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Itikaf Ki Niyat Aur Dua

Itikaf Ki Niyat Aur Dua

दोस्तों आज किस पोस्ट में आज Itikaf के बारे में बात करेंगे Itikaf Ki Niyat Aur Dua क्या है और Itikaf करने का सुन्नत तरीका क्या है इन सब चीजों के बारे में हम इस पोस्ट में डिटेल से जानेंगे

Itikaf kya hai Aur Itikaf kis tarah karna chahiye

इबादत के इरादे से मस्जिद में ठहरने को इतिकाफ कहते हैं। रमजान शरीफ के आखिरी 10 दिन में जो itikaf किया जाता है वह Sunnate Muaqqadah है यानी जिस बस्ती या गांव का अगर एक आदमी भी मस्जिद में इतिकाफ करेगा तो सब गुनाह से बच जाएंगे वरना सब ही इस सुन्नत के छोड़ने की वजह से गुनाहगार होंगे इतिकाफ में बैठने का बड़ा सवाब है जिसमें सुन्नत यह है कि 20 रमजान को सूरज डूबने से पहले पाक साफ रहे, रोजे की हालत में इतिकाफ की नियत से मस्जिद में चला जाए और ईद का चांद देखने तक वही रहे और दुनिया का तमाम काम बिल्कुल छोड़ दे लेकिन पखाना पेशाब के लिए या नमाज जुम्मा पढ़ने के लिए बाहर निकल सकता है

औरतें अपने घर में किसी पार्क साहब जगह पर पर्दा डालकर इतिकाफ की नियत से पाबंदी के साथ बैठे और अल्लाह का जिक्र और इबादत में मशगूल रहे और वहीं पर सोए।

Itikaf ki kismen। Types of itikaf

इतिकाफ 3 किस्म के है

Wajib Itikaf

Wajib Itikaf नजरों न्याज का Itikaf है जैसे किसी ने मन्नत मानी हो कि मेरा फलां काम पूरा हो जाए तो एक दिन या 2 दिन का itikaf करूंगा तो यह itikafe wajib है इसका पूरा करना जरूरी है वाजिब इटिका के लिए रोजा शर्त है बगैर रोजे के इतिकाफ वाजिब सही नहीं होगा।

Sunnate Muaqqadah itikaf

रमजान के आखिरी अशरे में किए जाने वाला itikaf Sunnate Muaqqadah itikaf के अंदर आता है 20 रमजान को सूरज डूबने से लेकर इतिकाफ के नियत से मस्जिद में जाना और 30 तारीख को सूरज डूबने के बाद या 29 मई को चांद होने के बाद मस्जिद से बाहर निकलना itikaf Sunnate Muaqqadah itikaf है अगर इस itikaf को सब छोड़ दे तो सब पकड़े जाएंगे अगर एक भी कर लिया तो सब छूट जाएंगे इस इतिकाफ में भी रोजा शर्त है मगर वही रमजान के रोजे काफी हैं।

Mustahab itikaf

वाजिब और सुन्नत के अलावा जो Itikaf किया जाएगा वह Mustahab Itikaf है मुस्ताहब के लिए रोजा शर्त नहीं है यह थोड़ी देर का भी हो सकता है मस्जिद में जब-जब जाए इसकी नियत कर लेनी चाहिए थोड़ी ही देर मस्जिद में रहकर चला है जब चला आएगा Itikaf खत्म हो जाएगा नियत में सिर्फ इतना काफी है कि मैंने खुदा के वास्ते Itikaf की नियत की इतना कहना काफी है।

Itikaf Ke Adaab

मुसलमान के लिए Itikaf में बैठना मुस्ताहब है उस मस्जिद में Itikaf करना चाहिए जिसमें नमाज जमात के साथ पढ़ी जाती हो और इस मकसद के लिए सबसे अफजल जामा मस्जिद है यानी जिस मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की जाती हो इसलिए कि इतिकाफ के दौरान जुम्मे का दिन आ जाए तो इतिकाफ करने वाले को जुमे की नमाज अदा करने के लिए बाहर ना जाना पड़े उसी मस्जिद में रहकर वह नमाज अदा कर सके, इतिकाफ के लिए रोजेदार रहना ज्यादा बेहतर है मगर रोजा रखे बगैर भी Itikaf किया जा सकता है

एक रिवायत में आप सल्ला वाले वसल्लम ने रमजान की आखिरी 10 दिनों में इतिकाफ किया और पूरी जिंदगी इसी तरह करते रहे आप सल्ला वाले वसल्लम ने सहाबा इकराम को भी Itikaf करने की आदत डाली, आप सल्ला वसल्लम ने फरमाया अगर कोई #

