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Haj karne ka tarika (step by step) in hindi

Haj karne ka tarika (step by step) in hindi

Haj karne ka tarika

दोस्तो पिछली पोस्ट में हमने Haj ke faraiz ,Haj ke wajibaat, और हज के दौरान ना करने वाले कामों के बारे में ज़िक्र किया था लेकिन आज की इस पोस्ट में हम Haj karne ka tarika (step by step) in hindi में जानेंगे ।

हज करने वाला हज के महीने में मक्का का इरादा करके सफर करे ,जब मीकात में पहुंच जाए तो गुस्ल करे या वज़ू करे ,और सिले हुए कपड़े उतार कर बिना सिले हुए कपड़े या लुंगी पहन कर 2 रकात नमाज पढ़े और हजनकी नियत करे और Talbiya पढ़े,अगर flight में सफ़र के दौरान ihraam बांधना मुम्किन ना हो तो अपने मुल्क से ही ihraam पहन कर नियत करे।

Talbiya पढ़ने के बाद हज में उन सारे ना करने वाली चीज़ों से बचना ज़रूरी है। हर नमाज़ के बाद ऊपर चढ़ते वक्त कसरत से Talbiya पढ़े , कोई काफिला मिले या नींद से जागे फिर भी हर वक्त Talbiya पढ़े।

Istikbaal e qibla

जब मक्का पहुंचे तो सबसे पहले मस्जिद ए हराम जाए,जब काबा शरीफ को देखे तो दुआ करे,फिर Hazre Aswad के पास जाए और Takber e Tahleel से उस का इस्तकबाल करे अगर मुम्किन होती Hazre Aswad को चूमे अगर मुम्किन नहीं या भीड़ बहुत ही ज़्यादा हो तो दूर से ही इशारा करे ।

Haze e Aswad ko choomna

हजरे अस्वद के दाहिनी तरफ से Tawaf शुरू करें और सात फेरे लगाए पहले 3 में थोड़ा तेज चले और बाकी फेरों में आराम उसके साथ चले और तवाफ के खत्म पर 2 रकात नमाज पढ़े इस tawaf ko tawaf e qudoom कहते हैं और ये सुन्नत है।

Safa aur marwa per sayi karna

फिर सफा पहाड़ी के पास जाए और उस पर चढ़कर किबला की तरफ मुंह करके तकबीर पढ़े और नबी अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम पर दुरूद भेजें और अल्लाह ताला से दुआ मांगे फिर मरवा पहाड़ी की तरफ मुंह करके उतरे और उस पहाड़ी के पास जाकर उस पर चढ़े और सफ़ा पहाड़ पर किए काम यहां भी करें जिस तरह पहले सफा पहाड़ी पर जो काम किया था वही मरवा पहाड़ी पर आकर करना है यानी की तकबीर कहना है और अल्लाह के रसूल पर दरूद भेजना है और अल्लाह से दुआ मांगना हैं और इस तरह फिर एक फेरा मुकम्मल हो जाएगा फिर वहां से सफा और सफा से मरवा 7 मर्तबा चक्कर लगाएगा और इस चक्कर लगाने को सयी कहते हैं।

Mina me qayam karna

आठवीं जिलहिज्जा को फज्र की नमाज़ मक्के में पढ़े और मिना जाकर कयाम करें वहां रुके और रात वहीं गुजारे 9 वीं जिलहिज्जा यानी अरफा के दिन सूरज डूबने के बाद मिना से अरफात आए और वहां खड़े होकर तकबीर और तहलील पढ़े और नबी अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम दरूद भेजें और अल्लाह ताला से दुआ करें

Muzdalfa me qayam karna

जवाल के बाद इमाम ज़ुहर के वक्त में एक अजान और दो अकामत के साथ जोहर और असर की नमाज पढ़ाएगा सूरज ढलने तक अरफा में खड़ा रहे फिर मक्का वापस आते वक्त मुजदलफा में उतरे और यहीं रात गुजारे वहां इमाम इशा के वक्त में एक अजान और एक अकामत से मगरिब और इशा की नमाज पढ़ाएगा

जिलहिज्जा के 10 वे दिन यानी कुर्बानी के दिन जब सुबह सादिक हो जाए तो ज़मरा उकबा पहुंचे ,इस पर साथ कंकरिया मारे कंकड़ी मारते वक्त से तलबिया कहना बंद कर दे फिर अगर चाहे तो कुर्बानी करें फिर अपना सर मुंडाए या बाल कटवाए फिर कुर्बानी के 3 दिनों के दौरान मक्का जाकर तवा Tawaf e ziyarat करें और मीना वापस आकर वहां रहे।

11 वीं जिलहिज्जा के जवाल के बाद रमी करे, हर हर कंकड़ी पर तकबीर कहे हैं फिर वहां खड़े होकर दुआ करें फिर जम्रह वस्ता जाकर रमी करें और आखिर में जमरह ओकेबा में रमी करें।

12 जिलहिज्जा के जवाल के बाद पहले की तरह ही तीनों जमरात की रमी करें इन दिनों में मीना में रात गुजारे फिर मक्के में दाखिल होकर बैतुल्लाह का तवाफ करें इस दबाव को तब आप फुल वादा कहते हैं तब आप के बाद 2 रकात नमाज पढ़े फिर जमजम का पानी पिए और अल्लाह से गिला करें अपने घर वालों के पास लौटना चाहें तो रोते हुए खाना काबा की जुदाई पर हसरत करते हुए वापस आए।

Madina me haziri

रसूलल्लाह सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया “जो मेरी कब्र की जियारत करेगा उसके लिए मेरी शिफात वाजिब होगी”

नबी अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की कबर की जियारत करना अफजल मुस्तहीबात में से है अगर अल्लाह किसी को हज की तौफीक दे तो हज से फारिग होने के बाद या पहले नबी अकरम सल्लल्लाहो वसल्लम की कबर की जियारत के लिए मदीना मुनव्वरा चला जाए और कसरत से दरूद ओ सलाम पढ़ें

जब मदीना मुनव्वरा पहुंचे तो कोशिश करें खुशबू लगाएं और अपने पास मौजूद सबसे बेहतर कपड़े पहने।

Rauza e Rasool Per Haziri

सबसे पहले अदब और वकार के साथ मस्जिद-ए-नबवी में दाखिल हो और 2 रकात तहियतुल उल मस्जिद पढ़कर जो चाहे दुआ करें फिर कबर शरीफ के पास जाकर कब्र के सामने अदब के साथ खड़ा रहे सलाम करें नबी अकरम सल्लल्लाहो वसल्लम पर दरूद ओ सलाम पड़े फिर सलाम कहने वालों की तरफ से आप सल्ला वाले वसल्लम को सलाम पहुंचाए फिर दूसरी मर्तबा मस्जिद-ए-नबवी जाकर जितनी चाहे नमाज़ पढ़े और अपने लिए अपने वालदैन के लिए तमाम मुसलमानों के लिए और दुआ की दरखास्त करने वालों के लिए दुआ करें मदीना मुनव्वरा में कयाम के दिनों को गनीमत जाने और जब भी मौका मिले नबी अकरम सल्लल्लाहो वसल्लम की जियारत करें बहुत ज्यादा तस्वीह करें तौबा करता रहे।

Jannatul baki ki ziyarat

जन्नतुलबकी भी जाना मुस्ताहब है जन्नतुलबकी जाए वहां सहाबा, की कबरों की जियारत करें जब तक मदीना मुनव्वरा में रहे जितनी नमाजे मस्जिद-ए-नबवी में अदा करना मुस्ताहब है जब अपने शहर वापस होना चाहे तो आखिर में मस्जिद-ए-नबवी में 2 रकात पढ़ना दुआ करना और नबी सल्ला वसल्लम की कबर मुबारक के पास आकर दरूद ओ सलाम पढ़ना मुस्तहब है।

Conclusion

तो आज के इस टॉपिक Haj karne ka tarika (step by step) in hindi  पर हमने हज करने का तरीक़ा जाना अगर आपको ये टॉपिक पसंद आया हो तो अपने दोस्तो के साथ जरूर शेयर करे।

Jazakallah hu khair

Haj kya hai।Haj karne ka tarika in Hindi

Haj kya hai।Haj karne ka tarika in Hindi

Haj kya hai | haj karne ka tarika

शरीयत के खास तरीके के मुताबिक़ किसी खास वक्त में खास जगहों की ज़ियारत करने को हज कहते है। इसमें वो मुसलमान जिसको अल्लाह ने माल वा दौलत से नवाजा हो उसको चाहिए हो ज़िंदगी में 1 बार अल्लाह के घर यानी काबा शरीफ की जियारत के लिए सफ़र करे ।और फर्ज़ को अदा करे।आज के इस टॉपिक में Haj kya hai।Haj karne ka tarika in Hindi बारे में हम बात करेंगे | Haj फ़र्ज़ होने के शराइत क्या है। मिक़ात, Haj ke faraiz , Haj ke wajibaat और उनके में बात करेंगे जिन सब का haj में करना मना है। तो चलिए शुरू करते हैैं।

अल्लाह ने क़ुरान में इरशाद फरमाया :- अल्लाह के लिए माल दार के लिए अल्लाह के घर का हैं करना फर्ज है,अगर कोई इन्कार करेगा तो अल्लाह सारी दुनिया से बे नियाज़ है।

अल्लाह के रसूल ने इरशाद फरमाया:- जो कोई अल्लाह के लिए हज करें और हज के दौरान बुरे काम ना करें और गाली गलौज ना करें तो वह हज से उस तरह वापस होता है जिस तरह अभी पैदा हुआ हो।

Haj farz hone ke sharait

नीचे दी गई शर्ते पाई जाने पर हर मर्द और औरत पर ज़िंदगी में 1 बार हज फर्ज है।

(1) मुसलमान हो काफिर पर है फर्ज नहीं ।

(2) बालिग हो नाबालिग पर हज फर्ज नहीं।

(3) आक़िल हो यानी अक्ल वाला हो पागल पर हज फर्ज नहीं।

(4)आज़ाद हो गुलाम पर हज फर्ज नहीं।

(5) माल दार हो गरीब पर हज फर्ज नहीं

Note :– इतना सामान घर वालों के पास हों कि हज का सफर खत्म होने तक घर वाले का खाना खुराकी और सफर और सवारी का इंतिजाम वापिस आने तक हो।

इसी तरह हज फर्ज होने के शराइत पाए जाने के बाद हज करने के लिए शर्त का पाए जाना भी ज़रूरी है।

(1) बदन सही सालिम होना , बूढ़े और कमजोर को सफर के लायक नहीं है उनमें उतनी ताक़त नहीं को की वो सफ़र कर सके तो ऐसे लोगों पर हज फर्ज नहीं है।

