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Kin Logon ki Dua Zyada Qubool hoti hai

Kin logon ki dua zyada qubool hoti hai

Kin Logon ki Dua Zyada Qubool hoti hai

दुआ हम सब करते है लेकिन लोगों की दुआ का अलग अलग पैमाना होता है किसी की दुआ जल्दी क़ुबूल होती है और किसी की दुआ डर से क़ुबूल होती है तो आज हम बात करेंगे कि Kin Logon ki Dua Zyada Qubool hoti hai इस टॉपिक पर हम अल्लाह के रसूल ने दुआ के बारे में क्या फरमाया है किं लोगों की दुआए ज़्यादा क़ुबूल होती है

नबी अकरम सल्ला वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि तीन आदमी ऐसे हैं जिनकी दुआएं कभी टाली नहीं जाती जरूर कबूल की जाती है

नंबर 1 रोजेदार की दुआ जिस वक्त वह अफतार कर रहा हो

नंबर 2 इमामे आदिल यानी वह इमाम जो हुकूमत और सरकार में हो और वह शरीयत के मुताबिक चलता हूं सबके साथ इंसाफ कहता हो

नंबर 3 मजलूम की दुआ मजलूम की दुआ को अल्लाह ताला बादलों के ऊपर उठा लेते हैं और उसके लिए आसमान के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और परवरदिगार ए आलम का इरशाद होता है कि मैं जरूर से जरूर तेरी मदद करूंगा अगर कुछ वक्त गुजरने के बाद ही क्यों ना हो।

एक दूसरी हदीस में अल्लाह के रसूल ने इरशाद फरमाया 3 दुआएं कुबूल की जाती हैं और उनकी दुआ कबूल होने में कोई शक नहीं है

वालिद की दुआ औलाद के लिए,मुसाफिर की दुआ,मजलूम की दुआ

एक और हदीस में अल्लाह के रसूल ने इरशाद फरमाया 5 दुआएं जरूर कबूल हो जाती हैं

#1 मजलूम की दुआ जब तक बदला ना ले ले

#2 हज के सफर पर जाने वाले की दुआ जब तक घर वापस ना आ जाए

#3 अल्लाह की राह में जिहाद करने वाले की दुआ जब तक लौट कर घर ना पहुंचे

#4 मरीज की दुआ जब तक अच्छा ना हो जाए

#5 एक मुसलमान भाई की दुआ दूसरे मुसलमान भाई के लिए उसके पीठ पीछे दुआ करना इन दुआओं में सबसे ज्यादा जल्दी क़ुबूल होने वाली वाली दुआ वह है जो एक मुसलमान भाई दूसरे मुसलमान भाई के लिए उसके पीठ पीछे दुआ करें।

YE BHI PADHE

Roze-Daar ki Dua

अफतार के वक्त दुआ कबूल होती है यह वक्त लंबी भूख और प्यास के बाद खाने पीने के लिए होता है मोमिन बंदा अल्लाह ताला की एक फर्ज़ को पूरा कर देता है और उसकी खुशी के लिए भूख प्यास को बर्दाश्त करता है इसलिए इस बड़ी इबादत की खात्मे पर बंदे को यह इनाम दिया जाता है कि अगर वह उस वक्त दुआ करें तो जरूर क़ुबूल की जाएगी तबीयत की बेचैनी और खाने पीने के लिए अक्सर लोग उस वक्त दुआ करना भूल जाते हैं अगर इफ्तार से एक 2 मिनट पहले सच्चे दिल के साथ दुआ की जाए तो इंशाल्लाह जरूर कबूल ही होगी अपने लिए और दूसरों के लिए दुनिया और आखिरत की भलाई मांगी जाएंगे तो उस वक्त अल्लाह जरूर कुबूल करेगा।

Imam e Adil ki Dua

हदीस शरीफ में आया है कि इमाम यादव की दुआ कबूल होती है या नहीं वह इमाम वह पेश हुआ वह हुकूमत करने वाला जो आदर और इंसाफ के साथ शरीयत के मुताबिक लोगों को अपने साथ लेकर चले उसे इमाम याद दिल कहा जाता है इमाम या दिल की बड़ी फजीलत है और इस फजीलत की वजह यही है कि वह हुकूमत करते हुए भी जुल्म नहीं करता और गुनाहों से बचता है और अल्लाह पाक से डरता है एक हदीस मेरे साथ है कि कयामत के दिन जब अल्लाह के अर्श के साए के अलावा किसी का साया नहीं होगा और लोग धूप और गर्मी की वजह से सख्त परेशानी में होंगे उस वक्त अल्लाह ताला 7 आदमियों के उपन्यास के साए में जगा देंगे उन आदमियों में एक इमाम या दिल भी है यह माना दिल की फजीलत है वह जो दुआ करेगा बारगाह ए खुदा बंदे में उसकी दुआ कबूल कर जाएगी

Mazloom ki Dua

जिस शख्स पर जिस आदमी पर किसी तरह का कोई जुल्म किया जाए उसे मजलूम कहते हैं मजलूम भी इन लोगों में से हैं jin logon ki dua zyada qubool hoti hai , एक हदीस में नबी अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि मजलूम की बद्दुआ से बचो इसलिए कि उसकी दुआ जरूर कबूल होती है क्योंकि  मजलूम अल्लाह ताला से अपना हक मांगता है और अल्लाह ताला किसी हक वाले से उसका हक नहीं रुकते।

एक हदीस में अल्लाह के रसूल ने चंद नसीहत ए फरमाई यानी मजलूम की बद्दुआ से बचो क्योंकि अल्लाह और उस मजलूम की बद्दुआ के दरमियान कोई पर्दा नहीं रहता यानी पर दाना होने का मतलब यह है कि उसकी दुआ जरूर कबूल होती है उसकी कबूलियत के लिए कोई रुकावट नहीं होती है

Walid ki Dua

Walid ki Dua भी अवलाद के हाथ में जरूर कबूल होती है यानी कोई किसी का बाप अगर के अपने बेटे को दुआ करें तो उसकी दुआ जरूर कबूल होती है इसी तरह वादा यानी मां की दुआ भी औलाद के हाथ में तेजी के साथ खूब रोती है वालदैन की दुआ हमेशा लेते रहना चाहिए उनकी बद्दुआ से हमेशा परहेज करें मोहब्बत और ममता की वजह से अक्सर मां-बाप बद्दुआ नहीं करते अगर से उन्हें अवलाद की जाने से तकलीफ भी पहुंचे लेकिन कई मर्तबा औलाद की तरफ से मां बाप का दिल ज्यादा दुख जाता है तो कभी-कभी मुंह से बद्दुआ निकल जाती है फिर यह बद्दुआ अपना असर करके छोड़ दी है जहां तक मुमकिन हो मां बाप को कभी नाराज ना करें और तकलीफ ना दे जान से और माल से उनकी khidmat करते रहें अगर किसी वजह से उनसे अलग भी रहने लगे तब भी उनके पास आते जाते रहो उनकी खैर खबर रखो।

Musafir ki Dua

मुसाफिर को भी उन लोगों में गिना गया है उनकी दुआ कबूल होती है और इस वजह से यह मुसाफिर घर बार से दूर होता है आराम से मिलने ना मिलने की वजह से मजबूर और परेशान होता है जो अपनी मजबूरी और हाजत मंदी की वजह से दुआ करता है तो उसकी इखलास भरी दुआ जरूर कबूल होती है।क्योंकि यह आमतौर पर मुसाफिर बेबसी और बेकसी की हालत में होता है इसलिए उसकी दुआ सिर्फ दिल से होती है और जरूर कबूल होती है।

Haj,Umrah karne jane wale ki Dua

वह आदमी Haj के लिए रवाना हुआ या उमरा के सफर में निकला हो तो उसके दुआ कबूल होने का वादा भी हदीस शरीफ में आया है अल्लाह के रसूल सल्ला वसल्लम का इरशाद है हज उमरा के मुसाफिर अल्लाह के खुसूसी मेहमान है अगर अल्लाह से दुआ करेंगे तो अल्लाह ताला जरूर कुबूल फरमाए गा और अगर उससे नफरत तलब करें तो उनकी बक्शीश वर्मा देगा एक जगह अल्लाह के रसूल ने फरमाया जब तू ऐसे शख्स से मुलाकात करो जो हज के लिए गया हो तो उसे सलाम करो उस से मुसाफा करो और उससे दरखास्त करो वह अपने घर में दाखिल होने से पहले तेरे लिए अस्तगफार करें क्योंकि वह बख्शा बसाया है