Itikaf करना चाहे तो रमजान के आखिरी 10 दिनों में करें और इतिकाफ के दौरान उन्हीं कामों में लगा रहे जो अल्लाह ताला की बारगाह में ज्यादा करीब होने का जरिया बन सके ऐसा काम करना चाहिए ताकि दौरान जो अल्लाह ताला से नजदीक या पैदा करता हूं अल्लाह ताला से जोड़ता हूं कुरान ई करीम की तिलावत करना तस्वीह पढ़ना और अल्लाह ताला की सिफात में गौर करते रहना चाहिए।

इतिकाफ करने वाले को चाहिए कि अल्लाह ताला की इबादत के सिवा और जितने भी काम है सब को छोड़ देना चाहिए पढ़ने पढ़ाने का काम और दीन और ईमान की बातें सिखाना या कुरान ए करीम पढ़ना यह सब काम करना दुरुस्त है इसलिए यह भी एक तरह की इबादत है दूसरों को इससे फायदा पहुंचता है जरूरी हाजत को दूर करने के लिए मस्जिद से बाहर आना भी दुरुस्त है

जरूरी काम यह है कि खाना-पीना बोल बराज, या किसी सख्त खतरे के वक्त यानी जान का खतरा हो,या बीमारी हो जाने के अंदेशा हो तब मस्जिद से बाहर आ सकता है।

Itifak Ki Niyat Aur Dua

Itikaf ki dua in Arabic

بسم الله دخلت و عليه توكلت و نويت سنت الاعتكاف۔ اللهم افتح لي ابواب رحمتكك

TRANSLATION 

मै अल्लाह के बा बर्कत वाले नाम से मस्जिद मे दखिल हुआ और उसी पर भरोसा किया,और मैने सुन्नत इतिकाफ़ का इरादा किया ,अये अल्लाह मुझ पर अपने रहम के दरवाजे खोल दे.

Itikaf ki dua in hindi

बिस्मिल्लहि दखत्लु व वा अलय्हि तवक्कल्तु वानवय्तु सुन्नतल इतिकाफ़

Itikaf ki dua in English

Bismillahi Dakhaltu Wa’Alayhi Tawakkaltu Wanawaytu Sunnatul I’tikaaf

Itikaf baitne ka time

Itikaf baitne ka time इतिकाफ बैठने का सुन्नत टाइम तो यह है कि 20 रमजान शरीफ को सूरज डूबने से पहले यानी असर की नमाज के बाद ही पाक साफ होकर मस्जिद में इतिकाफ की नियत कर कर चला जाए और ईद का चांद दिखने के बाद मस्जिद से वापस है।इन 10 दिनों में तो खूब दिल लगाकर अल्लाह की इबादत करेगा कुरान की तिलावत करे तस्वीर पढ़े और पूरी उम्मत के लिए दुआ करें।

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Itikaf ke Zaroori Masail

Masla:-मर्द के लिए Itikaf करने के लिए मस्जिद जरूरी है लेकिन औरत अपने घर के किसी हिस्से में पर्दा साल कर itikaaf कर सकती है।

Masla :-itikaaf करने वाले को बिनी की वजह से मस्जिद से बाहर निकलना हराम है अगर ऐसा किया तो itikaf खत्म हो जाएगा।इसी तरह औरत भी अपनी जगह से इधर उधर फिरी तो itikaaf टूट जाएगा ।

Masla :- मस्जिद से निकलने के 2 वजह है जैसे बीमारी, पाखाना,पेशाब,नहाना,वज़ू करने के लिए या जान का खतरा हो इन सब के लिए और दूसरे ये की जूमे की नमाज के लिए दूसरी मस्जिद में जाना इन दोनों हालात में itikaf करने वाला मस्जिद से बाहर जा सकता है।

Masla:- इतिकाफ करने वाले के सिवा किसी और को मस्जिद में खाने-पीने और सोने की इजाजत नहीं है अगर और कोई एक काम करना चाहे तो उसको इतिकाफ की नियत करके मस्जिद में आना चाहिए।

Masla:– इतिकाफ करने वाला ना ज्यादा चुप रहना दादा बात करें बल्कि कुरान करीम की तिलावत और हदीस शरीफ और दरूद शरीफ की कसरत से पढ़ता रहे।

Masla: Itikaf जान बूझ कर या गलती से भी टूटे लेकिन उसकी कज़ा वाजिब है

Conclusion

आज के इस टॉपिक Itikaf Ki Niyat Aur Dua  पे हमने Itikaf kya hai,Itikaf ke Adaab, Itikaf baithne ka time types of itikaf, itikaaf ke Masail इन सब चीजों के बारे में बात किया तो दोस्तों कैसा लगा आपको यह पोस्ट कमेंट करके आप जरूर बताएं और अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई है तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें

Jazakalla hu khair

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