(2) सफ़र हज में मौजूद रुकावट हो, कैदी हो इन सब पर हज फर्ज नहीं है ।

(3) रास्ते में अमन हो अगर रास्ते में दंगा या फसाद का दार हो तो हज फर्ज नहीं है।

(4) औरत iddat में ना हो,अगर औरत iddat में हो या शौहर के इंतिक़ाल की वजह से iddat में हो तो हज कि अदायगी फर्ज नहीं है।

Haj sahi hone ke sharait

नीचे दिए गए शराइत पूरा होने पर ही हज अदा होगा।

(1) इहराम होना बिना इहराम के हज नहीं है।

इहराम यह है कि मीकात में तलबिया

لَبَّيْكَ ٱللَّٰهُمَّ لَبَّيْكَ، لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ، إِنَّ ٱلْحَمْدَ وَٱلنِّعْمَةَ لَكَ وَٱلْمُلْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ

लब्बाईक अल्लाहम्मा लब्बाईक लब्बाईक ला शारिका लका लब्बाईक इनल हम्दा वन्ना मता लका वल मुल्क ला शरीका लक

पढ़ते हुए हज की नियत करें और मर्द सिले हुए कपड़े उतार कर बाहर सिले हुए कपड़े पहने लूंगी और चादर होना मुस्तहब है ।

(2) हज का मौसम होना, शव्वाल जी कायदा और जिलहिज्जा के शुरू के 10 दिन हज का जमाना है अगर कोई इससे पहले तवाफ या सयी करें तो अदा नहीं होगा हज के महीनों से पहले इहराम बांधना सही है लेकिन मकरू है।

(3) कुछ खास इलाकों में हज अदा करना, अरफात का मैदान रुकने के लिए, मीना की वादी ठहरने के लिए मुजदलफा में रात गुजारने के लिए, और मस्जिदे हराम तवाफ जियारत के लिए है।

Mikaat kya hai

Mikaat वह जगह है जहां से मक्का में रुका हुआ शख्स के अलावा जब वह आज का इरादा करें इहराम के बगैर गुजरना जायज नहीं

Mikaat में एहराम बांधने की जगह इलाकों पर ऐतबार से अलग अलग है

यमन और हिंदुस्तान वालों की मीकात यलाम लम है।

मिस्र, सीरिया, और यूरोपियन कंट्री वालों की मिकात हज़फा है।

ईराक और eastern countries के लोगों के लिए मीकात zaat e ark है

मदीना वालों की मिकात Zul Hulefa है।

नज़द रियाध वालों की मीकात करण मनाजिल है।

इन में से किसी एक mikaat से हज के इरादे से गुज़रे तो ihraam बांधना वाजिब है, बिना ihraam के वहां से गुजरना जायज नहीं होगा।

मक्का वालों की mikaat मक्का ही है चाहे वो मक्का के रहने वाले हों चाहे जाकर बस गए हो।

Haj ke faraiz

Haj के फ़राएज 2 है।

1- 9वीं जिलहिज्जा के ज़वाल से कुर्बानी के दिन यानी 10 वीं जिलहिज्जा की फज्र की नमाज़ तक थोड़ी डर के लिए मैदान अराफात में ठहरना

2- अरफा में थोड़ी देर रुकने के बाद कबे का तवाफ करना ,इस को Tawaf e ziyarat या Tawaf e Afaza भी कहते है।

Haj ke wajibaat

Haj ke wajibaat 10 है।

(1) मीकात से ihraam बांधना

(2) मुजदल्फा में थोड़ी देर रुकना इसका वक्त 10 वीं जिलहिज्जा की फज्र के बाद से सूरज डूबने तक है।

(3) 10 वीं,11 वीं और 12 वीं जिलहिज्जा के बीच में Tawaf e ziyarat करना।

(4) सयी करना यानी सफा और मरवा की पहाड़ी के दरमियान 7 मर्तबा दौड़ना।

(5) मक्के में रहने वालों के अलावा लोगों का Tawaf e wada करना यानी रुखसती का Tawaf करना।

(6) हर Tawaf के बाद 2 रकात नमाज़ पढ़ना।

(7) कुर्बानी के दिनों में शैतान को कंकरी मारना।

(8) हरम में कुर्बानी के दौरान सर मुंडाना या बाल छोटे कराना।

(9) Tawaf और सयी के दौरान छोटी बड़ी नापकी से पाक रहना।

(10) मना की गई चीजों से बचना। जैसे गाली गलौज,लड़ाई, सिले हुए कपड़े पहनना, सर और चेहरा ढकना ये सारी चीज़ें हज में मना है इन सब से बचना वाजिब है।

Jin Cheezon Ka Haj Me Karna Mana Hai

Ihraam बांधे हुए आदमिंके लिए इन चीज़ों का करना जायज नहीं है।इनसे बचना जरूरी है वरना हज खराब हो जाएगा।

(1) बीवी से सोहबत करना

(2) ख़ुशबू लगाना

(3) नाखून काटना

(4) मर्दों के लिए सिले हुए कपड़े पहनना जैसे कमीज़,या पैजामा,कुर्ता और मोजा और बहुत सी सिली हुई चीज पहनना

(5) सर, दाढ़ी या नाद के नीचे के बाल साफ़ करना

(6) सर या बदन में तेल लगाना

(7) हरम का कोई पेड़ काटना या घास उखाड़ना

(8) जंगली जानवरों का शिकार करना चाहे उसका गोश्त खाना जायज हो या ना हो।

इन सब चीजों का हज में करना मना है इसका बहुत ही ध्यान देना चाहिए आम तौर पर इन सब का ध्यान लोग नहीं रख पाते ।

अल्लाह हम सबको हज करने की तौफीक अता फरमाए आमीन

Conclusion

तो आज Haj kya hai।Haj karne ka tarika in Hindi टॉपिक में हमने हज के बारे में जाना इसके बारे में जाना है Haj ke faraiz क्या है उसके बारे में जाना हज में किन-किन चीजों का करना मना है उसके बारे में जाना Haj Ke Wajibaat क्या है उसके बारे में जाना हज सही होने के शराइत यानी Haj ke Sharait, उसके बारे में जाना Mikaat के बारे में जाना।

अगर आपको इस पोस्ट से कुछ नॉलेज मिली हो तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें अपने दोस्तों के साथ ताकि दीन की मालूमात उन लोगों तक भी पहुंच सके।

Zakat kya hai। Zakat kisko dena chahiye

zakat kya hai | zakat kisko dena chahiye

Zakat kya hai

जकात इस्लाम का एक अहम रुकना है और फरीजा है अमीरों के माल में से उसका कुछ हिस्सा गरीबों में तक्सीम किया जाता है ताकि दुनिया में लोग बराबर हो सके और उसमें से लोगों का गरीबी खत्म हो जाए और मालदार और गरीबों के दरमियान मोहब्बत पैदा होती है और ताल्लुकात मजबूत होते हैं|Zakat kya haiZakat kisko dena chahiye |

zakat
zakat

Kin logon per farz hoti hai

जिन लोगों के अंदर नीचे दी गई बातें पाई जाती हैं उन लोगों के ऊपर जकात फर्ज होती हैं

  • मुसलमान मुसलमान होना काफिर के ऊपर जकात  फर्ज नहीं है चाहे पहले से काफी हो या मुर्तद हो गया हो
  • आजाद होना गुलाम के माल पर सरकार फर्ज नहीं है जो आदमी आजाद है उसके ऊपर जकात फर्ज है जो गुलाम है उसके ऊपर रकात फर्ज नहीं हैं

वाले हो होना यानी जो बच्चे बालिक हो गए हैं उनके ऊपर जकात  फर्ज है जो बच्चे नाबालिग हैं उनके माल पर जकात फर्ज नहीं है

  • अक्ल होना यानी अक्ल दार होना किसी पागल के माल पर जकात फर्ज नहीं है
  • माल का मालिक हो लेकिन अभी वह दूसरे के कब्जे में हो तो ऐसे माल पर सका तरस नहीं है जैसे औरत का मेहर मेहर पर कब्जा करने से पहले औरतों पर जकात फर्ज नहीं
  • माल निसाब तक पहुंचना जो माल निसाब तक नहीं पहुंचा उस पर जकात फर्ज नहीं साडे सात तोला सोना और साडे 52 तोला चांदी अगर इस निसाब को माल नहीं पहुंच रहा है तो जकात फर्ज नहीं है।

माल जरूरत से ज्यादा हो रहने के घर, पहने जाने वाले कपड़े, घरों के सामान ,सवारी के जानवर ,और इस्तेमाल करने वाले हथियारों पर जकात फर्ज नहीं है

इसी तरह इन चीजों पर ज़कात फर्ज नहीं है जो कारखाने वगैरह में इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि यह तमाम चीजें असली जरूरतों में दाखिल है

  • कर्जदार ना होना अगर किसी पर कर्ज हो और कर्ज निकालने पर निसाब पूरा नहीं होता है तो उस आदमी पर जकात फर्ज नहीं है।

ऐसा माल जिस पर माल बढ़ता हो जैसे जानवर, सोना चांदी, वगैरह चाहे जेवरात की शक्ल में हो या बर्तन की शक्ल में हो इस पर जकात फर्ज है

जवाहरात पर जकात फर्ज नहीं है मसलन मोती याकूत वगैरा अगर तिजारत के लिए ना हो तब ।

Zakat kab farz hoti hai

जकात फर्ज होने के लिए पहले तो निसाब पूरा होना चाहिए और दूसरा 1 साल गुजर जाना चाहिए।अगर शुरू साल में निसाब का मालिक हो और उस साल के दौरान माल निसाब से कम हो जाए फिर साल के आखिर में निसाब का मालिक हो जाए तो भी ज़कात फर्ज हो जाएगी।

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Zakat kab ada ki jaati hai

फकीर को जकात का माल देते वक्त या जकात के मुस्तहक लोगों में तक्सीम करते वक्त या किसी वकील को हवाले करते वक्त जकात की नियत करना जरूरी है वरना जकात अदा नहीं हो।

जकात अदा होने के लिए लिए शर्त नहीं कि फकीर को मालूम हो कि यह जकात का माल है।

जकात अदा होने के लिए फकीर को माल का मालिक बनाना जरूरी है।

अगर किसी निसाब के मालिक आदमी को कोई फकीर कर्ज देने वाला हो और वह जकात की नियत से अपनी तरफ से उसका कर्ज अदा करके उसकी जिम्में से बरी करें तो जकात अदा नहीं होगी क्योंकि इस सिचुएशन में मालिक बनाना नहीं हुआ।

Kin cheezon per zakat wajib hai

  • सोना चांदी
  • तिजारत का सामान
  • बकरी गाय ऊंट

Gold per zakat

सोने और चांदी पर जकात वाजिब है जब वह निसाब को पहुंच जाए।

सोने के निसाब कि मिकदार 20 मिस कॉल है 20 मिस कॉल तकरीबन 85 ग्राम के बराबर होता है।