Mareez ki Dua

मरीज भी उन लोगों में से हैं  jin logon ki dua zyada qubool hoti hai ,अल्लाह ताला से सवाल तो हमेशा आफियत का ही करना चाहिए लेकिन अगर बीमारी आ जाए तो उसको भी सबरो शुक्र के साथ बर्दाश्त करें जब मोमिन बंदा बीमार होता है तो सबसे पहले तो बीमारी की वजह से उसके गुनाह माफ होते हैं और उसके दर जात बुलंद होते हैं दूसरी तंदुरुस्ती में जो इबादत करता था उन सब का सवाब इसके लिए लिखा जाता है तीसरे यह कि उसकी दुआ हैसियत बहुत बढ़ जाती है और जरूर कबूल होती है एक हदीस में है कि अल्लाह के रसूल सल्ला वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया जब तुम मरीज के पास जाओ तो उससे दुआ के लिए कहो क्योंकि Mareez ki Dua फरिश्तों की दुआ की तरह है

मरीज अपनी तकलीफ में और कुछ नहीं कर सकता तो अल्लाह के सिकरी में तो मशहूर रही सकता है और अपने लिए और अपने खानदान और अपने दोस्तों अब आपके लिए खूब दुआएं कर सकता है मोमिन की बीमारी भी नेमत है मगर कोई अपनी हैसियत तो पहचाने और नेमत को नियमित तो जाने कुरान और हदीस का इल्म ना होने की वजह से मुसलमान को ईमान की कीमत मालूम है और ना मोमिन की हैसियत का पता है अल्लाह ताला हमें इल्म दे और समझ अता फरमाए

Musalmaan bhai ke liye peeth peeche dua karna

अपने लिए तो दुआ करते ही रहते हैं इसके साथ अपने मुसलमान भाइयों के लिए भी खुश उसी दुआ करनी चाहिए मुसलमानों के लिए आम तरीका तरीका पर भी दुआ करें और अपने वालदैन और दूर और करीब के रिश्तेदार बहन भाई चाचा मामू खाना वगैरा और मिलने जुलने वालों पास के उठने बैठने वालों और अपने दोस्तों और उस्तादों को खासतौर पर दुआ में याद रखना चाहिए दुआ के लिए कोई कहे या ना कहे दुआ करते रहे इसमें अपना भी फायदा है और जिसके लिए दुआ की जाए उसका भी फायदा है

एक हदीस में इरशाद है कि पीठ पीछे मुसलमान भाई की दुआ कबूल होती है उसके सर के पास एक फरिश्ता मुकर्रर होता है जब वह अपने भाई के लिए दुआ करता है तो फरिश्ता आमीन कहता है और यह भी कहता है कि भाई के हक में जो तूने दुआ की है तेरे लिए भी इसी तरह की नेमत और दौलत की खुशखबरी है।

Conclusion

दोस्तों अगर आपको इस टॉपिक Kin Logon ki Dua Zyada Qubool hoti hai के बारे में कोई सवाल है तो आप मुझे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं और आपको अगर यह पोस्ट इंफॉर्मेशन पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें

Jazakallah hu khair

Dua Mangne Ka Tarika

Dua mangne ka tarika

Dua Mangne Ka Tarika

आज इस पोस्ट में हम बात करेंगे की दुआ किस तरह मांगना चाहिए Dua Mangne Ka Tarika दुआ मांगने का तरीका क्या है बहुत से लोग दुआ मांगते हैं बस दुआ मांग कर चले जाते हैं उनकी दुआ कबूल हो या ना हो उनके दिल में ऐसी कोई बात नहीं होती
Dua Kaise Qabool Hoti Hai तो ऐसी दुआओं का कोई फायदा नहीं है अल्लाह के नजदीक दुआ असर नहीं रखती।इस पोस्ट में Allah Se Mangne ka Tarika के बारे में बात करेंगे दुआ मांगने के कौन-कौन से आदाब हैं और Dua Mangne Ki Ahmiyat Aur Fazilat Kya Hai  दुआ मांगने की फजीलत और अहमियत क्या है।

Dua Mangne Ka Tarika,(Hadees ki Roshni Me)

नबी अकरम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया अल्लाह ताला के नजदीक कोई चीज दुआ से बढ़कर बुजुर्गों और बर्तर नहीं है।

यानी की दुआ अल्लाह के नजदीक बहुत ही बुजुर्ग मकाम रखती है जो शख्स दुआ करते हैं अल्लाह ताला उससे बहुत खुश होते हैं एक हदीस में आता है कि जो अल्लाह से नहीं मांगता अल्लाह उस पर नाराज हो जाते हैं हमको दुआ करते रहना चाहिए।और अपने अल्लाह से अपनी दुआओं के अपने गुनाहों की मगफिरत करवानी चाहिए दुआ मांगने से अल्लाह भी खुश होता और हमारे गुनाह भी धुल जाते हैं।

एक दूसरी हदीस में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स अल्लाह ताला से सवाल नहीं करता अल्लाह ताला उस पर गुस्सा हो जाते हैं।

दुआ हर चीज से बढ़कर है और हदीस में यह भी आया है कि दुआ इबादत का मग़ज़ है यानी छिलके के अंदर जो असल चीज होती है उसको मगज़ कहते हैं बादाम को अगर फोड़ कर उसमें से अंदर की जो गिरी होती है उस गिरी की कीमत होती है उसी के हिसाब से बदाम खरीदे जाते हैं

इसी तरह इबादत बहुत सारी है और दुआ भी एक इबादत है लेकिन दुआ बहुत बड़ी इबादत है इबादत ही नहीं असल मकसद है और असल इबादत है क्योंकि इबादत की हकीकत यह है कि अल्लाह ताला ने नबी अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम को यह बात सिखलाई की दुआ करते वक्त बंदा अपने आप को और अपनी बुराइयों और जिल्लत को अल्लाह के सामने पेश करता है और जाहिर और बतिन को अल्लाह के सामने अपने आप को झुकाता है। अपने आपको अल्लाह के सामने बिल्कुल कमजोर समझना अपने आप को बिल्कुल छोटा समझना और अपने आप को बिल्कुल रुसवाई से भरा समझने की जो सिफत है यह सबसे ज्यादा दुआ में पाई जाती है क्योंकि जो बंदा दुआ करता है तो अपने आप को अल्लाह के सामने बिल्कुल कमतर समझता है अपने आपको बिल्कुल कमजोर समझता है और कोई इबादत ऐसी नहीं जिसमे आदमी इतना ज्यादा अपने आप को कमजोर समझ कर अल्लाह के सामने अपने गुनाहों की माफी मांगता है इसी वजह से दुआ को इबादत का मगज़ कहा गया है इबादत का main part कहा गया है।

YE BHI PADHE

Dua Ke Adaab

अल्लाह के रसूल सल्ला वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि जब तुम में से कोई शख्स दुआ करें तो यूं ना कहे कि अल्लाह तू जो चाहे तो बख्श दे बल्की मजबूती और कॉन्फिडेंस के साथ सवाल करें जो कुछ मांग रहा है पूरी तरह से मांगे क्योंकि अल्लाह ताला को किसी भी चीज को अता करना मुश्किल काम नहीं है।

यानी यह बात कहना कि अल्लाह ताला अगर तू चाहे तो मुझे माफ फरमा दे यह बिल्कुल बेजा बात है क्योंकि अल्लाह ताला जो कुछ देगा अपने इरादे से ही देगा इसके इरादे के बगैर कुछ नहीं हो सकता हर चीज का वजूद अल्लाह के इरादे से ही है वह जो चाहे करें उसको कोई मजबूर करने वाला नहीं है दुआ करने वालों को तो मजबूती से सवाल करना चाहिए कि अल्लाह मुझे जरूर दें मेरा मुकद्दर बना दे मेरा मकसद पूरा फरमा दे यह कहना चाहे तो दे दे इस बात को बताता है कि मांगने वाला अपने आपको वाकई मोहताज नहीं समझता अल्लाह से मांगने में भी बेनियाज़ी बरत रहा है जो को तकब्बुर है दुआ में अपने आपको अंदर और बाहर से अल्लाह के सामने हाजत मंदी और अपने आप की कमजोर जाहिर करने की जरूरत है।

नबी अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि तुम्हारा रब शर्म करने वाला है करीम है जब उसका बंदा दुआ करने के लिए हाथ उठाता है तो उसको खाली वापस करता हुआ शर्माता है।

अल्लाह के रसूल सल्ला वाले वसल्लम दुआ करते वक्त उस वक्त तक अपने हाथ को नीचे नहीं गिराते थे जब तक की दुआ मांगने के बाद अपने चेहरे पर अपने हाथों को फेर ना ले।

