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  • By: Sayed Amir
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  • 20.10.2020

Dua Qabool Hone Ka Waqt

दोस्तो दुआ एक बहुत बड़ी इबादत है इससे पहले हमने दुआ मांगने के आदाब और उसकी फजीलत के बारे के जाना था आज हम Dua Qabool Hone Ka Waqt के बारे में जानेंगे की कौन से वक्त में दुआ ज़्यादा कबूल होती है। हदीस के अंदर कुछ खास टाइम बताया गया है उस वक़्त Dua ज़्यादा कबूल होती है।

Farz Namazon ke baad ki Dua

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सवाल किया गया कि को से दुआ सबसे ज़्यादा कबूल होती है आपने फरमाया कि फर्ज़ नामाजों के बाद मांगी जाने वाली दुआ और पिछली रात में मांगी जाने वाली दुआ ज़्यादा कबूल होती है।फर्ज नमाज के बाद दुआ कुबूल होने का बहुत खास वक्त होता है जो लोग नमाज पढ़ते हैं उनको दिन रात में 5 मर्तबा ये Dua Qabool Hone Ka Waqt नसीब होता है और इस वक्त वह खूब दिल लगाकर अल्लाह से दुआ कर सकते हैं क्योंकि यह दुआ की कबूलियत का टाइम होता है।

Tahajjud ke waqt ki dua

Tahajjud ka waqt भी दुआ के कबूल होने का खास वक्त है अल्लाह के रसूल का इरशाद है जब तिहाई रात बकी रह जाती है तो अल्लाह ताला पहले आसमान पर आ जाते है और फरमाते है कौन है जो मुझ से दुआ करें मैं उसकी दुआ कबूल करूं, कौन है जो मुझसे सवाल करें मैं उसको दे दूं, कौन है जो मुझसे मगफिरत मांगे मैं उसकी मगफिरत कर दूं।

जिन लोगों को नमाज ए तहज्जुद पढ़ने की आदत है उन लोगों को दिल्ली यह टाइम नसीब होता है और बहुत बहुत खास वक्त मिल जाता है दुआ करने के लिए इस वक्त बड़े सुकून के साथ नमाज पढ़ने के बाद दुआ करने का मौका मिलता है ना कोई शोर होता है ना किसी काम की मजबूरी होती है ना किसी की आवाज आती है ना बच्चों को लड़ाई झगड़ा होता है ना कोई काम होता है सिर्फ अल्लाह से लव लगाने का वक्त होता है अगर नमाज़ तहज्जुद के लिए उठने की तौफीक हो जाए तो क्या कहने।

Raat Me Dua Kabool hone ka khaas waqt

दुआ कबूल होने की रात में भी एक खास खड़ी होती है जिसमें दुआ बहुत ज्यादा कबूल होती है अल्लाह के रसूल का इरशाद है जो आदमी रात को आराम करने के लिए अपने बिस्तर पर जाता है और बा-वजू होकर पहुंचता है अल्लाह का जिक्र करता रहता है यहां तक कि उसको नींद आ जाती है तो रात में किसी भी वक्त जब वह करवट बदलता है और अल्लाह ताला से वह दुनिया और किसी और चीज का सवाल करता है तो अल्लाह ताला उसको जरूरत देते हैं

इस हदीस से मालूम हुआ की पूरी रात में एक ऐसा टाइम जरूर आता है जिसमें दुआ कर ली जाए तो दुआ जरूर कबूल होती है इस टाइम का पता इस वजह से नहीं बताया गया क्योंकि इसमें मसलेहत और हिकमत है बंदे मोमिन रात में वक्त बेवक्त जब मौका लगे और याद आ जाए लेटे-लेटे बैठे-बैठे अल्लाह से दुआ करता रहे दुआ से हरगिज़ ध्यान ना जब मौका लगे कोई ना कोई दुआ मांग ले तो अल्लाह ताला उसको दुनिया और आखीरत की सारी भलाइयां अता करेंगे।

Jume ke din ka khaas waqt

Jume ke din ka bhi ek khaas waqt होता है जिसमें दुआ ज़्यादा कबूल होती है।लग रसूलगढ़ याद है कि जुम्मे के दिन एक ऐसी घड़ी है जो कोई मुसलमान इसमें किसी गैर का सवाल करेगा यानी अल्लाह से किसी भी चीज का सवाल करेगा अल्लाह ताला उसे जरूर आता फरमाएंगे

यानी जुम्मे के दिन एक ऐसा टाइम जिसमें दुआ जरूर कबूल होती है यह टाइम किस वक्त होता है इसके बारे में जिक्र नहीं किया गया है जुम्मे के दिन जिस वक्त ज्यादा दुआ कुबूल होने की उम्मीद की जाती है वह असर के बाद से लेकर सूरज छुपने तक यानी मगरिब तक का वक्त बताया गया है यानी उस वक्त में दुआ करो तो ज्यादा कबूल होती है असर की नमाज पढ़कर मगरिब तक दुआ करने का वक्त बहुत अहम है

दूसरे जब इमाम साहब खुद के दरमियान बैठते हैं और यह नमाज खत्म होने तक जो टाइम होता है उस के दौरान दुआ करना जबान से तो मना है दिल से लेकिन दुआ कर सकते हैं यह दुआ कबूल होने का बहुत अच्छा वक्त होता है नमाज जुमा कायम होने से लेकर सलाम फेरने तक जो घड़ी होती है यह दुआ कबूल होने की बहुत खास घड़ी है इस वक़्त भी दुआ का अहतिमाम करना चाहिए।