चांदी के निसाब की मिकदार 200 दिरहम है 200 दिरहम तकरीबन 595 ग्राम के बराबर होता है।

सोने और चांदी में जगा 40 वां हिस्सा निकाली जाती है जकात निकालने वाले को यह अख्तियार है कि वह जकात में सोना या चांदी ही दे या रुपए पैसे में अदा करें या जकात में जरूरत की चीजें दें ये जकात देने वाले पर निर्भर करता है।

zakat gold
zakat gold

 

 

 

 

 

 

Business ke maal per zakat

जब तिजारत का माल सोना और चांदी के निशान तक पहुंच जाए तो सका तो अजीब हो जाती है मुसलमान ताजिर साल के आखिर में अपने पास मौजूद तमाम तिजारत के माल का हिसाब लगाएगा अगर इसकी कीमत बाजार के मुताबिक निसाब तक पहुंच जाए तो उसकी जकात अदा करेगा इसमें भी ज का 40 वां हिस्सा है अगर माली तिजारत निसाब तक ना पहुंचे तो इसमें जकात नहीं है।

हिसाब लगाने में सिर्फ माले तिजारत को जोड़ा जाएगा दुकान की जरूरत में इस्तेमाल की जाने वाली चीजे फर्नीचर वगैरह इसमें शामिल नहीं।

Property aur janwar per zakat

अगर किसी के पास जमीन जायदाद और जानवर हो और उसकी तिजारत की नियत करें तो इन चीजों पर जकात का साल तिजारत शुरू करने के वक्त से शुरू होगा।

वह माल जो उसके मिलकियत हो लेकिन उसको हासिल करना दुश्वार हो जैसे किसी को कर्ज दे और कर्जदार के खिलाफ उसके पास दलील ना हो फिर एक मुद्दत के बाद वह कर्ज मिल जाए

इसी तरह कोई इसका माल हड़प कर ले और उसके खिलाफ कोई सबूत ना हो फिर एक मुद्दत के बाद उसका वह माल वापस मिल जाए

इस तरह अगर किसी का माल गुम हो जाए फिर एक मुद्दत के बाद मिल जाए

इसी तरह किसी का माल जप्त किया जाए फिर कुछ टाइम के बाद वापस कर दिया जाए

इसी तरह अगर कोई अपना माल रेगिस्तान वगैरह में दफन कर दे और जगह भूल जाए फिर एक मुद्दत बाद जगह मालूम हो जाए इन तमाम हालातों में पिछले सालों की जकात अदा करना जरूरी नहीं है यानी इन पिछले सालों में जकात अदा करना उसकी जरूरी नहीं।

Kin logon ko zakat de sakte Hain

Zakat kya hai। Zakat kisko dena chahiye|  fakir, miskeen, aamil , gulam, karzdaar,jihad me jane wala mujahid aur musafir ko zakat de sakte hain.

  • फकीर को जकात दे सकते हैं ऐसा फकीर जिसके पास कुछ ना हो ऐसे फ़कीर को जकात देना चाहिए चाहे वह सेहतमंद और कमाने वाला हो।
  • मिस्कीन जिसके पास कुछ माल ना हो उसको मिस्कीन कहते हैं और उसको सिखा दे सकते हैं
  • आमिल जो जकात जमा करने के काम के लिए रखा गया हो उसको जकात कमाल उसकी मेहनत के मुताबिक दिया जाएगा।
  • गुलाम ऐसा ऐसा गुलाम जिसके मालिक और उसके दरमियान एक समझौता हो गया हो कितना माल लाकर देने की सूरत में वह आजाद कर दिया जाएगा।
  • कर्जदार वह शक्स जिस पर कर्ज हो और वह पर ज्यादा करने के बाद निसाब का मालिक ना रहता हो उसके कर्ज अदा करने के लिए जकात देना फकीर को देना से अफजल है।
  • फि सबीलिल्लाह जो लोग अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए निकले हैं जिसकी वजह से वह फकीर हो या वह को हज के लिए निकले हो वह अपने पास मौजूद सामान खत्म होने की वजह से बैतुल्लाह तक पहुंचने में दिक्कत आ रही हो तो ऐसे लोगों को जकात दिया जा सकता है।
  • मुसाफिर जिसके शहर में उसका माल हो लेकिन सफर में माल खत्म हो गया शहर पहुंचने तक के सामान के मुताबिक जकात कमाल उसको दिया जा सकता है।

Kin logon ko zakat nahi diya ja skata

  • काफिर को जकात देना जायज नहीं है
  • मालदार को जकात देना जायज नहीं है
  • बनी हाशिम को जकात देना जायज नहीं है

अपने वालिद दादा और परदादा वगैरह को जकात देना जायज नहीं।

अपनी औलाद और अवलाद की औलाद नीचे तक को जकात देना जायज नहीं है।

अपनी बीवी को जकात देना जायज नहीं है इसी तरह बीवी के लिए अपने शौहर को जकात देना जायज नहीं है इनके अलावा दूसरे रिश्तेदारों को जकात देना अफजल है।

जकात का माल मस्जिद वह मदरसे की कंस्ट्रक्शन रास्ता पुल वगैरा दुरुस्त करने में खर्च करना जायज नहीं है

इसी तरह जकात का माल से मय्यत को कफन देना और मय्यत का कर्ज अदा करना जायज नहीं है

क्योंकि इन तमाम कामों में मालिक बनाना नहीं है और मालिक बनाए बिना जकात अदा नहीं होती

रिश्तेदारों को जकात देना अफजल है फिर पड़ोसियों को देना अफजल है। किसी जरूर बिना किसी जरूरत एक शहर से दूसरे शहर जकात का माल ट्रांसफर करना मकरु है अगर वहां रिश्तेदार मौजूद हो तो मकरु नहीं है या दूसरे शहर वाले अपने शहर वालों से ज्यादा मोहताज हो तो जकात का माल ट्रांसफर करने मकरूह नहीं है अगर किसी जरूरत ने जकात खर्च करने से मुसलमान के लिए ज्यादा फायदा हो तो ट्रांसफर करना मकरू नहीं जैसे खैराती मदरसों में जकात को ट्रांसफर किया जा सकता है।

आज का ये टॉपिक Zakat kya hai। Zakat kisko dena chahiye इसमें हमने जकात के बारे में बहुत से मालूमात जानी अगर आपको ये मालूमात पसंद आयी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे ।

Jazakallah hu khair

 

Namaz padhne ka mukammal tarika

namaz padhne ka tarika

Namaz padhne ka tarika

आज हम Namaz padhne ka mukammal tarika के बारे में बात करेंगे। किस तरह नमाज़ पढ़ते है नमाज़ में क्या पढ़ा जाता है,कब पढ़ा जाता है और पूरी डिटेल के साथ नमाज़ का तरीका जानेंगे।

Takbeer e tahreema kahna

सबसे पहले वजू करके पाक साफ कपड़े पहनकर पाक साफ जगह पर किबले यानी काबा शरीफ़ की तरफ मुंह करके खड़े हो जाए फिर दोनों हाथ कानों कि लौ तक उठाएं। और तकबीरे तहरीमा अल्लाह हू अकबर कहते हुए दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध लें।

हाथ इस तरह बांधे की दाया हाथ ऊपर और बाया हाथ इसके नीचे रहे अगर कोई वजह ना हो तो नमाज खड़े होकर पढ़ें

Sana padhna

तकबीरे तहरीमा के बाद सना यानी सुभहानका ल्लाहुम्मा वाबिहमदिका वाताबाराकस्मुका वाता आला जद्दुकब्वा का ईलाहा गयरुक

Subhanaka allahumma wabihamdika wata barakasmuka wata aala jadduka wala ilaha gayruk

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Tauz aur tasmiya padhna

Sana padne के बाद tauz यानि आउजु बिल्लाही मिनश शाय तानिर रजीम पढ़े

उसके बाद tasmiya यानि बिस्मिल्ला हिररहमा निररहीम पढ़े।

Surah fatiha ke saath koi surah padhna

Tauz ,tasmiya पढ़ने के बाद surah fatiha पढ़ना surah fatiha ke baad आमीन कहे।और कोई दूसरी surah को मिलाए

Ruku karna

फिर Allahukabar कह कर Ruku में चले जाए Ruku में गुठनो को पंजो से पकड़ ले और पीठ और पैर को सीधा रखें और गुठना नहीं मोड़ना चहिए।फिर 3,5,7, या 9 बार सुभआना रब्बीयाल अज़ीम पढ़े।Ruku करने के बाद समियाल्ला हुलिमन हमिदा कहते हुए खड़े हो जाए और ये दुआ पढ़े। रब्बाना वलाकल हम्द Rabbana walakal hamd पढ़े।

Sajda karna

अब तकबीर यानी अल्लाहु अक़बर कहते हुए सजदे में जाए सजदे में हथेलियां खुली हुई हों यानी मुट्ठी बंद ना हो , उंगलियां एक दूसरे से मिली हुई हों , कुहनियां ज़मीन से ऊंची रहे ,दोनों पैर का निचला हिस्सा ज़मीन से लगा हो, माथे का कुछ हिस्सा और नाक का ज़मीन से लगना जरूरी है। सजदे में भी 3,5,7,या 9 बार सुभ आना रब्बियाल आला subhana rabbiyal aala पढ़ना सुन्नत है।सजदे से तकबीर कहते हुए अ उठ कर इस तरह बैठे की बाएं पैर को बिछा कर बैठे और दायां पैर को नीचे खड़ा करे ,दोनों हाथों को गुठने के क़रीब अपनी जांघ पर रखे ,हाथ खुले हुए हो और उंगलियां एक दूसरे से मिली हुई हों, फिर तकबीर कहते हुए दूसरा सजदा करें, दूसरा सजदे के बाद दूसरी रक्त के लिए सीधा खड़ा हो जाए और इसी तरह पूरी नमाज मुकम्मल करें ।

Tashahud

3 या 4 रकात वाली नमाज में 2 रकात के बाद बैठकर Tashahud यानी Atahiyat( Atahiyato lillahi wassalawatu wattayyibato assalamu alaika ayyuhan nabiyyu warah matullahi wabara katuh assalamu Alaina wala ibadillahi _ssaliheen ashadu alla ilaha illal laahu wa ash hadu anna Muhammadan Abduhu wa rasuluhu और Darood Shareef पढ़ना सुन्नत है।

इसी तरह कादा ए अखिरा में Tashahud पढ़ना वाजिब है तथा उसके बाद मुकम्मल Darood Shareef और इसके बाद Dua e masoora पढ़ना सुन्नत है

Dua e masoorah

अल्लाहुम्मा इन्नी जलमतु नफ्सी जुल्मन कसीरौं वाला यागफिरूज्जुनूबा इल्ला अंता फगफिर्ली मगफिरातम में इंदिका वर हमनी इनका अंतल गफूरूर रहीम