Dua Kis Tarah Maange

दुआ करने से पहले सबसे पहले बा-वजू हो जाना चाहिए।

पहले अल्लाह की हम्द ओ सना करना और अल्लाह के सिफ़ाती नाम का वसीला लगाना

फिर दरूद शरीफ पढ़ना चाहिए नबी अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम पर दरूद भेजना चाहिए।

तबले की तरफ मुंह कर कर बैठ जाना चाहिए।

बिल्कुल सच्चे दिल के साथ अल्लाह की तरफ झुक जाना और यह यकीन दिल में रखना कि सिर्फ अल्लाह ताला ही दुआ कबूल कर सकता है।

पाक साफ रहना।

कोई नेक काम दुआ करने से पहले करना और 4 रकात नमाज पढ़कर दुआ करना

दुआ के लिए दोनों जांघो पर बैठना ।

दोनों हाथ उठा कर दुआ करना।

खुशु खूजू के साथ और अदब से दुआ करना

दुआ करते वक्त अपने आपको अल्लाह के सामने कमजोर जाहिर करना।

दुआ करते वक्त जिस्म से और जान से और लगन से जबान से अपने आप को मिसकीन जाहिर करना और आवाज में नरमी करना।

आसमान की तरफ नजर ना उठाना।

शायराना अंदाज़ से दुआ करने से बचना

अंबिया किराम और औलिया इज़ाम ,सालेहीन किराम के वासीले से दुआ करना।

गुनाहों का इकरार करना

खूब दिल लगाकर मजबूती के साथ जमकर इसी आप इनके साथ दुआ करना कि अल्लाह ताला हमारी दुआ को जरूर कबूल करेगा

दिल को हाजिर करके दिल की गहराइयों से दुआ करना

कम से कम किसी चीज का तीन बार अल्लाह से सवाल करना किसी चीज को अल्लाह से मांगते वक्त कम से कम 3 बार दोहराना।

और जब किसी के लिए दुआ करें तो पहले अपने लिए दुआ करें फिर दूसरों के लिए दुआ करें।

इस तरह की दुआ करें जिसमें अल्फाज कम हो लेकिन अल्फाज के माने ऐसे हो जो ज्यादा असरदार हो जिसमे दुनिया और आखिरत की बहुत सी भलाइयों का सवाल किया जाए।

कुरान और हदीस में जो दुआएं बताई गई हैं उन दुआओं को पढ़कर दुआएं मांगी जाए।

अपनी सारी जरूर याद अल्लाह के सामने रखें अगर नमक की भी जरूरत हो तो भी अल्लाह से मांगे।

अगर कोई इमाम है तो अपने ही लिए ही सिर्फ दुआ ना करें बल्कि मुकदमों को भी दुआ में शरीक करें।

दुआ को खत्म करने से पहले अल्लाह ताला की हम्द ओ सना बयान करें उसकी तारीफ बयान करें और रसूले अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम पर दरूद शरीफ भेजें और खत्म पर आमीन कहे

दुआ को खत्म कर कर अपने दोनों हाथ को चेहरे पर फिर ले

ये जो आदाब बताए गए हैं इसको जहां तक हो सके इसको पूरा करते हुए दुआएं मांगी जाए वैसे अल्लाह ताला सारी दुआओं को कुबूल फरमा लेता है लेकिन जहां तक हो सके रियायत करें यू अल्लाह की बड़ी शान है कि वह बगैर रियायत के है आपकी दुआ कुबूल फरमा सकता है।

दोस्तों आज किस टॉपिक में हमने Dua Mangne Ka Tarika दुआ मांगने का तरीका के बारे में जाना  दुआ मांगने से पहले हमें किस तरह अदब के साथ दुआ मांगना है किस चीज का ख्याल रखना है कैसी दुआ मांगनी है तो सब चीजों के बारे में इस पोस्ट में जाना अगर आपको इंफॉर्मेशन अच्छी लगी हो पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और आपके अगर कुछ सवाल आते हैं तो आप कमेंट बॉक्स में जरूर पूछ सकते हैं।

Jazakalla hu khair

Azaan ke baad ki dua in hindi text

Azaan ke baad ki dua in hindi text

Azaan ke baad ki dua in hindi text

दोस्तों पूरी इस्लामी दुनिया में जहां जहां भी नमाज होती है नमाज से पहले अजान होती है।जब मोदी जी ने साथ देता है तो उसका मतलब यह होता है कि वह लोगों को सलाह के घर की तरफ नमाज कायम करने के लिए बुला रहा है।कि बंदा नमाज की तरफ आए और नमाज़ कायम करें। आज अजान के बाद की क्या दुआ है क्या तर्जुमा है उसका क्या मतलब है उसके बारे में पूरी डिटेल से इस टॉपिक Azaan ke baad ki dua in hindi text में जानेंगे।

अजान देने के बाद दरूद शरीफ का पढ़ना सुन्नत है और उसके बाद यह दुआ पढ़ना भी सुन्नत है। अजान के बाद की दुआ यह है।

Azaan ke Adaab

अजान देने की कुछ आदाब है जिस तरह से खाना खाने की आदाब है पानी पीने के आदाब है सोने के आदाब है उसी तरीके से अजान देने की भी आदाब है तो आज अजान देने की कुछ आदाब के बारे में जान लेते हैं।

  • अजान का किसी ऊंचे जगह पर मस्जिद से अलग कहना
  • अजान का खड़े होकर कहना
  • अजान के जो अल्फाज है उसको रुक-रुक कर अदा करना
  • अज़ान कहते हुए कानों में उंगली डालना।
  • अजान में है या अलग सलाह देते हुए दाहिनी तरफ मुंह फेरना और है या अलल फला कहते हुए बाई तरफ मुंह फेरना
  • अजान और अकामत किब्ला की तरफ मुंह कर कर कहना।
  • अजान कहते वक्त नापाकी से पाक होना।
  • आजाद और अकामत के अल्फाज को तरतीब से कहना।
  • अजान और अकामत की हालत में कोई दूसरा कलाम नहीं करना चाहिए यहां तक कि सलाम का जवाब भी ना देना चाहिए।
  • जब अजान सुने तो तिलावत तस्बीह जिक्र बंद करके अजान का जवाब दें यानि अजान के कलिमात को दोहराए और जब हय्या अलस सलाह और हैय्या अलल फलाह कहे तो जवाब में ला हावला वाला कुवाता इल्ला बिल्लाह कहें।
  • फज्र की अज़ान में अस्सलातू खैरूम मीनन नौम के जवाब में सदक़ता व बररता कहे।
  • अकामत का जवाब भी अज़ान की तरह दे लेकिन कद का मतिस सलाह के जवाब में अकामहा ल्लाहू वा दामहा कहे।

Azaan ke baad ki dua

अल्लाह हुम्मा रब्बा हजिहिद दावातित ताम्मा वस्सलातिल कायिमह आती मुहम्मद निल वासीलता वल फजी लता वब आसहू मकामम महमूदा अल्लजी वा अद तुहू इन्नका ला तुखलीफुल मियाद।

Tarjuma in Hindi Text

तर्जुमा : ए अल्लाह ! इस पूरी पुकार और कायम होने वाली नमाज़ के रब हज़रत मुहम्मद स.अ. को वसीला और फ़ज़ीलत अता फरमा और उनको मक़ामे महमूद में खड़ा कर जिसका तूने उनसे वादा फ़रमाया है बेशक तू वादा खिलाफी नहीं करता |

YE BHI PADHE

 

Azaan ke baad ki dua in English text

Allahumma rabba hazihid dawatit taammati wassalatul kaimah aati muhammad nil waseelata wal fazeelata wab ashu makamam mahmooda allazi wa addtuhu innaka la tukhliful miyaad।

Tarjuma in English text

Aaye Allah! Is pukaar aur qayam hone wali Namaz ke rab Hazrat Muhammad Mustafa sallallahu alayhi wasallam ko waseela aur Fazilat ata farma aur unko makame Mahmood me khada kar jiska apne unse waada farmaya hai ,beshak tu wada khilafi nahi karta।

तो आज के इस टॉपिक Azaan ke baad ki dua in hindi text पर हमने अज़ान की दुआ और उसका तर्जुमा, अज़ान के आदाब के बारे में जाना।

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Khana khane ki dua aur uske adaab

khana khane ki dua aur uske adaab

Khana khane ki dua aur uske adaab

दीन ऐ इस्लाम ने ज़िंदगी गुजारने के कुछ आदाब बताए है की ज़िन्दगी में को अमल करना है वो किस तरह से करना है,उसके शारिय आदाब क्या है इसी तरह आज हम Khana khane ki dua aur uske adaab के बारे में बात करेंगे।

