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Fatiha ka Tarika

Fatiha ka Tarika

फातिहा करने का तरीका – Fatiha ka Tarika
अस्सलामो अलयकुम दोस्तों- इस पोस्ट में हमने फातिहा कैसे किया जाता है उसका मुकम्मल तरीका (Fatiha ka Tarika) बताया है, अगर आप भी सीखना चाहते है कि Fatiha kaise ki jati hai फातिहा करने में क्या पढ़ा जाता है, तो इस पोस्ट को आखिर तक पढ़े

Fatiha ka Tarika में सब से पहले अच्छी तरह वुजू करले उसके बाद क़िब्ला रुख बैठ कर जिस चीज पर फातिहा देनी हो या इसाले सवाब करना हो उसको सामने रख ले, सामने रखना सिर्फ मुबाह और जायज है अगर वह चीज ढकी हुई हो तो उसे खोल दे और लोहबान या अगरबत्ती सुलगाये और फातिहा की चीजों से दूर रखे, और मुस्तहब तरीका से फातिहा करें, फातिहा करने में सबसे पहले अव्वल व आखिर 11-11 मर्तबा दुरुद शरीफ पढ़े

दरूदे इब्राहिम-Darood e Ibrahim

अल अहुम्मा सल्लि अला मुहम्मादिव व अला आलि मुहम्मद

कमा सल लैता अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम इन्नका हमीदुम मजीद

अल अहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मद

कमा बारकता अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम इन्नका हमीदुम मजीद

फिर कुरआन मजीद से कुछ सूूरह या रुकूअ तिलावत करे उसके बाद सुरह काफ़िरून पढ़े

सूरह काफ़िरून – Surah Kafiroon (1 बार पढ़े)

बिस्मिल्ला- हिर्रह्मनिर्रहीम

1-कुल या अय्यूहल काफिरून

2-ला आ- बुदू मा ता’बुदून

3-वला अंतुम आ बि दूना मा आबुद

4-वला अना आबिदुम मा आ बद्दतुम

5-वला अंतुम आ बि दूना मा आबुद

6-लकुम दीनुकुम वलिया दीन

 

उसके बाद पढ़े

 

सूरह इख़्लास – Surah Ikhlaas (3 बार पढ़े)

बिस्मिल्ला- हिर्रह्मनिर्रहीम

1-कुल हुवल्लाहु अहद

2-अल्लाहुस्समद

3-लम यलिद वलम यूलद

4-वलम यकूल लहू कुफुवन अहद

(तीन बार पढ़े )

 

फ़िर surah Falaq पढ़े

 

सूरह फ़लक़ – Surah Falaq ( 1 बार पढ़े )

बिस्मिल्ला- हिर्रह्मनिर्रहीम

1-कुल आ ऊजू बिरब्बिल फलक

2-मिन शर्री मा खलक़

3-वा मिन शर्री गासिकिन इजा वकब

4-वा मिन शर्रीन नाफ्फासाती फिल उकद

5-वा मिन शर्री हसिदिन इज़ा हसद

सूरह नास – Surah Naas (1 बार पढ़े )

बिस्मिल्ला- हिर्रह्मनिर्रहीम

1-कुल आउज़ू बी रब्बिन्नास

2-मलिकिन- नास

3-इलाहिन- नास

4-मिन शर्रिल वास्वसिल खन्नास

5-अल- लजी युवास्विसू फी सुदुरिन्नास

6-मीनल जिन्नती वन्नास

 

उसके बाद surah fatiha (1 बार पढ़े )

 

सूरह फ़ातिहा – Surah Fatiha

बिस्मिल्ला- हिर्रह्मनिर्रहीम

  1. अल्हम्दुलिल्लहि रब्बिल आलमीन
  2. अर रहमा निर रहीम
  3. मालिकि यौमिद्दीन
  4. इय्याक न अबुदु व इय्याका नस्तईन
  5. इहदिनस् सिरातल मुस्तक़ीम
  6. सिरातल लज़ीना अन अमता अलय हिम
  7. गैरिल मग़दूबी अलय हिम् व लद दाालीन (अमीन)

सूरह बक़रह – हुमुल मुफ़लिहून तक

1 अलीफ लाम मीम ज़ालिकाल किताबु ला रै बफ़ीह 2 हुदल लिल मुत्तकीन 3 अल्लज़ीना यूमिनूना बिल गैबि व युकिमुनस्सलाता व् मिम्मा रजकनाहुम् युनफिकुन 4 वल्ल्जीना यूमिनू ना बिमा उन्ज़िला इलैका वमा उन्ज़िला मिन क़ब्लिक व बिल आख़िरति हुम् युकिनून 5 उलाइका अला हुदम मिर रब्बि हिम व उलाइका हुमुल मुफ़लिहून ।

 

उसके बाद (आयत ए खामसह)

 

व इलाहुकुम इलाहुं वाहिद, लाइलाहा इल्ला हुवर्रहमानुर्रहीम । इन्ना रहमतल्लाहि क़रीबुम मिनल मुहसिनीन । वमा अरसल नाका इल्ला रहमतल लिल आलमीन । मा काना मुहम्मदुन अबा अहादिम मिंर रिजालिकुम वला किर रसूल्लाहि वखा तमन नबीय्यीन व कानल्लाहु बिकुल्लि शैइन अलीमा । इन्नल्लाहा व मलाई क त हू यूसल्लूना अलन्न् बिय्यि या अय्यु हल लज़ीना आ मनू सल्लू अलैहि व सल्लिमू तस्लीमा( जितने लोग फातिहा में मौजूद हो 1 बार दुरुद शरीफ पढ़े

 

दुरुद शरीफ-Darood shareef

 

अल अहुम्मा सल्लि अला मुहम्मादिव व अला आलि मुहम्मद

कमा सल लैता अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम इन्नका हमीदुम मजीद

अल अहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मद

कमा बारकता अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम इन्नका हमीदुम मजीद

सुब्हाना रब्बिका रब्बिल इज्जति अम्मा यसिफुन व सलामुन अलल मुरसलीन वल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन

 

 Isale Sawab Karne ka Tarika

बख़्शने का तरीका

ऐ अल्लाह मैंने तेरा कलमा पढ़ा और जो कुछ यह तबर्रुक हाजिर है इसे अपनी बारगाह में कुबूल फरमा और जो कुछ इसमें गलतियां हुई हो उसे अपने फज़्लों करम से माफ फरमा और इनका सवाब हम सबके आका वह मौला हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की बारगाह में बतोरे नजराना पेश करते हैं इलाही कुबूल फरमा ! फिर हुजूर के सदके व तुफैल में जुमला अंबिया इकराम अलेही मुस्सलाम की आरवाहे तैयिबात को हदयतन तोहफतन पेश है क़ुबूल फरमा !फिर हुजूर के सदके में व अंबिया किराम के वसीले से जुमला सहाबा ए किरामअजवाज़े मुतह हरात ताबिईन व तबए ताबिईन व जुमला ओलीयाए किराम व बुजुर्गाने दीन रिजवानुउल्लाहि तअला अलेहिम अजमईन की अरवाहे तय्येबात को इसका सवाब अता फरमा फिर बुजुर्गाने दीन के वसीले से जुमला मोमिनीन मुमिनात की रूहो को इसका सवाब अता फरमा ।

बिल ख़ुसुस . . . . . . . . . . . . . . . . को इसका सवाब अता फरमा !

नोट – बिल ख़ुसुस के बाद जिसके नाम की फातिहा हो उसका नाम ले

Jazakallah hu khair

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