Allahumma inni zalamtu Nafsi zulman kaseerawn wala yagfiruz zubnooba illa anta fagfirli magfiratam min in dika warhamni innka antal gafoorur Raheem

आखिर में अस्सलामु आलेकुम व रहमतुल्लाह कहकर दोनों तरफ सलाम फेरे।

अगर नमाज इमाम के साथ पड़ रहा हो तो पहली रकत में तकबीर तहरीमा यानी अल्लाह हू अकबर के बाद सिर्फ सना पढ़कर खामोश रहे, और उस हालत में कुछ ना पढ़े इस तरह रुकू से उठने वक्त इमाम समीअल्लाह हुली मन हमीदा कहे तो मुकतदी सिर्फ रब बना वाला कल हम्द कहे, Ruku और सजदा की तस्बीह को पढ़े।

आज की इस पोस्ट में हमने Namaz padhne ka mukammal tarika , और उसमे पढ़ी जाने वाली दुआएं Tashahud, Dua e masoorah और तस्बीह के बारे में जाना ।आपको ये पोस्ट कैसी लगी comment में जरूर बताए।

5 Kalma in Hindi

kalma i hindi

 Islam ka 5 kalma in Hindi 

भाईयों Kalma इस्लाम का दरवाजा और दीन और ईमान की जड़ वा बुनियाद है।इसी कल में को पढ़कर लोग उम्र भर के काफिर और मुस्लिम मोमिन और मुसलमान बन जाते हैं और दुनिया की तमाम खुराफात से निजात के मुस्तहिक हो जाते हैं।लेकिन इस कलमे में को पढ़ने के लिए एक शर्त है इस कलमें को सिर्फ जबान से अदा ना कर लिया जाए इस कलमे को जबान से भी अदा किया जाए और दिल से भी उसे माना जाए दिल से भी उसे कुबूल किया जाए। और तौहीद वा रिसालत को बिल्कुल सही से समझा जाए यानि बगैर मतलब के सिर्फ फर्जी ज़बान से Kalma पढ़ लिया तो वह अल्लाह के नजदीक मोमिन और मुसलमान नहीं होगा लिहाजा जरूरी है कि इस कलमे के तार्जुमे को और मतलब को समझे और इस पर अमल करें। तब जाकर वह पक्का मुसलमान और सच्चा मोमिन बन सकेगा।  isi liye aaj ka ye topic 5 Kalma in Hindi me hum iske bare me janege aur jinka yaad hona har musalmaan ko zaroori  bhi hai |

1 st kalma Kalma e Tayyaba

पहला कलमा तय्यब

“ला इलाहा इल्लल्लाहु मोहम्मद उर रसूल अल्लाह”

“La ilaha illallaah u muhammadur rasoolullah”

तय्यब का मतलब होता है पाक

Tarjuma

“नहीं है कोई माबूद सिवा अल्लाह के और हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम उसके रसूल है” यानी अल्लाह ताला ही बंदगी और इबादत के लायक है और हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं।

Nahi hai koi mabood siwa Allah ke aur Hazart Muhammad Mustafa sallallahu alayhi wasallam uske rasool hai yani ki Allah hi taala bandagi aur ibadat ke laik hai aur Hazart Muhammad Mustafa sallallahu alayhi wasallam Allah ke rasool hai।

2 nd kalma shahadat

शहादत का मतलब होता है गवाही देना

अश हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वा अश हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू वा रसूलुहु।

“Ashhadu alla ilaha illallah Hu wa ash hadu Anna Muhammadan Abduhu wa rasuluhu”

Tarjuma

मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह ताला के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं और मैं गवाही देता हूं कि हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वल्लम अल्लाह के बंदे और रसूल हैं।

Mai gawahi deta hoon ki Allah taala ke siwa koi ibadat ke laik nahi aur mai gawahi deta hoon ki Hazrat muhammad Mustafa sallallahu alayhi wasallam Allah ke bande aur Rasool hain । 

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3 rd kalma Tamjeed

सुभहानल्लाहि वलहमदु लिल्लाही वला इलाहा इल्लल्लाहु वल लाहू अकबर वाला ह वला वला कुव्वता इल्ला बिल्ला हिल अलिय्युल अज़ीम।

Subhanallahi wal hamdulillahi wala ilaha ilallahu Wallahu akbar wala haula wala kuwwata illa billahil aliyyul azeem।

Tarjuma

अल्लाह पाक है और तमाम तारीफें अल्लाह के लिए ही है और अल्लाह के सिवा कोई माबुद नहीं और अल्लाह बहुत बुज़ुर्ग है और ताकत वा कुव्वत अल्लाह की ही तरफ से है जो बुलंद और अजमत वाला है।

Allah paak hai aur tamaam tareefen Allah ke liye hi hai aur Allah ke siwa koi mabood nahi aur Allah bahut buzurg hai aur taqat aur quwwat Allah hi ki taraf se hai jo buland aur azamat wala hai।

4 th kalma Tauheed। chautha kalma

ला इलाहा इलल्लाहु वहदहु ला शरीका लहू लहुल मल्कु वलाहुल हमदु युहई वा युमीतू वहुवा हाय्युल ला यमुतू अबा दन अबादा ज़ुल जलाली वल इकराम बियादिहिल ख़ैर वहुवा अला कुल्ली श्ययिं कदीर।

la ilaha illallahu wahdahu la sharika lahu lahul mulku walahul hamdu yhyi wayumeetu wahuwa hayyul la yamutu abadan abada zuljalali Wal Ikram biyadihil khair wahuwa ala kulli shayin qadeer।

Tarjuma

अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं वो एक है और उस का कोई शरीक नहीं इसी का मुल्क और इसी के लिए सब हम्द है वो जिंदा करता है और मौत देता है और हमेशा हमेशा के लिए ज़िंदा है उसे कभी मौत नहीं वो जलाल और बुजुर्गो वाला है उसी के हाथ में भलाई है और वो हर चीजों पर कादिर है।

Allah ke siwa koi ibadat ke laik nahi wo ek hai ।aur uska koi shareek nahi ।usi ka mulk aur usi ke liye sab hamd hai wo zinda karta hai aur maut deta hai aur hamesha hamesha ke liye zinda hai use kabhi maut nahi ।wo Jalal aur buzurgi wala hai usi ke haath me bhalayi hai aur wo har cheez per qadir hai।

5 th kalma Astagfaar

अस्तागफिरुल्लाहा रब्बी मिन कुल्ली जमबिन अजनबतुहु अमा दन अव खता अन सिर्रं अव अला नियातन वा अतुबु इलैह मिनज़ जमबिल्लजी आ लामु वामिनज़ जंबिल लाजि ला आ लामु इन्नका अंता अल्लमुल ग्यूबी वा सत्तारुल ओयूबी वा गफ्फा रुज्जुनूबी वाला ह वला वला कुव्वता इल्ला बिल्ला हिल अलिय्युल अज़ीम।

Astaghfirullaha Rabbi min kulli zambin aznabtuhu amadan aw khata an sirran aw ala niyatawn wa atoobu ilaih minaz zambillazi la alamu innaka anta allamul gyoobi wa gaffaruz zunoobi wala haula wala kuwwata illa billahil aliyyul azeem।

Tarjuma

मगफिरत चाहता हूं अल्लाह से जो मेरा परवरदिगार है तमाम गुनाहों से जो मुझसे जानबूझकर यह खता से हुए हैं । पोशीदगी में जाहिर में और तोबा करता हूं उस गुना से जो मैं जानता हूं और उस गुनाह से जो मैं नहीं जानता बेशक तू है सारे गुनाहों का जानने वाला आइबो को छिपाने वाला और गुनाहगारों को बख्शने वाला है और नहीं है कोई ताकत व कुवैत अल्लाह के सिवा बुलंद वा बर्तर मगर तेरी तौफीक से।

Magfirat chahta hoon Allah se jo mera parwardigaar hai tamaam gunahon se jo mujhse Jaan boojh kar ya anjane me jo galtiyan ho gayi hai main usse Tauba karta hoon us gunaah se jo pooseeedgi me ya zahir me ho gaye hai aur Tauba karta hoo। Us gunaah se jo main nahi janta beshak tu sare gunahon ko bakhshne wala hai aur nahi hai koi takat wa kuwat Allah ke siwa buland wa bartar Magar teri taufeeq se।

To aaj humne islam ke 5 kalma hindi language me padha  aur jaana agar aapkakoi sawal hai to aap comment box mepooch  sakte hai

 Agar aapko ye information pasand aayi ho to apne doston ke saath share karna na bhoolen.

             jazakalllah hu khair

Safar me namaz kaise padhe

Safar me namaz kaise padhe। सफर में नमाज़ कैसे पढ़े।

Safar me namaz kaise padhe। सफर में नमाज़ कैसे पढ़े।

Safar me namaz kaise padhe , logon ke man me aksar ye sawal hota hai ki safar me kitni rakat padhni hai kitne dino ke safar me namaz ko Qasr karna hai, flight, train wagerah me namaz kaise padhni hai aaj hum hadeeson ki roshni me janenge ki Safar me namaz kaise padhe.

Safar me namaz padhne ke ahkaam। सफर में नमाज़ पढ़ने के अहकाम।

Hazrat Abdullah bin Umar razi Allahu tala anhuma ne bayan farmaya ki main ne rasool sallallahu alaihi wasallam ke saath ghar per aur safar per namaz padhi hai.ghar per rahne ki halat me maine aap sallallahu alaihi wasallam ke saath zuhar ki Namaz 4 rakaat farz padhi aur uske baad 2 raka’t Sunnat padhi,aur safar me maine aap sallallahu alaihi wasallam ke saath zuhar ki namaz 2 raka’t Farz padhi,aur uske baad 2 raka’t Sunnat padhi, aur safar me maine aap sallallahu alaihi wasallam ke saath namaz asar 2 farz padhi aur uske baad aapne koi sunnat ya nafil namaz nahi padhi ,aur magrib ki namaz aap sallallahu alaihi wasallam ne ghar me aur safar me barabar padhi unme koi kami nahi ki,ye din ki witr namaz hai uske baad ap 2 raka’t Namaz padhte the. (Tirmizi)

Explanation:-

Is hadees me namaz safar ki namaz ka zikr kiya gaya hai jisko namaz Qasr kahte hai Allah tala ne apne fazl se safar me farz namazon ki rakaton me kami farma di hai yani 4 rakaat wali namaz safar me 2 raka’t padhi jati hai , is qanoon me zuhar,asar,aur isha ki farz Namaz ko shamil kiya gaya hai, magrib aur fazar ki namaz me koi Qasr nahi hai ,hadees me zuhar ,asar ka zikr kiya gaya hai ,isha ki farz namazon ki qasr ka zikr dosri riwayat me hai.