Khana khane ke adaab

#1- खाना खाने से पहले दोनों हाथों को अच्छी तरह धोना और कुल्ली करना।

#2- खाना Bismilla hirrahma nirraheem पढ़ कर शुरू करना।

#3- दाहिने हाथ से खाना खाना,इसी तरह किसी दूसरे को खाना देना जो तब भी दाहिना हाथ इस्तेमाल करना ।

#4- इकठ्ठे बैठ कर खाना खाना,खाना खाने में जितने लोग इकठ्ठा होंगे उतनी ही बरकत खाने में होगी।

#5- बैठ कर खाना, उकुडू बैठ कर या दोनों जांघ के ऊपर बैठना,जैसे एक गुठना खड़ा हो और दूसरे को बिछा कर उस पर बैठे या दोनों गुठने ज़मीन पर बिछा दे तब खाना खाए ।

#6- दस्तरख़्वान बिछा कर खाना खाना।

#7- खाना खाने के दुआ पढ़ना।

#8- अपने सामने से खाना खाना।

#9- दाहिने हाथ से खाना खाना, खाने की महफ़िल में जो आदमी सबसे ज्यादा बुज़ुर्ग हो उस से खाना शुरू करवाना।

#10- खाना एक तरह का हो जैसे बिरयानी, वगैरह तो अपने सामने से खाना बर्तन के बीच में या दूसरे आदमी के आगे हाथ ना डालना।

#11- बहुत ज़्यादा तेज़ गर्म खाना नहीं खाना ।

#12- जिस आदमी ने खाना पकाया हो उसको खाने में शामिल करना।या उसको खाने में से कुछ अलग से से देना।

#13- खाना खाने के दरमियान कोई आ जाए तो उसे भी बुला लेना।

#14- खाना खाने के बाद हाथ को धुलना और कुल्ली करना।

#15- अगर कोई निवाला गिर जाए तो उसे उठा कर साफ़ करके खा लेना चाहिए।

#16- टेक लगा कर खाना ना खाना।

#17- खाने में कोई अयेब ना निकालना।

#18- जूता उतार कर खाना खाना।

#19- खाने के बाद बर्तन पियाला और प्लेट को साफ करना।

#20-अगर आपका साथी खाना खा रहा हो तो उसका साथ देना ताकि वह पेट भर के खाना खा ले अगर किसी मजबूरी में खाने से अलग हो तो इज़ाजत के कर अलग हो।

#21- मुंह बंद करके खाना खाये ताकि चप चप की आवाज ना आए।

#22- सर को ढक कर खाना खाना।

#23- पहले दस्तरखान उठाना फिर खुद उठना।

#24-दस्तरख्वान उठाने की दुआ पढ़ना:- अल्हम्दुलिल्लाह हम दन कसीरन तय्यीबन मुबाराकन फीह गैरा मु किफ्फी वाला मुवददई वला मस्तगनन अनहु रब्बना।

#25- अगर शुरू में Bismillahir-rahmanir raheem भूल जाए तो ये दुआ पढ़े

‘Bismillahi awwalahu wa akhirahu

#26- जब किसी के यहां खाना खाए तो मेजबान को ये दुआ पढ़े।

Allahumma at im man at amani waski man sakaani

अल्ला हुममा अतइम मन अत अमानी वस्की मन सकानी

#27- खाने के वक्त बिल्कुल ख़ामोश रहना मकरूह है।

#28- जब खाना खा चुके तो ये दुआ पढ़े

Alahumdulillahil lazi at amana wa sakaana wa ja alna minal muslimeen

अल्हम्दु लिल्लाहिल लजि अत अमना वा सकाना वजा अलना मिनल मुस्लिमीन।

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जब खाना शुरू करे तो ये दुआ पढ़े

Bismilla hirrahma nirraheem

बिस्मिला हिर्रह्मनिर रहीम

अगर शुरू में Bismillahir-rahmanir raheem पढ़ना भूल जाए तो ये दुआ पढ़े

Bismillahi awwalahu wa akhirahu

बिस्मिल्लाहि अव्वालाहू वा अखिराहु

जब खाना खा चुके तो ये दुआ पढ़े

Alahumdulillahil lazi at amana wa sakaana wa ja alna minal muslimeen

अल्हम्दु लिल्लाहिल लजि अत अमना वा सकाना वजा अलना मिनल मुस्लिमीन

Jazakallah hu khair

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Istikhara karne ki dua aur tarika

Istikhara karne ki dua aur tarika

Istikhara karne ki dua aur tarika

जब कोई शख़्स किसी नेक काम का इरादा करे तो उसको चहिए को वो काम करने से पहले अल्लाह की मर्ज़ी को मालूम कर ले। तो आज हमने Istikhara karne ki dua aur tarika के बारे में janenge.

Shadi ke liye istikhara karna

बहुत से लोग ये समझते हैं कि istikhara सिर्फ शादी के लिए किया जाता है लेकिन ये कहना ग़लत है जब भी ज़िंदगी में कोई नेक काम का इरादा करे जैसे कोई बिजनेस शुरू करने से पहले,या कोई प्रोपर्टी खरीदने से पहले या शादी के लिए रिश्ता तय करने से पहले भी istikhara करके अल्लाह कि मर्ज़ी मालूम किया जा सकता है।

हदीसों में आया है की जब कोई आदमी किसी काम का इरादा करे तो 2 रकत नमाज़ नफिल पढ़े जिसकी पहली रकत में surah fatiha पढ़ने के बाद Surah kafirun और दूसरी रकात में Surah fatiha ke baad surah ikhlaas यानी कुल हुव ल्लाहु अहद पढ़े। फ़िर ये दुआ पढ़े और और किब्ले की तरफ सर करके सो जाए दुआ के शुरू और आखिर में surah fatiha और Durood Shareef भी पढ़े।

Istikhara ki Dua। इस्तिखारा की दुआ।

Istikhara ki dua in Arabic text

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمَكَ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ، وَتَعْلَمُ، وَلَا أَعْلَمُ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ، اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ- خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي- عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ- فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي- عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ- فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ وَاقْدُرْ لِيَ الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي بِهِ।

Istikhara ki dua in hindi

अल्ला हुम्मा इन्नी अस्तखीरुका बि इल्मिका वा अस्तकदिरुका बि कुद्रतिका वा अस अलुका मिन फजलिकाल अज़ीम फा इन्नका तकदिरू वला आ लमु वा अंता अल्लामुल ग्यूब। अल्ला हुम्मा इन कुंता ता लमू अन्ना हाज़ल अम्र खैरुल ली फी दीनी वा म आशी वा आकिबती अमरी वा आजिलि अमरि वा आजालिही फ़ा अकदिरहू ली वा यससिरहू ली सुम्मा बारिक ली फ़ीह वा इन कुंता तालमु अन्ना हाज़ल अमरा शर्रुल ली फि दीनी वा मा आशी वा आकिबती एमरी वा आजिल एमरी वा आजिल्हू फसरिफ़ हू अन्नी वसरिफनी अनहू वा अकदिर लियल खैरा हयसू काना सूम्मा रज्जनी बिहि।

नोट- दोनों अमर की जगह अपनी ज़रूरत का नाम लेे।जैसे पहले में कहें hazaj safaru khyrul li कहे और दुसरे में कहे hazas safaru sharru li ।

Istikhara ki Dua in English

Allaahumma ‘innee ‘astakheeruka bi’ilmika, wa ‘astaqdiruka biqudratika, wa ‘as’aluka min fajhilikal-‘Adheemi, fa’innaka taqdiru wa laa ‘aqdiru, wa ta’lamu, wa laa ‘a’lamu, wa ‘Anta ‘Allaamul-Ghuyoob, Allaahumma ‘in kunta ta’lamu ‘anna haazal-‘amra Khayrun lee fee deenee wa ma’aashee wa ‘aaqibati ‘amree  Faqdurhu lee wa yassirhu lee summa baarik lee feehi,

wa ‘in kunta ta’lamu ‘anna haazal-‘amra sharrun lee fee deenee wa ma’aashee wa ‘aaqibati ‘amree, Fasrifhu ‘annee wasrifnee ‘anhu waqdur liyal-khayra haythu kaana thumma ‘ardhinee bihi.