औरतें नमाज के लिए तो मस्जिद में नहीं जाती हैं और नमाज के दौरान घर में रहते हुए असर से मगरिब तक दुआ कर सकती हैं।

Maidaan e Arafaat Me Dua ka khaas Waqt

Maidaan e Arafaat में भी दुआ के कबूलियत का खास वक्त होता है अल्लाह के रसूल का इरशाद फरमाया सबसे बेहतर दिन आरफ़ा के दिन की दुआ है और सबसे बेहतर जिक्र जो मैंने और मुझसे पहले नबियों ने अराफात के मैदान में किया है वह यह है la ilaha illallahu wahduhu la sharika lahu lahul muku walahul hamd wahuwa ala kulli shayin qadeer।

Tarjuma अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं वह अकेला है उसका कोई शरीफ नहीं उसके लिए मुल्क है उसके लिए तारीफें हैं वही हर चीज पर कुदरत रखने वाला है

अरफा का दिन अल्लाह आसमान के सबसे नज़दीक आ जाते है और बंदों को फरिश्तों के सामने पेश करके कहते है देखो मेरे बंदे ने किस तरह बाल बिखेरे हुए ,तलबिया पढ़ते हुए, तलबिया पुकारते हुए आए है में तुमको गवाह बनता हूं कि मैने इं लोगों को बख्श दिया इस पर फरिश्ते कहेंगे कि इसमें से बहुत लोग है जिन्होंने बहुत बड़े बड़े गुनाह किए है अल्लाह ताला दुबारा इरशाद फरमाएंगे की मैंने इं सब को बख़्श दिया।

Makka Mukarrama me Dua ke Qabool Hone Ki Khaas Jagah

  • मक्का मुकर्रमा दुआ कबूल होने की खास जगह हैं
  • तवाफ करते वक्त दुआ ज़्यादा कबूल होती है
  • काबे शरीफ की छत से पानी बह कर नीचे आने का जो परनाला है उसे मेज़ाब कहते हैं मेजाब के नीचे खड़े होकर दुआ मांगने से दुआ ज़्यादा कबूल होती है
  • काबा शरीफ के अंदर जाकर दुआ मांगने से ज्यादा दुआ कबूल होती है
  • जमजम के कुएं के पास जाकर दुआ मांगने से दुआ ज्यादा कबूल होती है
  • सफा और मरवा की पहाड़ी पर दुआ करने से ज्यादा दुआ कबूल होती है
  • सफा और मरवा पहाड़ी के दरमियान सही करने यानी दौड़ करते वक्त दुआ ज्यादा कबूल होती है
  • मक्का में इब्राहिम के नीचे दुआ करने से ज्यादा दुआ कबूल होती है
  • मुजदलफा और अरफात और मीना में दुआ करने से दुआ के कबूलियत के ज्यादा चांस होते हैं
  • हजरे अस्वाद के दरमियान दुआ ज़्यादा कबूल होती है
  • गारे हिरा, गारे सौर, में भी दुआ ज्यादा कबूल होती है
  • अल्लाह के रसूल के रौजे पर जब सलाम अर्ज करते हैं उस वक्त भी दुआ ज्यादा कबूल होती है
  • काबा शरीफ पर पहली नजर पढ़ते वक्त जो दुआ कबूल की जाए वह ज्यादा होती है

Azaan ke waqt ki dua

  • अजान के वक्त जो दुआ की जाए कुबूल होती है
  • बारिश के वक्त की दुआ ज्यादा कबूलियत का दर्जा रखती है
  • जिहाद यानी जंग करते वक्त जो दुआ की जाए वह ज्यादा कुबूल होती है
  • अजान और अकामत के दरमियान द्वारा नहीं की जाती ज्ञानी जरूर कबूल होती है

Ramzaan me dua ki qubuliyat ka waqt

रमजान उल मुबारक में अफतार से पहले की दुआ खास मुकाम रखती है अफ्तार से पहले की दुआ अल्लाह ताला जरूर कबूल फरमाते हैं क्योंकि बंदा सारा दिन अल्लाह की रजा के लिए सब कुछ होते हुए भी अल्लाह की रजा के लिए रोजा रखता है और भूख प्यास की शिद्दत की वजह से अल्लाह ताला उसके गुनाहों को माफ कर देते हैं

शबे कद्र की रात में जो दुआ करते हैं उसको भी अल्लाह ताला दुआ कबूल फरमाते हैं हदीस में शबे कद्र की रात में जो दुआ की जाए उसकी बहुत फजीलत आई है यानी वह रात हजार रातों से बढ़कर है तो इस वजह से उस रात में जो भी दुआ की जाएगी इंशा अल्लाह अल्लाह ताला जरूर कुबूल फरमा आएंगे

सहरी के वक्त की दुआ अल्लाह ताला जरूर करते हैं हर नमाज के बाद की दुआ रमजान का पूरा महीना बरकत वाला है इस महीने के किसी भी वक्त दुआ की का सकती है।

Conclusion

दोस्तों आज की इस टॉपिक Farz Namazon ke baad ki Dua में हमने यह जाना है की दुआ के को बोले थे जो हादसा औकात होते हैं वह कौन कौन से होते हैं यानी किस टाइम किस वक्त अल्लाह ताला दुआ को ज्यादा कबूल करते हैं और दुआ को रद्द नहीं करते हैं दोस्तों अगर आपको ए टॉपिक पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को शेयर करिए ताकि दिन की मालूमात ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।

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