Kitne lambe safar per safar ke hukm jari hote hai.। कितने लंबे सफर पर सफर के हुक्म

जारी होते हैं।

Agar koi aadmi 1 manzil ya 2 manzil ka safar kare to is safar se Shariyat ke ahkaam nahi badalte ,aur Shariyat ke qanoon se wo musafir nahi hoga ,poori namazein poori tarah padhi jayegi aur ramzan me poore roze bhi rakhe ga,jab rak aabadi ke andar chale tab tak Musafir ka koi humk nahi agar bus stop, railway station, airport aabadi ke andar hai to wo abadi ke hukm me aata hai agar ye sab aabadi ke bahar hai to bahar jate hi safar ke ahkaam shuru ho jayenge chahe wo city ke qareeb hi kyun na ho.

Safar ke masail। सफर के मसाइल।

Masla:- agar koi jagah itni door hai ki wahan log 3 din me pahuncha karte hai jiko 48 kilometre hota hai.

Masla:- Agar koi jagah itni door hai ki oont,aur aadmi ki speed se 3 manjil hai lekin train,car,bus aur plane me safar kare to jaldi se pahunch jaye tab bhi Shariyat me wo musafir hai.

Masla: jo koi Shariyat ke hisaab se musafir hain wo zuhar Aur asar,aur isha ki farz namaz 2 -2 rakat padhe aur sunnaton ka ye hukm hai ki agar fazr ki sunnaton ke siwa aur dosti namazon ki sunnatein chod dena durust hai.un sunnaton ko chod dene se kuch gunah nahi hoga aur agar jaldi na ho aur na hi apne dosto ka saath choot jane ka dar ho to sunnatein poori padh le .

Masla:- fazr aur magrib aur witr ki namaz me bhi koi kami nahin hain ,jaise hamesha padhi jati hai waise hi safar me padhti rahe.

Masla: musafir ko farz ,zuhar,asar aur isha ki farz namazon ko sirf 2 rakat hi padhna chahiye 4 rakaat padhna gunah hai

Masla:– Agar bhoole se 4 rakat padh le to agar dusri raka’t per baith kar tashahud padhi hai .tab to 2 rakatein farz farz ki ho gayi ,aur 2 rakatein nafil ki ho jayegi ,aur agar 2 raka’t per na baithe ho to 4 rakaat nafil ho gayi ,farz Namaz phir se padhe.

Masla:- Agar raste me kahin ruk gaye ,aur agar 15 din ya us se zyada rukne ko niyat kar li hai to ab wo musafir nahi rahi,phir agar plan change ho gaya phir 15 din se pehle jane ka irada kar liya to bhi musafir nahi kahlayega yahan ruk kar namazein poori padhna padega.lekin agar ab jahan jane ka irada hai hai aur wo jagar 3 meel se door hai to wo phir mussafir ho jayega . agar doori 3 meel se kam hai to musafir nahi kahlayega poori namaz padhna padega.

Masla: Agar raste me kayi jagah rukne ka irada ho 10 din yahan 5 din wahan lekin poore 15 din rukne ka irada kahin nahi ho tab bhi musafir rahega.

Masla: kisi ne apna city bikul chod diya ho ,aur dosri jagah ghar bana liya ho wahin rahne laga ho ab purane ghar se koi matlab na ho to wo city aur ghar Pardes ki tarah hai agar safr ke dauraan raste me pehla Shahar pade aur 3 se 4 din rukna musafir rahega musafir ki tarah namaz padega.

Masla: shadi ke baad agar aurat permanent apni sasuraal me rahne lagi to ab us ka asli ghar sasuraal hai agar Aurat 3 manzil chal kar maike gayi ,aur 15 din tharne ki niyat nahi hai to wahan musafir rahegi.shariyat ki qanoon ki tarah namaz padhegi.

Masla:– nadi me kashti chal rahi ho aur Namaz ka waqt aa gaya to isi chalti naavo per qible ki taraf ho kar namaz padh le agar khade hokar padhne me sir ghoome to baith kar padh le.

Masla:– train me namaz padhne ka yahi hukm hai .

to aaj hum logon ne Safar me namaz kaise padhe aur is ke masail ko jana.ummeed karte hai ki aapko kuch knowledge mili hogi .

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Namaz ke wajibaat kitne hain। नमाज़ के वाजिबात कितने हैं

Namaz ke wajibaat। नमाज़ के वाजिबात 14  hain, agar namaz me bhool kar wajib choot Jaye to namaz me sajda sahou karna wajib hoga,aur agar Jaan boojh kar chod diya to namaz ko dohrana wajib hai sajda sahou se kaam nahi chalega.

(1) Surah fatiha ka padhna

(2) Surah fatiha ke baad koi surat milana

(3) Farz namazon ki pehli 2 rakat me Qirat karna

(4) Ruku karke seedha khada hona

(5) Dono sajdon ke darmiyaan baithna

(6) Pehla qada karna yani attahiyaat ke liye baithna.

(7) Attahiyaat padnna

(8) Salam kah kar namaz ko mukammal karna

(9) Imam ke liye magrib ,isha ki pehli 2 rakaton me aur fazr ki aur juma,eid aur taraveeh ki sab rakaton me buland awaz se Qirat karna

(10) Witr me dua e Qunoot padhna

(11) Eid ki namazon me 6 se zayada takberaat kahna.

Hum ne Namaz ke wajibaat। नमाज़ के वाजिबात jana ab hum janenge ki Namaz ki sunnatein kya hain। नमाज़ की सुन्नतें क्या हैं

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Namaz ki kitni sunnatein hain। नमाज़ की कितनी सुन्नतें हैं

Namaz ki sunnatein 14 hain agar aap in sab baaton ka khayal karte hue namaz ada karte hain to aap ki namaz sunnat ke mutabiq hogi .Namaz ki sunnatein ye hain.

(1) Takbeer yani Allahuakbar kahte hue dono hathon ko kano tak uthana

(2) Mardon ko naaf ke niche aur auraton ko seene per haath bandhna.

(3) Sana padhna yani subhanaka allahumma se lekar akhir tak padhna

(4) Tauz yani Auzubillahiminashshaitanir-rajeem padhna

(5) Tasmiya yani Bismilla-hirrahmanir-rahim padhna

(6)Ruku aur sajda ko jate waqt balki har ek rukn se dusre rukn me jate waqt Allahuakbar kahna.

(7) Ruku se uthte waqt smiyallahuliman hamida kahna

(8) Ruku me subhana rabbiyal azeem kahna. Kam se kam 3 baar kahna.

(9) Sajde me subhana rabbiyal ala kam se kam 3 baar kahna

(10) Dono sajdon ke darmiyaan me aur Attahiyaat ke liye mardon ko left pair per baithna aur Dahine pair khada karna

Auraton ko dono pair right side nikal kar baithna

(11) Darood shraeef padhna

(12) Darood shreef ke baad dua padhna

(13) Salam ke waqt dahine aur bayein taraf munh pherna

(14) Salam me farishton aur muqtadiyaon aur jinnat jo hazir ho un ki niyat karna.

Namaz ke makrohaat । नमाज़ के मकरूहात

Namaz ke makrohaat 13 hain.

(1) Kokh per haath rakhna

(2) Kapda sametna

(3) Jism ya kapde se khelna

(4) Ungliyan chotkana


(5) Dayein ,bayein gardan ko ghumana

(6) Angdaiyaan lena

(7) Kutte ki tarah baithna

(8) Chadar wagerah ko latka hua chod dena

(9) Bina kisi wajah se aalti palati maar kar baithna

(10) Samne ya sar per tasveer hona

(11) Tasveer wale kapde me namaz padhna

(12) Peshaab ,pakhana ya bhook ki shiddat ke saath namaz padhna

(13) Aankhen band karke namaz padna

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Namaz ke faraiz

Namaz ke faraiz

Namaz ke faraiz kitne hai । नमाज़ के फाराइज़ कितने हैं।

Namaz ke faraiz 14 hain isme se kuch faraiz aise hain jinka namaz se pehle hona zaroori hai in sab ko namaz ke khaarji faraiz bhi kahte hain.aaur kuch faraiz aise hain jinka namaz me hona shart hai jisko daakhili faraiz kahte hain.inki list ye hain.

(1) Badan ka paak hona

(2) kapde ka paak hona

(3) satar ka chipana yaani mardon ko naaf se guthno tak aur Aurat ko Chehre aur hatheliyo aur pairon ke alawa poora badan dhakna farz hai.

(4) Namaz ki jagah ka paak hona

(5) Namaz ka waqt hona

(6) Qibla ki taraf munh karna

(7) Namaz ki niyat karna

(8) Takbeer e tahreema tanai Allahuakbar kahna

(9) Qayam karna yani khada hona

(10) Qirat karna yani 1 badi ayat ya 3 choti ayat padhna

(11) Ruku karna

(12) Sajda karna

(13) Qada-e-akhera karna

(14) Apne irade se namaz khatm karna

Ye the faraiz e namaz inme se koi bhi cheez Jaan kar ya bhool kar na karne per sajda sahou se bhi namaz nahi hogi Namaz ko lautana padega .

  1. Masla :- Aurat per Jume ki namaz farz nahi hai ,wo apne ghar me Jume ke din zuhar ki namaz padhegi ,lekin agar aurat Jume ki namaz ke liye chali gayi aur imam ke piche padh li to Jume ki namaz ada ho jayegi ,phir us waqt namaz e zuhar na padhe.
  2. Agar imam ke piche namaz padhe to ye niyat karna bhi zaroori hai ki imam ki iqtida me namaz padh rahi hoon.
  3. Agar imam ke piche koi namaz padhe to kisi bhi rakat ke surah fatiha ya koi surat na padhe.
  4. Agar fazar ki namaz qaza ho jaye aur suraj nikle aur aankh khule to Sunnat aur farz dino ki qaza padhe agar zuhar ka waqt aagaya aur fazar ki qaza nahi padhi to ab fazar ki sirf qaza padhe sunnaton ki qaza padhne ka waqt guzar gaya. 

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Aaj hum janenge ki isha ki farz Namaz ke baad Witr ki namaz kaise padhe .witr ki namaz wajib hai isko chod dene se farz namaz mukammal nahi hogi.

witr ki namaz ka tarika

Witr ki namaz 3 rakaat hai ,is ka waqt wahi hai jo isha ka hai ,lekin isha ke farzon se pehle nahi padhi ja sakti, vitr ki namaz padhne ka Tarika ye hai ki 3 rakaat Namaz vitr ki niyat karke namaz shuru kar de ,aur 2 har namaz ki tarah padh kar qada me baith jaye abduhu wa rasooluho tak padh kar Teesri rakaat ke liye khade ho jaye ,aur Teesri rakaat me alahumdulillah aur surat padhne ke baad Allahu Akbar kahte hue haath kandhon tak ke jaye aur phir isi tarah haath baandh kar duaye qunoot padhe uske baad ruku me jaye aur baqi namaz mamool ke mutabiq padhe.