नोट

Istikhara काम से काम 7 बार करे और फिर देखे जिस बात पर दिल जम जाए उसी में खैर है कुछ लोगो का कहना है कि अगर ख्वाब में सफेदी या हरा रंग देखे तो अच्छा है और अगर स्याही या लाली देखे तो बुरा है उस से बचे।

तो आज हमने Istikhara karne ki dua aur tarika के बारे में जाना अगर इससे जुड़ा हुआ आपके में में कोई सवाल है तो आप कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

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Dua starting with rabbana

Dua starting with rabbana

Dua starting with rabbana

आज हम क़ुरान और हदीस की उन दुआओं के बारे में बात करेंगे जो बहुत ही असरदार दुआए हैं अल्लाह के रसूल इन दुआओं को अक्सर मांगा करते थे Dua starting with rabbana ये हैं।

Dua 1 रब्बाना आतिना फिद दुनिया हसानतौं वाफिल आखिरति हसानतौं वक़िना आजाबन्नार

Tarjuma ऐ हमारे रब हम को दुनियां में भी भलाई अता फरमा और आखिरत में भी भलाई नसीब फरमा।

Dua 2 रब्बना इन्न्ना आमन्ना फगफिर्लना ज़ुनूबना वक़िना अजाबन्नार।

Tarjuma ऐ हमारे रब हम ईमान लाए बस तू हमारे सब गुनाह को बख्श दे और दोज़ख़ के अजाब से हमको बचा ले।

Dua 3 रब्बानग फिर्लना जुनूबना वइसराफना फी अमरिना वासब्बित अकदामना वंसुरना अलल कौमिल काफिरीन।

Tarjuma ऐ हमारे रब हमारे गुनाह बख़्श दे और हम से हमारे कामों में को गलतियां हुईं है उन्हें माफ़ फरमा दे और हक़ के रास्ते पर हमारे पैर जमा दे और कुफ्र करने वालों के मुकाबले में हमारी मदद फरमा।

Dua 4 रब्बान इन्नना समियना मुनादियाइं युनादी लिल इमानी अन आमीनू बिरब्बिकुम अमन्ना ।

रब्बनग फिर्लना ज़ुनूबना वकाफ्फिर अन्ना सैय्यिया तिना वता वफ्फना माअल अबरार।

Tarjuma ऐ हमारे रब हमने एक पुकारने वाले को ईमान कि तरफ बुलाते हुए सुना कि ऐ लोगों अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान ले आए ।बस हमारे रब हमारे गुनाहों को बख़श से और हमारी बुराईयां मिटा दें और अपने नेक बंदों के साथ हमारा खात्मा कर ।

Dua 5 रब्बना वआतिना मा वअद तना अला रूसुलिका वला तुखजिना यौमल कियामह।इन्नाका ला तुखलिफुल मियाद ।

ऐ हमारे रब हमको वो सबकुछ अता कर जिसका अपने रसूलों कि जबानी तूने हमसे वादा किया और क़यामत के दिन हमको रुसवा ना कर,तेरा वादा खिलाफ़ नहीं होता।

Dua 6 रब्बना ज़लमना अन्फुसाना वाइल्लम तगफिर्लना वतर हमना लना कुनन्ना मिनल खासिरिन।

 Tarjuma ऐ हमारे रब तेरी नाफरमानिया करके हम ने अपने ही ऊपर ज़ुल्म किया है ,और अगर तूने हमें ना बख्शा तो हम बरबाद ही हो जाएंगे।

Dua 7 रब्बना ला तज अलाना फित्नतल लिल कौमिज़ जालिमीन।

वा नज्जिना बिरह्मतिका मिनल कौमिज जलिमीन

Tarjuma ऐ हमारे रब तू हमें ज़ालिम क़ौम के ज़ुल्म वा सितम के लिए तख्ताए मशक ना बना।और अपने रहमत के सदके में। हम को कफिरों के ज़ुल्म से निजात दे।

Dua 8 रब्बिज अलनी मुकीमस सलाती वामिन जुर्रियती रब्बाना वताकब्बल दुआ ।

रब्बानग फिर्ली वली वालीदय्या वलिल मुमिनीना यौमा याकूमुल हिसाब ।

Tarjuma ऐ मेरे रब मुझे और मेरी नस्ल को नमाज़ क़ायम करने वाला बना दे

ऐ हमारे रब हमारी दुआ को कबूल कर ऐ मेरे मालिक मेरे मा बाप को बख्श दे जिस दिन की हिसाब किताब हो।

Dua 9 रब्बिर हम्हुमा कमा रब्बयानी सगीरा

Tarjuma ऐ मेरे रब मेरे मा बाप पर रहम फरमा जैसा उन्होंने मुझे प्यार से पाला जब में छोटा सा था

Dua 10  रब्बी जिदनी इल्मा

Tarjuma मेरे रब मेरे इल्म में इज़ाफ़ा और बरकत अता फरमा

Dua 11 रब्बिग फ़िर वरहम वांता खयरुर राज़िकीन

Tarjuma मेरे रब मुझे बख्स दे और मुझ पर रहम फरमा दे तू सबसे अच्छा रहम करने वाला है

Dua 12 रब्बी अव ज़ियनी अन अश्कुरा नियमताकल लती अन अमता अलय्या वाला वालिदय्या वाअन आमला सालिहान तर्जाहू वास्लह ली फी जुर्रियती इन्नी तुबतू इलाइयका वाइन्नी मिनल मुस्लिमीन।

Tarjuma ऐ मेरे रब मेरी किस्मत को इस तरह कर दे की तो नेमते तूने अता कि है मुझ पर और मेरे मा बाप पर मैं उनका शुक्रिया अदा कर सकू और ऐसे अमल करुं जिससे तू राज़ी हो जाए और मेरे वास्ते मेरी नस्ल में भी सलाहियत और नेकी दे मैंने तेरे हुक्म की फर्मा बरदरी की और तुझ से तौबा की।

Dua 13 रब्बानग फ़िर लना वली इख्वानिनल लजीना सबाकूना बिल इमान वाला तजआल फी कूलूबिना गिल्लल लिल लाजिना आमानु रब्बना इन्नका रऊफुर रहीम।

Tarjuma ऐ मेरे रब हमको बख़्श दे और हमारे अन भाईयों की भी मगफिरत फरमा जो ईमान के साथ हम से पहले गुज़र चुके हैं और हमारे दिलों को साफ रख बुग़ज़ से ऐ हमारे रब तू बड़ा मेहरबान और बड़ी रहमत वाला है।

Dua 14  रब्बना अत्मिम लना नूरना वग़ फ़िरलना इन्नका अला कुल्लि शयिं कदीर।

Tarjuma ऐ मेरे रब हमारे वास्ते नूर की तकमील फरमा और हम को बख़श दे तू सब कुछ कुदरत रखता है।

Dua starting with rabbana ye duaien aap ko kaisi lagi meri request hai ki aap log in duaon ko namaz ke baad zaroor maange .  

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Darood shareef in hindi

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Darood Shareef in hindi

Darood shareef भी एक दुआ है,जो हम लोग अल्लाह के बंदे अल्लाह के रसूल के हक में करते है, अल्लाह के बाद सब से ज़्यादा एहसान हमारे उपर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वल्लम का ही है। अगर अल्लाह के रसूल दीन के लिए इतनी परेशानियां ना उठाते तो आज हम सब शिर्क और कुफ्र के अंधेरे में ही होते ये अल्लाह के रसूल का एहसान है कि इतनी परेशानियों के बाद भी दीन हम तक पहुंचाया आज Darood shareef in hindi में हम इसे पूरी डिटेल से जानेंगे।

Quran Majeed me darood Shareef padhne ka hukm

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की इतनी बा बरकत शख्सीयत और शान के लाइक है कि कुरान शरीफ में अल्लाह ने Durood Shareef पढ़ने का हुक्म दिया।

क़ुरान शरीफ में अल्लाह ने बहुत ही साफ अंदाज़ में ये हुक्म दिया कि इरशाद ए बारी है

“इन्नल्लाहा वा मलाईकाताहू युसल्लूना अलन्नबिय या अय्युहल लाजिना आमानू सल्लू अलैहि वसल्लिमू तस्लीमा”।

Tarjuma

अल्लाह और उसके फ़रिश्ते रहमत भेजते हैं नबी सलल्लाहू अलैहि वसल्लम पर दुरूद भेजो और सलाम अर्ज़ करो।

इस आयत में बताया गया है कि अल्लाह तआला अपने नबी सल्लल्लाहू अलैहि वल्लम की ख़ुद इज्ज़त और इकराम करता है,और उन पर रहमत वा शफकत फरमाता है। और उसके फ़रिश्तों का भी यही अमल है वो भी अल्लाह के रसूल की इज्ज़त और इकराम करते है।और अल्लाह से आप की रहमत की इल्तिज़ा करते है।

