इल्म को किसी ना काबिल आदमी के पास रखने वाला ऐसा है जैसे किसी ने खिंज़ीर के गले में हीरे मोती और सोने का हार डाल दिया हो।

एक दूसरी हदीस में है जो शख्स Ilm e Deen हासिल करने के लिए घर से निकला तो जब तक वह वापस नहीं होता वह अल्लाह की राह में होता है

हजरत अब्बास रजि अल्लाह ताला फरमाया कि एक घड़ी रात में पढ़ना और पढ़ाना सारी रात इबादत से अफजल है

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने वाले Alim ke मुतालिक फरमाया कि आलिम की स्याही शहीद के khoon से तोली जाएगी और कलम की स्याही शहीद के khoon पर भारी आ जाएगी 

अल्लाह के रसूल  ने फरमाया एक आलिम की मिसाल है ऐसी है जैसे आसमान में सितारे हैं जिन की रोशनी से रास्तों का पता चलता है अगर वह सितारे मिट जाए तो रास्ता चलने वाले भटक जाएंगे।

आलिम अगर जवान हो बूढ़े जाहिल पर फजीलत रखता है लिहाजा चलने और बैठने में बात चीत करने में बूढ़े जाहिल को आलिम से पहले पहल नहीं करना चाहिए यानी बात करने का मौका हो तो उससे पहले कलाम शुरू ना करें और ना आलिम से आगे आगे चले ना उसकी खास जगह बैठे।

आलिम का हक गैर आलिम पर वैसा ही है जैसा उस्ताद का हक शागिर्द पर है आलिम अगर कहीं चला भी जाए तो उसकी जगह पर बैठना नहीं चाहिए ।

conclusion

 दोस्तों आज के इस टॉपिक Alim e Deen ki Fazilat में आलिम की फजीलत के बारे में जानना कि आलिम का क्या मकाम है आलिम की कदर कैसे करनी चाहिए पाली हमारे लिए किस तरह हैं तो दोस्तों आपको भी टॉपिक कैसा लगा अगर आपको यह टॉपिक पसंद आया हो तो ज्यादा से ज्यादा शेयर करिए।

jazakalla hu khair

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  • Alim e Deen ki Fazilat
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  • Alim e Deen ki Fazilat in hindi
  • आलिम ए दीन की फजीलत
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