Dua e Qunoot (recited in Witr prayer) –

اَللَّهُمَّ إنا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِئْ عَلَيْكَ الخَيْرَ وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ ئَّفْجُرُكَ اَللَّهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَلَكَ نُصَلِّئ وَنَسْجُدُ وَإِلَيْكَ نَسْعأئ وَنَحْفِدُ وَنَرْجُو رَحْمَتَكَ وَنَخْشآئ عَذَابَكَ إِنَّ عَذَابَكَ بِالكُفَّارِ مُلْحَقٌ.

Allah humma inna nasta-eenoka wa nastaghfiruka wa nu’minu bika wa natawakkalu alaika wa nusni alaikal khair, wa nashkuruka wala nakfuruka wa nakhla-oo wa natruku mai yafjuruka, Allah humma iyyaka na’budu wa laka nusalli wa nasjud wa ilaika nas aaa wa nahfizu wa narju rahma taka wa nakhshaa azaabaka inna azaabaka bil kuffari mulhik.

Tarjuma:-

Aye Allah! Hum madad chahte hain tujh se ,aur mafi mangte hain tujh se ,aur imaan late hain tujh per ,aur bharosa rakhte hain tujh per,aur hum teri hi acchi tareef karte hain,aur tera hi shukr ada karte hain ,aur teri na shukri nahi karte hain aur is se alag aur door Ho jate hain jo teri nafarmani karta hai.

Ay Allah hum teri hi ibadat karte hain ,aur tere liye hi namaz padhte hain aur sajdah karte hain ,aur teri hi taraf hum daudte hain ,aur ghum teri hi taraf jhapatte hain ,aur ummedwaar hain teri rahmat ke ,aur darte hain tere azaab se ,beshak tera azaab kafiro ko pahunchne wala hai .

Aah humne ye jana ki Witr ki namaz kaise padhe .aur usne padhi jaane wali dua ko bhi jana. Umeed karte hai ki aapko ye post kuch knowledgeable lagi hogi.

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Tahajjud ki namaz ki fazilat

Tahajjud ki namaz ki fazilat

Tahajjud ki namaz ki fazilat

Aaj ki is hadees me hum janenge ki Tahajjud ki namaz ki fazilat kya hai aur iski kya ahmiyat hai

أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ قَالَ حَدَّثَنِي الْقَعْقَاعُ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَحِمَ اللَّهُ رَجُلًا قَامَ مِنْ اللَّيْلِ فَصَلَّى ثُمَّ أَيْقَظَ امْرَأَتَهُ فَصَلَّتْ فَإِنْ أَبَتْ نَضَحَ فِي وَجْهِهَا الْمَاءَ وَرَحِمَ اللَّهُ امْرَأَةً قَامَتْ مِنْ اللَّيْلِ فَصَلَّتْ ثُمَّ أَيْقَظَتْ زَوْجَهَا فَصَلَّى فَإِنْ أَبَى نَضَحَتْ فِي وَجْهِهِ الْمَاءَ.

Hazrat Abu huraira razi Allahu tala anhu se riwayat hai ki Allah ke rasool saw ne irshaad farmaya Allah tala us mard per raham farmaya jo raat ko tahajjud ke liye utha aur usne Tahajjud ki namaz padhi aur apni biwi ko bhi jagaya fir usne bhi Ja namaj padh Li,agar Shahar ke jagane per usne inkar Kiya to uske Chehre mein Pani daal diya taki neend Toot jaaye aur Jag jaaye aur jagne ke bad kuchh rakate padh phir farmaya Allah tala is aurat per raham kare jo raat ko Tahajjud ke liye uthi aur usne Namaz padhe Aur Apne shauhar Ko bhi jagaya taki wo bhi tahajjud ki namaz padh le agar biwi ke jagane per Shauhar nahin utha to uske Chehre par Pani daal diya taki neend ka galba door Ho jaaye Aur bedar Ho Kar Namaz padh sake.

(Nisai ,abudawod)

Explanation

Is hadees me Tahajjud ki namaz ki fazilat aur naamz tahajjud padhne walo ko dua di gayi hai ,ye Allah ke pyera Nabi Hazrat muhammad sallallahu alaihi wasallam ki dua hai jo jaroor lag kar rahe gi . Tahajjud ki namaz bahut badi daulat hai ,bas zara uthne ki takleef hai aur aadat ho jane se wo takleef bhi jati rahti hai.

Ek doosri hadees me farmaya

Raat ki namaz yani Tahajjud padha karo kyunki tum se pehle pichli ummaton ke nek log bhi is ko padhte the aur ye namaz tumhare liye Allah se qareeb hone ka sabab hai aur gunahon ka kaffara karne wali hai aur gunahon se rokne wali hai.

 

Tirmizi

Ek aadmi ne sawal kiya ay allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam kon si dua quboliyat ke hisaab se sab duaon se badh kar hai ? Aap ne farmaya pichli Raton ke darmiyaan ke hisse ki dua ,aur farz namazon ke baad ki dua.

(Tirmizi)

Hazrat Abu huraira raziallahu tala anhu se riwayat hai ki Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam ne irshad farmaya”Jab koi mard apni bivi ko jagaye aur dono Tahajjud jo namaz ada kar le to in dono ka naam Allah ki yaad se khaas Talluq rakhne walon me likh diya jata hai.

(Mishqaat Shareef)

Hazart Hazrat Abu huraira rajiya Allahu tala anhu farmate Hain ki aap sallallahu ala wasallam ne farmaya

Har Raat Ko jab tihai Raat reh jaati Hai to Allah tala farmate Hain ki kya koi hai Jo mujhse Dua Karen mein uski Dua qabool Karun kya koi hai Jo mujhse mafi talab Karen aur use maaf Karo, Kaun Hai Jo Aise ko karz de jiske pass sab kuchh hai aur vah zulm karne wala nahin Hai Jo uski Raah me doge use karz me shumar kiya jaega halaki maal isi ka Diya hua Hai FIR usi ka badla dega Ek ke badle 10 to kahin Gaya hi nahin Hai,isase bhi jyada Allah jisko chahe ga bahut jyada badh kar ata farmaye ga ye hadees Muslim Sharif mein hai.

 

Tahajjud ki namaz bahut badi cheez hai ,miyan bivi dono khushi se padha Kate aur apas me ye plan kar lejo pehle uthe ga wo dusre ko utha dega aur ye bhi plan kar le jo uthne se mana karega uske munh per paani daala jayega Taqi paani daalne ke waqt ladai na ho ,agar husband ki marzi na ho to use na jagao ,khud hi apdh lo Magar saari raat nahi ,shauhar ka bhi haq pahchano aur apni sehat bhi khayal karo.

Agar Tahajjud ke waqt uthna naseeb ho jaye to us waqt naflein bhi padh liya karo aur dua bhi karo jab tak man laga rahe namaz padhi agar neend ka galba lage phir so jao ,Magar fazr ki namaz me uthne ki fikr karo ,chahe alarm lagana pade lagao lekin fazr ki namaz zaroor padhe .

Tahajjud ki namaz ka tarika

Tahajjud ki namaz ka tarika ye hai ki 2 raka’t se lekar 4 rakat ya 8 rakat padh sakte hai tahajjud ki namaz me padhne wali suratein koi khaas nahi hai wo sari suratein namaz me padh sakte ho jo aam. Namazon me padhte hai.

Masla:-

Agar Tahajjud ko uthne ka khoob pakka yaqeen na ho to witr ki namaz isha ke waqt na padho , Tahajjud ke baad sab se aakhir me witr padho ,agar us waqt uthne ka yaqeen na ho to isha ke waqt hi witr padh lo.

to dosto aaj humne jana ki Tahajjud ki namaz ki fazilat aur ahmiyat kya hai.dosto agar aaplo ye maloomaat acchi lagi ho to  share karen aur comment me zaroor bataye.

 

Islami aqeeda kya hai

Islami aqeedah kya hai

Islami aqeeda

To dosto aaj hum Islami aqeeda kya hai  iss topic se related poori tafseel se baat karenge jaisa ki aap sab ko maloom hai  ki jis  admi  ka aqeeda durust nahi uski sari  ibadat bekar hai bagair iman aur sahi aqeedah ke koi amal qubool nahi hai.

Aqeedah –1

Allah ne is duniya ko paida farmaya ,duniya khud ba khud wajood me nahi aayi.

Aqeedah-2

Allah 1 hai wo kisi ka mohtaaj nahi na us ko kisi ne paida kiya aur na us ki koi bivi hai aur us ka hunar aur barabar koi nahi .

Aqeedah-3

Wo hamesha se hai aur hamesha rahega

Aqeedah-4

Koi cheez uske Jaise nahin vah sabse Nirala hai.

Aqeedah-5

Woh Zinda Hai Zinda rehne Wala Hai har cheez per uski qudrat hai.

Aqeedah-6

Koi cheez uske ilm se bahar nahin vah sab kuchh dekhta aur sunta Hai.

Aqeedah-7

Wo Kalam farmata hai lekin uska Kalam ham logon ki Kalam ki tarah nahin Hai.

Aqeedah-8

Woh Jo chahta Hai Karta Hai koi usko rok tok karne wala nahin Hai

Aqeedah-9

wahi ibadat ke layak hai uska koi sajhi nahin wo Apne bando per meherban Hai, Badshah Hai,sab aiboon se paak Hai,jabardast Hai,ijjat Wala Hai, badhai wala hai, sari cheezon ka Malik hai,uska koi paida Karne Wala nahin gunaho ka bakhshne wala hai, bahut dene wala hai ,Rizq pahunchane Wala Hai, jiski Rizq chahe tang kar de aur jisko chahe jyada kar de,jisko chahe beijjat kar de jisko chahe buland kar de jisko chahe izzat de jisko chahe zillat de, Insaaf wala hai, bade tahammul aur bardasht wala, hai ibadat ki qadar Karne Wala Hai ,Dua ko qabool karne wala hai vah sab per Hakim hai ,us per koi Hakim nahin, uska koi kam hikmat se Khali nahin, wo sab ka kam banane wala hai, wahi jilata Hai, vahi maarta hai, jo kuchh vajud mein Hai ISI ke irade Se Hain, aaram ho, Rahat, dukh ho ya taklif har marz ki Shifa, tandrusti nafa sab kuchh usi ki iRade Se hota Hai.

Aqeedah-10

usko nishaniyon aur sifaton ko sab jante Hain uski Jaat ko bilkul Puri tarah ham nahin Jaan sakte, gunahgaro ki Tauba qabool karta hai, jo Saja to kabil hai unko Saja deta Hai, Puri duniya mein Jo kuch hota hai usi ke haq mein hota hai,aur uske hukm ke khilaf koi Jarra bhi nahin hil Sakta, koi patta bhi nahin Sakta, na vah sota hai na vah jagta hai na usko kabhi oongh aati Hai, vah tamam duniya ki hifazat se thakta nahin hai,wahi sab chijon Ko thame hue hai aur acchi aur buri tamam sifaton se hamesha waqif Hai uski sifaate hamesha rahegi aur usko koi sifat kabhi khatm nahin ho sakti.