इसी तरह अल्लाह ने ईमान वालों से भी यही फ़रमाया कि तुम अल्लाह से रहमतें नाजिल करने के लिए दुआ करो और खूब सलाम भेजो।इस वजीफे के पता चलने के बाद कौन है वो इस काम को ना करे जिस का हुक्म अल्लाह ने दिया हो।

Darood shareef ki fazilat hadees ki roshni me

 

Darood shareef ki fazilat बहुत सी हदीसों में भी आई हुई है। जिनमें से कुछ में आप के सामने रख रहा हूं।

जो शख़्स मुझ पर एक बार दरूद शरीफ पढ़ कर भेजता है अल्लाह पाक उस बन्दे पर 10 राहमतें नाजिल फरमाते हैं।

इक रिवायत में आता है कि

“जो शख्स 1 बार दरूद भेजेगा उस पर अल्लाह ताला 10 रहमते नाजिल करता है और 10 गलतियां भी माफ करता है और 10 दर्ज़ा और बुलंद करता है।

एक और हदीस में अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया।

अल्लाह के बहुत से फ़रिश्ते हैं जिन का खास काम यही है कि वो ज़मीन में जो उम्मती मुझ पर सलातो सलाम पढ़ता है। वो उसको मुझ तक लाते हैं।

सुभानल्लाह !कितनी बड़ी दौलत है कि हमारा सलतो सलाम फरिश्तों के ज़रिए अल्लाह के रसूल तक पहुंचता है इसी बहाने हम सब का ज़िक्र अल्लाह के रसूल के दरबार में हो जाता है।

एक हदीस में आता है कि

कयामत के दिन मुझ से सब से ज़्यादा क़रीब आदमी वो होगा जो मुझ पर ज़्यादा दुरूद भेजता होगा।

एक दूसरी हदीस में है कि

वो शख़्स बड़ा बख़ील है यानी कंजूस है जिसके सामने मेरा जिक्र किया जाए और वो ख़ामोश रहे।

एक हदीस मे आया है कि

उस शख़्स की नाक ख़ाक आलूद हो यानी कि वो जलील हो जिसके सामने मेरा ज़िक्र आए और वो मुझ पर दुरूद ना भेजे”

Darood kis tarah bheje

कुछ सहाबा रजियल्लाहू ने अल्लाह के रसूल से सवाल किया कि हम दुरूद किस तरह भेजे ? “अल्लाह के रसूल ने फिर दुरूदे इब्रहीमी तालीम फरमाई। जो नमाज़ में पढ़ी जाती है।

Darood e ibrahimi

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ
كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ
.إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ، وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ
كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ
.إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

Darood shareef in hindi text

अल्लाहुम्मा सल्ली अला मुहम्मदिंव वाअला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लयता अला इब्रहीमा वआला आलि इबराहीमा इन्नका हमीदुम मजीद।

अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिंव वआला आलि मुहम्मदिंन कमा बरकता अला इब्रहिमा वअला आलि इब्राहीमा इन्नका हामीदुम मजीद।

 

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Tarjuma

अये अल्लाह हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर और उनकी आल पर खास रहमत फरमा,जैसे तूने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर और उनकी ऑल पर रहमत की तू बड़ी तारीफ वाला बुजुर्गो वाला है।

अल्लाह हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर और उनकी आल पर बरकती नाजिल फरमा जैसे तूने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर और उनकी आल पर बरकते नाजिल कि तू बड़ी तारीफों वाला और बुजुर्गी वाला है।

यह दरूद शरीफ खासकर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम की आल के लिए है यानी उनके घर वालों के लिए खास है हम सबकी जिम्मेदारी है कि जब नमाज पढ़े हैं तो इसके आखिर में हुजूर सल्ला वाले वसल्लम के लिए और उनके साथ लोगों के लिए रहमत और बरकत की दुआ भी करें।

Darood shareef ka wazifa

बहुत से ऐसे बुजुर्ग हैं जो रोजाना अल्लाह के रसूल के ऊपर कई हजार मर्तबा दुरुद शरीफ पढ़ने का मामूल रखते हैं लेकिन हम जैसे कम हिम्मत अगर सुबह शाम अदब और मोहब्बत के साथ सिर्फ सौ सौ मर्तबा दुरुद शरीफ पढ़ लिया करें तो इंशाल्लाह इतना कुछ पाएंगे कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उनके हाल पर ऐसी मुहब्बत होंगी की इस दुनिया में उसका कोई अंदाजा नहीं कर सकता यानी अल्लाह के रसूल को उससे मोहब्बत हो जाएगी।

यह छोटा सा दरूद शरीफ जरूर याद कर ले

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मदी निन्नबियीइल उम्मी वा अलेही वसल्लम

Tarjuma

अल्लाह नबी ए उम्मी हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर और उनके घर वालों पर रेहमतें नाजिल फरमा।

जब भी हम हुजूर सल्ला वाले वसल्लम का नाम ले और आपका जिक्र करें या दूसरे से सुने तो आप पर दुरूद शरीफ जरूर पढ़ना चाहिए और उसे मौके के लिए सल्लल्लाहु वाले वसल्लम या अलैहिस्सलाम काफी है।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरूद ओ सलाम भेजना हम पर हुजूर सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का बहुत बड़ा हक है और हमारे आला दर्जे की शआदत है और दुनिया और आखिरत में हमारे लिए बहुत ज्यादा रहमत और बरकतओं का जरिया है।

अल्लाह से दुआ है कि अल्लाह ताला हम सब को ज्यादा से ज्यादा दरूद ओ सलाम पढ़कर अल्लाह के रसूल पर भेजने की तौफीक अता फरमाए आमीन

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Qurbani ki dua hindi me

Qurbani ki dua hindi me

Qurbani ki dua hindi me। कुर्बानी की दुआ हिंदी में

आज हम Qurbani ki dua hindi me और उस के तरीके की मालूमात पूरी डिटेल से जानेंगे।

किस तरह करें जानवर को ज़ीबह।

सबसे पहले जानवर को ज़मीन पर इस तरह लिटा दे की उसका सर दक्खिन की तरफ और पैर पश्चिम की तरफ करे। इस तरह जानवर का मुंह किब्ले की तरफ हो जाएगा। जानवर को पहले से छुरी ना दिखाएं फिर अपने दिल में नियत करें कि या अल्लाह की मैं सच्चे दिल से जानवर तेरे नाम पर कुर्बान कर रहा हूं इस को क़ुबूल फरमा।

फिर ये दुआ पढ़े

Qurbani ki dua hindi me
Qurbani ki dua hindi me

Qurbani karne ki dua। कुर्बानी करने की दुआ

Dua in Arabic and hindi text:-

إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ لَا شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُسْلِمِينَ، بِسْمِ الله الله أَكْبَرُ

इन्नी वज्जहतु वजहि य लिल्लज़ी फ़ त रस्मावाति वल अर्दा हनीफँव व् मा अ न मिनल मुशरिकीन इन न सलाती व नुसुकी मह्या य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन . ला शरी क लहू व बि ज़ालि क उमिरतु व अ न मिनल मुस्लिमीन . अल्लाहुम्मा laka waminka बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर.

अब जानवर को ज़िबह करें

उसके बाद ये दुआ पढ़े

اللهم تقبله مني كما تقبلت من حبيبك محمد وخليلك إبراهيم عليه السلام

अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन्नी कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा व हबीबिका मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम .

Dua in English text:

inni wajjahtu wajhiya lillazi fataras samawaati wal arza haneefaunw wama ana minal mushrikeen, inna salati wa nusuki wa mahyaya wa mamati lillahi rabbil alameen, la sharika lahu wabi zalika umirtu wa ana awwalul Muslimeen Allahumma laka wa Minka bismillahi Allahu Akbar .

ये दुआ पढ़ कर जानवर को तेज़ छुरी से ज़ीबह करें

जब जानवर जीबह हो जाए तो उसके बाद ये दुआ पढ़े

Allahumma taqabbal minni kama taqabbalta min khalilika ibrahima wa habibika muhammadin sallallahu alaihi wasallam.

नोट- अगर क़ुर्बानी खुद की कर रहा हो तब तो मिन्नी और अगर दूसरे की तरफ से ज़ब्ह किया हो , तो मिन्नी कीं जगह मिन फला कहें , यानी जिस आदमी के नाम से कुर्बानी कर रहा हो उसका नाम ले ,

यानी अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन ( यहाँ जिसकी तरफ से क़ुरबानी हो उसका नाम ले जैसे- मिन अरशद , मिन सलमान , राशिद इस तरह ) कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा अलैहिस्सलामु व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम !

और अगर जानवर में बहुत से लोगों का हिस्सा है तो जैसे ऊंट, भैंस, वगेरह, तो फला ( मिन ) की जगह सब लोगों का नाम ले ,इस तरह आप की कुर्बानी मुकम्मल हो जाएगी

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Jazakallahu khair

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So Kar Uthane Ki Dua Hindi me

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So Kar Uthane Ki Dua। नींद से जागने का सुन्नत तरीक़ा

Ye aaj ka topic So Kar Uthane Ki Dua Hindi me isme hum janenge ki so kar uthne ke baad kon kon sa sunnat amal kiya jata hai uske baare me baat karenge hadeeson ki roshni me .

Hadees me aata hai ki Jab admi neend se jaag jaye aur fir wazu kare wazu karte waqt apne naak ko 3 martaba acchi tarh saaf kare kyunki Shaitan naak ke baanse me poori raat guzarta hai।

(Sahih Bukhari-3295)

Wazu karne ka tarika

Wazu aur Gusal ke zaroori masail। वज़ू और गुस्ल के ज़रूरी मसाइल।

Jab aadmi so kar uth jaye to fauran apne bistar se uth kar na bhage thodi der bistar per hi baitha rahe apne haath ko Chehre per male neend ka effect thoda kam ho jaye phir ye dua padhe-

So kar uthne ki dua। Dua after awaking

الحَمْدُ لِلهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ.

Alhumdulillahilazi Ahyana B’ada Ma Amatana wailayehin nushoor

Translation:- Har qism ki tareef us Allah ke liye hai jisne hume Jinda kiya ,baad uske ki usne hume maar diya tha aur usi ki taraf uth kar jana hai.

(Sahih Bukhari-6312)

Aap is dua ko bhi padh sakte hain

Alhumdulillahilazi Aafaani fi-jasadi waradda alayya roohi Wa-aazina ki Bi-zikri.

(Tirmizi shreef-3401)

Neend se jagne ke baad Alhumdulillah kahe aur uske baad kalma padhe lailaha illallah muhammadur rasoolullah.

So kar uthne ke baad fauran kisi bartan me haath na dale pehle haathon ko acchi tarah dhoo le. Kya pata neend ki gaflat ki wajah se haath Kahan kahan gaya ho.

Jab so kar uthe uske baad miswak kare miswak ki bahut si fazilatein aayi hui hai .dosto islam hi ek aisa mazhab hai jike andar duniya ki sari feild se related maloomat batayi gayi hai ,zindagi ka koi aisa step nahi hai jahan per islam ne rahnumai na ki ho ,bas ya hamari badnaseebi hai ki hum us per amal nahi karte .allah hum sab ko amal ki taufeek ata farmaye.Aameen

Agar aapko ye informationSo Kar Uthane Ki Dua Hindi me pasand aayi ho to khair ki baaton ko failaye

Jazakallah hu khair

Toilet Jane Ka Sunnat Tarika

Toilet jane ka sunnat tarika

Toilet Jane Ka Sunnat Tarika। टॉयलेट जाने का सुन्नत तरीक़ा

Deen e islam ne zindagi ke har step per hum sab ki rahnumai farmayi hai aur allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam ne  in tamam tarikon per amal karke ummat ko sikha diya  ab zimmedari hum sab ki hai kilogon tak deen ki sahi information pahunchaye aaj hum ek bahut hi aham topic Toilet Jane Ka Sunnat Tarika aur toilet jane ki duaon ke bare me baat karenge.

Hazrat Abu Ayyub Ansari raziallahu tala anhu kahte hai ki Allah ke rasool sallallahu alayhi wasallam ne irshad farmaya

“Tum jab toilet ke liye jao to kible ki taraf munh karke na baitho,aur na hi kible ki taraf peeth karo”.

(Bukhari shareef, Muslim shareef)

Hazrat Salman raziallahu tala anhu kahte hai ki Allah ke rasool sallallahu alayhi wasallam ne hume is baat se mana kiya hai ki

  • Toilet ke waqt kible ki taraf munh na kare,
  • Dahine haath se istinja na kare
  • Napaak cheez se istinja na kre
  • 3 pattharo (ya un cheezon se jin se istinja karna jaiz hai )se kam me istinja na kate.

(Muslim)

Agar kisi ke ghar me toilet ka bando baat na ho aur use bahar jana padta ho to usko chahiye ki itni door chala jaye jahan kisi ki nazar us per na pad sake.

Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam ne irshad farmaya ki tum me se koi shakhs kisi suraakh ya kisi janwar ke bill me peshaab na kare

(Sunan Abu Dawood)

Hazrat Abdullah bin Mu’affal raziallahu tala anhu kahte hai ki Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam ne farmaya

koi shakhs apne Gusal khane me Peshaab na kare ,phir wahin nahaye aur wazu kare kyunki isse waswase paida hote hain.”

Hazart Abu Saeed raziallahu tala anhu farmate hai ki Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam ne farmaya ki

“2 aadmi is tarah toilet na kare ki unka satar (badan ka wo hissa jisko dhakna zaroori hai) ek dusre ke samne ho ya ek dusre ke samne satar khool kar bate karte rahe.”

(Ibn e Maja)

Hazrat Umar raziallahu tala anhu farmate Hain ki Nabi Kareem sallallahu alaihi wasallam ne mujh ko is haal me dekha ki mai khade ho kar peshaab kar raha tha to aap ne farmaya

“Ay Umar! Khade hokar Peshaab na kiya karo,phir uske baad Hazart Umar ne kabhi khade hokar Peshaab nahi kiya.”

(Tirmizi)

Is hadees me istinja se related bahut badi tambeeh ki gayi hai

Hazart Abu Huraira raziallahu tala anhu bayan karte hai ki Rasool sallallahu alaihi wasallam ne farmaya “Un 2 cheezon se bacho jo lanat ka zariya hai Sahaba ne poocha Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam wo 2 cheezen kya hai aap ne irshad farmaya” Jo Shaksh raste me peshaab ya toilet kare aur dusra wo jo logon ke rukne ya saaye lene ki jagah per toilet kare “ye dono shakhs lanat ke mustahiq hain.

Toilet Jane Ka Sunnat Tarika

(1)Aap sallallahu alaihi wasallam jab baitul khla tashreef le jate to joota pahen kar aur sir ko dhank kar jate.

(2) Aap sallallahu alaihi wasallam jab toilet me enter hote to left side ka pair pehle andar karte aur jab bahar nikalte to right side ka ka pair bahar nikalte aur ye dua padhte

Toilet Jane ki dua। Dua Before Entering Toilet

ﺍَﻟﻠّٰﮩُﻢَّ ﺇﻧِّﯽْ ﺍٔﻋُﻮْﺫُ ﺑِﮏَ ﻣِﻦَ ﺍﻟْﺨُﺒُﺚِ ﻭَﺍﻟْﺨَﺒَﺎﺋِﺚ

Bismillahi,Allahumma inni a’auzubika minal khubusi wal khabais.

Tarjuma:- ay Allah Mai teri panah me aata hoon napak jinno aur khabais se.

(3)Aap sallallahu alaihi wasallam ke farmya toilet karte waqt bila zaroorat baat na kare aur na hi koi zikr kare.

(4) Toilet karne se pehle paint ya shalwaar ko aasani ke saath jitna khol sake utna hi behtar hai phir aaram se baithe.

(5) Toilet jane se pehle Koi ring ho ya kisi cheez jis per Quran ki ayat ya Nabi ka naam likha hua ho to usko utar kar bahar rakh de,faragat ke baad bahar aakar pahen le.

           Note:- Taweez jis ko mom jama kiya gaya ho usko pahen kar jana jaiz hai.

(6) Peshaab karte waqt private part ko dahina haath na lagaye balki left hand ka istemal Karen.

(7) Peshaab,aur dusri gandagi se bache kyunki aksar Azab e qabr peshaab ki cheenton se na bachne ki wajah se hota hai.

(8) Peshaab karne ke liye soft zameen talash kare taki peshab ki cheentein na pade.

(9) Baith kar peshaab kare khade hokar Peshaab na kare

(10) Toilet karne ke baad apne haathon ko kisi soap ya mitti se apne haathon ko paak kare.

(11) Aap sallallahu alaihi wasallam Hajat ke baad safai ke liye mitthi ke dhele zaroor le jate the un ki tadaad hamesha taaq yani 3,5,7 sum hoti thi .

(12) Toilet se bahar nikalte waqt right side ka pair pehle bahar kare aur ye dua padhe

Toilet Se Nikalne Ki Dua। Dua after leaving Toilet

اَلْحَمْدُ لِلّٰہِ الَّذِي أَذْهَبَ عَنِّي الْأَذَى وَعَافَانِي

Tarjuma:- shukr hai Allah ka jis ne meri takleef ko door kiya aur mujhe Aafiyat bakhshi.