Aqeedah-11

Puri duniya mein Jo kuchh bhi Bura Bhala hota Hai sab Ko khuda tala uske hone se pahle hamesha se jaanta hai aur apne Jaan ke mutabik usko paida Karta Hai sari duniya mein jitne bhi makhlook Hai uske bare mein usne pahle Se Tay kar rakha hai aisa Aisa hoga iski takdeer uske Naam per likh Di gai hai aur vahi chijon ko paida Karne mein bahut alag alag se baten Hain jinko vahi jaanta hai.

Aqeedah-12

bandhuon ko Allah tala ne samajh aur irada Diya Hai jisse vah Gunah aur sawab ka kam Apne irade Se karte hain.aur apne is ikhtiyar Se hi momin aur kafir hote hain AL Batta iman wa kufr aur neki aur badi sabka paida Karne Wala Allah tala hi hai.

Aqeedah-13

Allah jise chahta Hai hidayat deta hai aur jise chahe Gumrah kar deta hai, use per kisi ka Jor nahin chalta, aur bando Ko kisi kaam ke paida Karne ki qudrat nahin ,Gunah ke kamon se Allah tala naraz hote hain aur sab ake kamon se Khush hote Hain.

Aqeedah-14

Allah tala ne apne bando ko Aisa kam ka hukm nahin diya jo Banda karna sake

Aqeedah-15

Koi cheez khuda ki Jimme jaruri nahin wo Jo kuchh apni meherbani se ata farmaye uska fazl hai

Aqeedah-16

Allah ke bheje hue nabiyon ne sidhi raah batane ke liye duniya me aaye aur wo sab gunahon se paak hai poori ginti Allah ko hi sahi maloom hai,unki sacchai batane ko Allah ne un ke haathon aisi cheezen zahir ki jo Jo log nahin kar sakte, aisi baaton ko mojija kahate Hain . In mein sabse pahle Hazrat Adam Alahissalam the uske bad Hazrat Muhammad Mustafa sallallahu tala alaihi wasallam the in donon bhaiyon ke darmiyaan tamam Nabi aaye.inmein se kuchh bahut mashhur hai Jaise Hazrat nooh Ali Salam Hazrat Ibrahim Ali Salam Hazrat Musa alahissalam, Salaam Hazrat Shoiab alahissalam, Salam Hazrat Ismail alaihis Salam ,Hazrat yaqoob alaihis Salam, Hazrat Yusuf alaihis Salam , Hazrat Suleman Alaihis Salam, Hazrat Dawood Ali Salam ,Hazrat Suleman AlaihisSalam Hazrat Yunus alaihis Salam,Hazrat nooh alaihissalam Hazrat idrees alaihis Salam Hazrat Ilyas Ali Salam Hazrat Shoaib alaihissalam Hazrat hud alaihissalam.

Aqeedah-17

Sab nabiyon ki ginti Allah tala ne kisi Ko nahin bataiye isliye yah aqeeda rakhen ki Allah tala ke bheje hue jitne paigambar Hai ham sab Par iman late hain aur Jo humko maloom Hai un per bhi aur Jo nahin maloom per bhi.

Aqeedah-18

paigambaron mein kuchh ka martaba kuchh Se bada Hai Sabse bada martaba hamare aapka sallallahu ala wasallam ka hai aur aap sallalllahi alaihi wasallamsallam ke bad koi naya Nabi nahin a sakta Qayamat Tak jitne aadami hain aur Jin honge aap sab ke paigambar hai.

Aqeedah-19

hamare paigambar sallallahu alaihis Salam Ko Ek Raat Allah tala ne Jagate mein jism ke sath makke se baitul muqaddas aur vahan se satavan Aasman par aur vahan se jahan tak Allah tala ko manjur tha wahan pahunchaya aur fir isi Raat mein Makka pahuncha Diya usko meraj kahate Hain.

Aqeedah-20

Allah tala ne kuchh makhluqat ko Noor se paida farmaya jo hamari najron se chhupa Diya Hai unko Farishta kahate Hain, bahut se kam unke hawale kiye Hain aur vah kabhi Allah ke khilaf koi Kam nahin karte Jiska kam mein Laga Diya gaya haiusi mein Lage hue hain Hazrat jibraeel alaihis Salam bahut mashhur hai Hazrat ambiya Ikram alahissalam per Allah ki taraf Se vahi late hain Quran Majeed bhi Allah tala ne inhi ke zariya nazil farmaya unko Quran Majeed mein rohul Ameen ke lakab se bhi mukallab farmaya hai.

Aqeedah-21

Allah tala ne kuch makalukaat Ko Aag se banaya Hai vah bhi humko nahin dikhai dete unko Jin kahate Hain. Aur in me momin, kafir nek aur bad sab tarah ke hote hain unke alava bhi hote hain UN sab mein jyada mashhur iblis Shaitan Hai.

Aqeedah-22

Musalman Jab khoob ibadat karta hai aur gunaho Se bachta Hai Aur duniya Se Mohabbat nahi rakhta hai,aur Nabi Kareem sallallahu alayhi wa sallam ka tabedar hota Hai to Allah ka dost aur pyara ho jata hai,aise shakhs ko wali kahate Hain is shaks Se bhi aisi baten zahir hone lagti Hain Jo aur logon se zahir nahin Hoti in baton ko karamat kahate Hain.

Aqeedah-23

wali kitne bhi bade darje ko pahunch jaye Magar Nabi ke barabar nahin ho sakta, aur koi shakhs kuda ka kaisa Hai pyara Ho jaaye Jab tak hosh O Hawas baki Ho shariyat ka Paband rahana farj Hai,Shariyat ka Paband rahana farj Hai Namaz , Roja Joki ibadat hai usse maaf nahin Hoti aur koi Gunah uske liye Jaiz nahin ho jata.

Aqeedah-24

Jo Shaksh Shariyat ke khilaf hi woh khuda ka dost nahin ho sakta agar uske hath Se ajnabi jaisi Baat dikhai de to vah Jadu Hai ya Nafshani aur Shaitani dhandha hai aisa Shaksh gumra ah hai aise aamdi per aqeedah rakhna aur mureed hona gumrahi hai.

Aqeedah-25

Allah Rasool ne deen ki sab baten Quran hadees mein bandon Ko Bata diya ab koi nai baat din mein nikalna durust nahin aisi nai Baat Ko bidat kahate Hain bidat bahut bada Gunah hai.

Aqeedah-26

Allah tala ne apne paigambar per bahut bahut hi chhoti badi kitabe Nazir pharmayien , taki vah apni apni umra ton ko padhen Aur din ki baten sunayen. inmein 4 kitaben bahut mashhur hai tauraat Hazrat Musa Ali Salam ko Mili zaboor Hazrat Dawood alaihis Salam ko Mili, injeel Hazrat isa Ali Salam ko Mili, Quran Majeed hamare Nabi sallallahu alaihis Salam ko mili, aur Quran Majeed aakhri kitab Hai ab koi kitab Aasman Se Na zil na hogi Qayamat Tak Quran hi ka hukm chalta rahega dusri kitabon ko Gumrah logon ne bahut kuchh Badal Dala Magar Quran Majid kei negeh bani ka Allah tala ne wada farmaya is ko koi nahin Badal Sakta.

Aqeedah-27

hamare Nabi sallallahu alaihi wasallam Ko Jin logon ne iman ki halat mein dekha aur FIR UN per unko maut a gai to usko Sahabi kahate Hain unke bade marte hue hain sab Se Mohabbat aur achcha guman rakhna laami hai aur un me char Sahabi zada mashhur hai aur martaba mein, dusre sabse bade Hazrat Abu Bakr Siddiq razi Allahu tala anhu,yah hujur sallallahu alaihi wasallam ke bad khalifa bane Jo tamam Ummat mein sabse afzal Hain, un ke bad Hazrat Umar razi Allahu tala anhu sari ummat se Afzal Hai yah dusre Khalifa Hain, Jo Hazrat Abu Bakr razi Allahu tala anhu ke bad Khalifa hue UN ke bad Hazrat Usman razi Allahu tala anhu sari ummat se Afzal Hain Jo Hazrat Umar razi Allah tala anhu ke bad Khalifa hue yah Teesre Khalifa Hain unke bad Hazrat Ali razi Allahu tala anhu sari ummat se Afzal Hain Jo Hazrat Usman razi Allahu tala anhu ke bad Khalifa hue yah chauthe Khalifa hai.

Aqeedah-28

Sahabi ka itna bada rutba hai ki bade se bade wali bhi kisi sahabi ke barabar martabe Ko nahin pahunch Sakta

Aqeedah-29

hamare huzoor salla wale Salam ki sab aulad azwaj yani ki biwiyan tazeem ke layak hain aur aulad mein sabse bada martba Hazrat Fatima razi Allah tala anha ka hai aur biviyon mein Hazrat Khadija Razia Allahu tala anha ka hai aur Hazrat Ayesha razi Allahu tala ka hai.

Aqeedah-30

iman jab durust hota hai ki Allah ke rasul sallallahu alaihi wasallam Ko sab baton mein saccha samjhe aur UN sab Ko man le Allah aur Rasool sallallahu alaihiwasallam ki kisi Baat mein shak karna ya usko jhutlana us me aib Nikalna ya uska majak udana kufr hai in SAB baton Se hi iman jata rahata hai.

Aqeedah-31

Quran hadees ke khule khule matlab Ko Na manana usmein apna matlab karke apna matlab Banana ya kuch batein gadhna yah Baddini hai.

Aqeedah-32

Gunah ko halal samajhne se iman jata rahata hai.

Aqeedah-33

Guna chahe kitna bada ho jab tak usko Bura samajhta rahe iman nahin jata albatta Guna se iman kamjor ho jata hai.

Aqeedah-34

Allah tala se nidar ho jana ya na ummid ho jana kufr hai.

Aqeedah-35

Najoomi vagerah se Deen ki baten puchna aur use per yakin kar lena Kufr ki Baat Hai.

Aqeedah-36

chhupi Hui baton ka Hal Allah ke siwa kisi Ko nahin pata Allah ne apne nabiyon ko bahut hi gaib ki baten bataiye thi hamare Nabi sallallahu alaihi wasallam ko sabse jyada Ilm gaib Diya aur bahut hi jyada gaib ki baton ko khabar di Magar Allah taala ji aalimil gaib haiAllah ke siwa kisi Ko alimul gaib kahana durust nahin.

Aqeedah-37

kisi ka Naam lekar kafir kahana yah lanat karna durust nahin hai haan you kah sakte hain ki zalimon per lanat ,jhutha per Allah ki lanat Magar jinka Naam lekar Allah aur Rasool sallallahu wale wasallam ne Lanat ki Hai yah unke kufr per Marne ki khabar di hai unko kafir kahna maloon kahana jayaz hai .

Aqeedah-38

Jab aadami mar jata hai agar dafan kar diya jaaye to dafan ke bad aur dafan na kiya jaaye to jis Haal mein bhi ho use ke pass do farishte aate Hain Jin mein Ek Ko Munkar aur dusre ko Nakeer kahate Hain. Vah kar puchte Hain ki Tera parwardigar kaun hai? Tera din kya hai?Hazrat Muhammad sallallahu Salam ke bare mein puchte Hain ki vah kaun hai? Agar vah imandar Hai to theek jawab deta hai,phir uske liye Jannat ki khidki khol dete Hain jisse Jannat ki khushbu aati rahti hai aur Qayamat aane Tak vahan khoob maje mein rahata hai aur agar wo murda imandar Na Ho tab sab baton mein yahi kahta Hai ki mujhe kuchh khabar nahin FIR use badi Shakti ka Azab Qayamat Tak hota rahata Hai, Magar yah sab baten murde ko maloom hoti hai ki Jinda log nahin dekhte aur na sunte Hain Jaise sote aadami Khwab mein bahut kuchh dekhta hai aur jagta aadami uske pass bekhabar baitha rahata hai.

Aqeedah-39

marne ke bad har din subah Shaam murde ko Jo thikana Hai vah dikhaya Jata Hai jannati Ko Jannat dikha kar khushkhabri dete hain aur dozakhi ko dozakh dikha kar Hasrat aur ranjo gam badhate Hain.

Aqeedah-40

Musalman murde ke liye dua karne se ,kuch khyariyat de kar bakhshne se ,us ki taraf se hajj karne se us ko sawab pahunchta hai , aur usko usse bada fayda hota hai.

Aqeedah-41

Allahu aur Rasool ne jo nishaniyan Qayamat ki batai hai wo sab zahir hongi ,imam mehdi ka bhi zuhoor hoga aur khoob insaf se faisla karenge ,dajjal ka aana hoga,isa alaihis Salam ka aana aur bahut sare nishaniyan hai zahir hongi.

Aqeedah-43

Jab Qayamat ki nishaniya poori ho jayegi aur ek musalman bhi zinda nahi rahega aur kafir bahut hi aish ki zindagi guzaar rahe honge ,Allah ke hukm se hazrat israfeel alahissalam soor phonkne ,is soor ke phoonkne se aasmaan fat jayega ,sitare be Noor ho jayega ,Chand suraj ki roshni jati rahti hai ,zameen me bhonchaal a jayega ,asmaan fat kar tukde tudke ho kar rah jayenge ,pahad rui ki tarah ude hi ,aur sari makhlooq mar jayegi ,aur sab matre hue be hosh ho jayenge ,Magar jis ko Allah chahega bacha lega.

Aqeedah-44

Phir jab Allah tala ko manzoor hoga ,soor phonka jayega ,us se phir sara aalam Jinda ho jayega ,murda zinda ho jayega, aur ek maidan me hisaab kitab ke liye sab ikatthe ho jayenge ,isi ko roze Qayamat kahte hain ,isi tarah ki takleef se ghbra kar sab log baari baari ambiya ke paas jayenge sare log inkar kar denge akhir me log Hazrat muhammad sallallahu alaihi wasallam ke paas jayenge aap sallallahu alaihi wasallam sare logon ki shifa’at karenge.hisaab kitab shuru hoga sab ke amal balance kiya jayega nek logon ka namae amaal Dahine haath me Diya jayega ,aur bure logon ka amaal nama bayen haath me Diya jayega.

Aqeedah-45

Dozakh paida ho chuki hogi dozakhiyon ko tarah tarah ka Azab de kar unki saza poori kar ke Jannat me daal diya jayega ,aurbkafir aur mushrik humesha ke liye jahannam me rahenge

Aqeedah-46

jannati paida ho chuki hai aur ISI mein tarah tarah ke chain Aur nemat Hain Janataiyon Ko kisi tarah ka dar aur gam nahin hoga aur Na kisi tarah ki koi taklif hogi wo usme humesha rahenge kabhi nahi niklenge .

Aqeedah-47

Allah talla chahe to gunahon per Saja de chahe to pora gunah hi ko maaf kar de ye us ke aktiyaar me hai .

Aqeedah-48

shirk Aur kufr ka Gunah Allah tala kabhi kisi ko maaf nahin karta aur inke alava jo aur Gunah hai usko maaf kar sakta hai apni meherbani se .

Aqeedah-49

Jin logon ko allah ke rasool ne jannati bata diya hai unke alawa kisi aur ko yaqeeni taur per jannati nahi kaha ja sakta.

Aqeedah-50

Jannatiyon ko sab se badi nemat ye hogi ko usko Allah ka dedaar naseeb hoga,is nemat ke alawa tamaam nemat bekaar hogi

Aqeedah-51

Duniya me jagte hue Allah ko kisi ne nahi dekha aur na to dekh sakta hai.

Aqeedah-52

Zindagi bhar koi bhi aadmi kitna hi Bura ya Bhala ho uske iman ka faisla uske khatme per hoga yaani ki wo kis haal me mara ,iman wala ya kafir.

Aqeedah-53

Marte waqt iman Lana qabile qubool nahi hoga.

To dosto aaj humne jana ki Islami aqeeda kya hai jabki ye topic itna pada hai ki isko ulma e kiram ne bahut hi tafseel se apni kitabon me zikr kiya hai. Islami aqeeda kya hai hum sab ne detail me jana is post ko shre karen taqi malomaat doosron tak pahunch jaye.

Jazakallah

Namaz ka waqt aur raka’t

Namaz ka waqt aur raka't

Namaz ka waqt aur raka’t

Aaj ke is topic me hum Namaz ka waqt aur raka’t ke baare me poori details se janenge .

Fazr ki namaz ka waqt subah Sadiq se shuru hota hai ,aur tulu aftab yani suraj nikalne ke waqt tak rahta hai

Zuhar ki namaz ka waqt suraj dhal jane ke baad se shuru hota hai aur jab har cheez ka saaya yaani shadow doguna na ha jaye tab tak rahta hai.

Asar ki namaz ka waqt us waqt shuru hota hai jab zuhar ka waqt khatam ho jata hai aur suraj chipne tak rahta hai.lekin jab suraj zard yaani orange colour ka ho jaye us waqt asar ka waqt Makrooh ho jata hai.

Jab suraj chip jaye us waqt magrib ka waqt shuru ho jata hai.India aur pakistan me kam se kam sawa ghanta ya dedh ghante tak magrib ka waqt rahta hai.

Magrib ka waqt khatam hote hi isha ka waqt shuru ho jata hai jo ki subah Sadiq tak rahta hai.lekin aadhi raat ke baad isha ka waqt Makrooh ho jata hai.

मसला:- jo waqt isha ka hai wahi Namaz e witr ka bhi hai ,magar bite ki namaz isha ke farzon se pehle nahin padhi ja sakti.

Namaz ki rakatein

Fazr ki raka’t :-

Fazr ki 4 rakatein hai 2 sunnate muakkada aur 2 farz.

Sunnat ki niyat :- dil ke irade ka naam niyat hai zabaan se niyat karna zaroori nahi hai.niyat karta hoon main 2 raka’t namaz sunnat fazr ki ,waste Allah ke rukh mera kaba sahreef ki taraf Allah hu Akbar kah kar haath baandh lein.

Farz ki niyat:- niyat karta hoon 2 raka’t namaz farz fazr ki ,waste Allah ke rukh mera kaba shreef ki taraf Allah hu akbar.

Zuhar ki raka’t:-

Zuhar ki namaz me 12 rakatein hai 4 sunnat muakkada,4 farz,2 sunnat muakkada,phir 2 nafil.

Asar ki rakatein:-

Asar ki namaz me 8 rakatein hoti hain 4 sunnat Gair muakkada ,4 farz

Magrib ki rakatein

Magrib ki namaz me 7 rakatein hoti hai 3 farz,2 sunnate muakkada,2 nafil.

Isha ki rakatein

Isha ki namaz me 17 rakatein hoti hain 4 sunnat Gair muakkada,4 farz,2 sunnate muakkada 2 nafil,phir 3 vitr phir 2 nafil.

Note:- sunnate muakkada sunnaton me sab se zyada taqeed fazr ki sunaaton ki hai.aur unke baad sunnaton ka level hai jo zuhar se pehle hai .unke baad dusri sunnaton ka darja hai ,ihtemaam to sari sunnaton ka karna hai magar fazr aur zuhar ki sunnaton ka khaas intemaam karen.

Nafil namaz aur sunnat Gair muakkada ko chodna jaiz hai magar is se bahut bade sawab se mahroom hoti hai ,aur muakkada sunnaton ko chodna jaiz nahi isiliye usko muakkada kaha gaya hai.

Namaz ki niyat uper diye gaye tarike se hi karni hai lekin namaz ka waqt aur sunnat ,farz nafil, wagerah ko apne hissab se badal le.

Eh hadees me aata hai ki hazrat obada bin samit raziallahu anhu se riwayat hai ki Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam ne irshad farmaya:-

“5 namazein Allah ne farz farmayi hai jis ne in namazon ka wazu acchi tarah kiya aur unko time per padha aur ruku ,sajda acchi tarah ada kiya to uske liye Allah ke zimme ye wada hai ki Allah jalle shanahu usko bakhsh dega aur jis aisa na kiya uske liye Allah ke paas koi zimma nahi Allah chahe to bakhsh de chahe to azab de.”

Sunnate muakkada ki taqeed

Hazrat Abdullah bin saib raziallahu anhu se riwayat hai ki aap sallallahu alaihi wasallam ne irshad farmaya:-

Fazr ki 2 raka’t namaz sari duniya me jo kich bhi hai us se behtar hai.

 

(Muslim shareef)

Allah ke rasool sallallahu alaihi wasallam zuhar se pehle 4 rakatein padhte the jin me zyada tar der tak khade rahte the aur ruku sajda khoob acchi tarah karte the ,hazrat Abdullah bin masood raziallahu anhu ne farmaya ki din ki nafil namajon me tahajjud ke barabar koi namaz nahi siwaye in 4 rakaton ke yani zuhar se pehle ki r rakat sunnate muakkada.

Hazrat aisha raziallahu anha farmati hai ki Allah ke rasool farz namazon ke alawa sab se zyada pabandi ke saath fazr ki 2 sunnate padhte the.

(Bukhari)

To aaj humne Namaz ka waqt aur raka’t ke bare me aur sunnate muakkada ke baare me tafseel se hadeeson ki roshni me jana .

Agar aapke koi sawal hai to aap comment section me zaroor batayen.

Jazakallah hu khair

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