۔Thanks to Allah Almighty Who removed pain from me and granted me relief Alhumdulillahilazi Azhaba Annil Aza Wa-afaani.

(Tirmizi)

Aaj hum sab se Toilet Jane Ka Sunnat Tarika seekha wo bhi Ahadees ki roshni me umeed karte hai ki aap ko ye information pasand aayi hogi Deen ki baaton ko ek dusre ko share kare taki aapke dusre bhai tak bhi sahi information pahunch sake.

Jazakallah hu khair

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Sone se pehle ki dua in hindi

Sone se pehle ki dua in hindi

Sone se pehle ki dua in hindi । सोने से पहले की दुआ

Aaj hum janenge Sone se pehle ki dua in hindi ke baare me Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam ne hum sab ko zindagi jeene ka tarika aur zindagi me karne wale kaamon ke baare ek ek karke bahut hi acchi tarah se bataya hai un kaamon ke karne se pehle kuch duaien bhi batayi hain jin ko padh kar hum sawab hasil kar sakte hai aur shitan mardood ke waswason se bach sakte hain. Aaj hum aapko sone se pehle padhi jane wali duaon ke bare me batayenge.

Sone ka sunnat tarika

Sone se pehle Surah الم سجدہ aur تبارك الزي yani surah AL-MULK Sone se pehle ki dua in hindi padh kar sona chahiye

Sone se pehle dono hatheliyan milakar surah- e -ikhlaas yani qul huwallahu ahad aur surah falaq yani qul awuzu birabil falaq aur phir surah naas yani qul awuzu birabbin naas padh kar haath per dum kare ya phoonk mare aur haat poore badan per pher le ye amal 3 martaba kare.

Ek hadees me aata hai ki Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam ne irshad farmaya ki jab tum raat me sone ke liye apne bistar per pahuncho to pehle Ayatal kursi pedh liya karo isko padhne se Allah tala ek bodyguard ko laga dete hai jo subah tak Shaitan se hifazat karta hai.

Ayatal kursi yahan padhe↓

Ayatal kursi ki Fazilat in Hindi

Bistar per letne se pehle 33 martaba subhanallah 33 martaba Alahumdulillah 34 martaba Allahuakbar padhna chaiye ye aapke paas khade hue ek khadim se behtar hai.

Bistar per jane se pehle bistar ko accji tarah se jhade Taqi koi dhool ya insect se clear ho jaye , right side ki taraf ho kar lete aur apne right side hand ke niche apna sar (head) rakhe aur left-side ka haat niche rakhe aur ye dua padhe.۔

sone se pehle ki dua
sone se pehle ki dua

 

 

 

 

 

 

 

 

 

اَللّٰھُمَّ بِاسْمِکَ اَمُوْتُ وَاَحْیٰی

Translation:- Ay Allah !Mai tera naam lekar marta aur jeeta hoon.

اے اللہ ! میں تیرا نام لے کر مرتا اور جیتا ہوں۔

O Allah (Almighty) I live and die in your name.

Bukhari shreef (6312)

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Jazakallah hu khair

 

Aqeeqah ki dua

Aqeeqah image

Aqeeqah kya hai?

Baccha paida hone ke shukr me jo janwar jibah kiya jata hai us ko Aqeeqah kahte hai.Aqeeqah ek sunnat aur sadaqa hai. maa-baap apane bachche ke janm ke baad, aamataur par saataven din yah sadaka karate hain.iske liye allah ke rasool sallallahu alahe wassalam ne Aqeeqah ki dua batayi hai jis ko padh kar Aqeeqah ko mukammal kiya jata hai.

Aqeeqah ke masail

Agar 🐄 (cow) ya bail zabah kare to ladke ke liye 2 hissa aur ladki ke liye 1 hissa kafi hai.

Qurbani ke janwar me aqeeqah ki hissedari ho sakti hai.qurbani ke janwar ke liye bhi wahi shrten hai jo aqeeqah ke janwar ke liye hai

Aqeeqah ka gosht kisi dost ko ya miskeeno ko baant de ya dawat per bula kar khilaye dono tarah jayez hai.

Aqeeqah ka gosht ke liye bhi wahi hukm hai wo qurbani ke gosht ka hukm hai .iska gosht dadi,nani,wagerah sab kha sakte hai.

Aqeeqah ke janwar ki khaal ya gareeb logon me taqseem kar de ya madarse wagerah me de de dono tarah jaiz hai.

yahaan aap akeekah ke baare mein kuchh buniyaadee jaanakaaree ke saath donon duaon ko jaanenge.

Aqeeqah ek Mustahab amal hai iske liye baccha paida hone ke saatwan (7) din behtar hai.agar saatwen din na kar paaye to jab mayassar ho tab kar len sunnat ada ho jayegi.ladke ke liye 2 bakre aur ladki ke liye 1 bakri zabah ki jaye yani ladke me male janwar aur ladki me female janwar yani bakri ko zabah kare ye zyada munasib hai.

Aapako Aqeeqah ke baare mein kya jaanana chaahie?

saahih ahaadeeth ke anusaar, Aqeeqah ek sunnat aur sadaqa hai. maa-baap apane bachche ke janm ke baad, aam taur par saataven din yah sadaka karate hain. haalaanki isamen ek jaanavar kee bali dena shaamil hai, kuchh maata-pita apane bachche ke pakshee ke baad kuchh dinon ke bheetar aisa karane mein saksham nahin ho sakate hain, isalie ve ise kisee bhee suvidhaajanak samay ke lie sthagit kar sakate hain. lekin yah bachche ke yauvan tak pahunchane se pahale kiya jaana chaahie. ladake aur ladakee ke akeekaah ko alag-alag ahaadees se spasht karane ke lie alag-alag niyam hain. ek avasar par, pavitr paigambar (shaanti aur allaah ka aasheervaad) us par ek ladake ke lie do bhed (ya bakariyaan) aur ek ladakee ke lie ek bhed (ya ek bakaree) ka vadh karane ke nirdesh ke roop mein sunaee gaee hai. jaanavar ke ling ke baare mein, yah ya to nar ya maada ho sakata hai.

Fayde

Aqeeqa karane ke kaie faayade hain. sabase pahale, yah ek sadaka hai jo buree kismat ko dor karta hai aur bacchon ke lie khush hali laata hai. doosare, yah ek sunnat  hai aur rasool kee sunnat ko jinda karana (shaanti aur allaah ki raza us par hona) aapako allaah ke raza aur inaam ke lie qurbaan  karata hai.

kya tumhen pata hai?

Arab log islaam ke aane  se pahale bhi Aqeeqah karate the. haalaanki, niyam aur paramparaen alag theen. islaam mein, janvar ki qurbani karane ke baad, bachche ka sir mundava diya jaata hai . islaam se pahale, non muslims arab log zibah kiye  gae jaanavar ke khoon se bachche ke sir ko soonghate the. (abou dawod, 2843).lekin allah ke rasool ne apni ummat ko Aqeqah ki dua ke saath iska behtreen tarika bata diya hai .

Aqeeqah ki dua

Aqeeqah ki dua ye hai

Agar ladka ho to ye dua padhe:

Aqeeqah ki dua  (Agar baccha ladka Ho to ): ‘Allahumma Hazihi Aqqeeqatu ____________ (yahan per bacche ka naam len). Damuha bi Damihi, Wa Lahmuha bi Lahmihi, Wa Adhmuha bi Adhmihi, Wa Jilduha bi Jildihi wa Sha’ruha bi Sha’rihi’.

 

Agar ladki ho to  ye dua padhe

Allahumma Hazihi Aqeeqatu ____________ ( yahan per bacchi ka naam len). Damuha bi Damiha, Wa Lahmuha bi Lahmiha, Wa Adhmuha bi Adhmiha, Wa Jilduha bi Jildiha wa Sha’ruha bi Sha’riha.’

Uper ki kisi ek dua padhne ke baad ye dua padhe

‘Inni Wajahtu Wajhiya Lillazi Fataras Samawaati Wal Ardh. Haneefanw wa Maa Ana Minal Mushrikeen. Inna Salaati wa Nusuki Wa Mahyaya Wa Mamaati Lillahi Rabbil A’lameen, Laa Shareeka Lahu Wa Bi Dhalika Umirtu Wa Ana Awwalul Muslimeen.”Allahumma Minka Wa Laka.’

Phir padhe, ‘Bismillah Allahu Akbar’ and janwar ko zabah kar de.

(Abu Dawood, Ibn Majah, Darimi, Ahmad).

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