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Morning Azkar। सुबह के वक्त पढ़ने वाले अज़्कार

Morning Azkar। सुबह के वक्त पढ़ने वाले अज़्कार

Morning Azkar। सुबह के वक्त पढ़ने वाले अज़्कार अगर आप Azkar पढ़ना भूल है तो इसका मतलब ये हुआ कि आपका मजबूत किला शर के असर से टूट गया और आप का दरवाज़ा नुकसान के लिए खुल गया।

सुबह के Azkar का वक़्त फज्र के वक़्त से सूरज निकलने तक रहता है

अपने Azkar की हिफाज़त कीजिए

بسم اللہ الرحمن الرحیم

○ سُبْحَانَ اللهِ وَبِحَمْدِهِ عَدَدَ خَلْقِهِ وَرِضَا نَفْسِهِ وَزِنَةَ عَرْشِهِ وَمِدَادَ كَلِمَاتِهِ
(صبح3)

सुभहानल्लाहि वा बिहमदिही अददा खलकिही वा रिदा नफसिही वा ज़ीनता अर्शिही व मिदादा कलिमातिह।

तर्जुमा :-अल्लाह की तारीफ और उसकी पाकी है,उसकी मखलूक की तादाद के बराबर और उसकी रजा और उसके अर्श के वज़न और उसके कलिमात की सियाही के बराबर -۔

اَللهُ لآَ اِلٰهَ اِلاَّ هُوَ الْحَیُّ الْقَیُّوْمُ لاَ تَاْخُذُهُ سِنَة وَّلَا نَوْمٌ لَهُ مَا فِی السَّمٰوٰتِ وَمَا فِی الْاَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِیْ یَشْفَعُ عِنْدَهُ اِلاَّ بِاِذْنِهِ یَعْلَمُ مَا بَیْنَ اَیْدِیْهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا یُحِیْطُوْنَ بِشَیْئٍ مِّنْ عِلْمِهِ اِلاَّ بِمَا شَآءَ وَسِعَ كُرْسِیُّهُ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ وَلاَ یَوُدُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِیُّ الْعَظِیْمُ ۝(صبح1)

अल्लाह (वो है कि) उसके सिवा कोई माबूद नहीं,ज़िंदा है,
हर चीज को क़ायम रखने वाला है,ना उसको ऊंघ आती है और ना ही नींद,उसी का है जो कुछ आसमानों में और जो कुछ ज़मीनों में है,कौन है जो उस के पास उसकी इजाज़त के बिना शिफारिश करे,वो जानता है जो कुछ उन के सामने और जो उनके पीछे है और वो उस के इल्म में से किसी चीज का अहाता नहीं करते मगर जितना वो चाहे، उसकी कुर्सी आसमानों को और ज़मीनों को समाए हुए है और उसे उन दोनों की हिफाज़त नहीं थकाती और वह सब से बुलंद और सबसे बड़ा है।

○بِسْمِ اللهِ الَّذِیْ لَا یَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَیْءٌ فِیْ الْاَرْضِ وَلَا فِی السَّمَآءِ وَھُوَ السَّمِیْعُ الْعَلِیْمُ (3x)
अल्लाह के नाम से,वो जिस के नाम के साथ कोई चीज ज़मीन में और आसमान में नुकसान नहीं से सकती और वो बहुत सुनने और जानने वाला है।

○رَضِیْتُ بِاللهِ رَبًّا وَّبِالْاِسْلَامِ دِیْنًا وَبِمُحَمَّدٍ نَبِیًّا(صبح3)

मै अल्लाह के रब होने,इस्लाम के दीन होने और मुहम्मद (saw) के नबी होने पर राज़ी हूं।

○یَاحَیُّ یَا قَیُّوْمُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِیْثُ أَصْلِحْ لِیْ شَاْنِیْ كُلَّهُ وَلَا تَكِلْنِیْ اِلٰی نَفْسِیْ طَرْفَةَ عَیْنٍ
ऐ जिंदा ऐ कायम रहने वाले,तेरी रहमत के सबब से मै फरयाद करता हूं कि मेरे लिए मेरे सब कामों की इसलाह फरमा दे और पलक झपकने तक के लिए भी मुझे मेरे नफ़्स के हवाले ना कर

*○اَللهُ أَکْبَرُ، اَلْحَمْدُللهِ، سُبْحَانَ اللهِ، لَا اِلٰهَ اِلَّا اللهُ

अल्लाह सबसे बड़ा है,सब तारीफ अल्लाह ही के लिए है,अल्लाह पाक है और अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं।

○سورة الاخلاص، سورة الفلق، سورة الناس (3x)

أَعُوْذُ بِكَلِمَاتِ اللهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَاخَلَقَ
अल्लाह के तमाम कलिमात के साथ में पनाह लेता हूं हर उस चीज के शर से को उसने पैदा कि है।

سُبْحَانَ اللهِ وَبِحَمْدِهِ
अल्लाह पाक है और इसी की तारीफ है

○اَللّٰھُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ أَمْسَیْنَا وَبِكَ نَحْیَا وَبِكَ نَمُوْتُ وَاِلَیْكَ الْمَصِیْرُ(صبح1)
ऐ अल्लाह! तेरे हुक्म से हमने सुबह कि और तेरे हुक्म से हमने
शाम की और तेरे हुक्म से हम जीते है और तेरे हुक्म से हम मरते है और तेरी ही तरफ पलट कर जाना है

○اَصْبَحْنَا عَلٰی فِطْرَةِ الْاِسْلَامِ وَعَلٰی كَلِمَةِ الْاِخْلَاصِ وَعَلٰی دِیْنِ نَبِیِّنَا مُحَمَّدٍ ﷺ وَعَلٰی مِلَّةِ أَبِیْنَا اِبْرَاھِیْمَ حَنِیْفًا مُّسْلِمًا وَّمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِیْنَ(صبح1)
हमने सुबह कि फित्रते इस्लाम पर ,इस्लाम के कलमे पर इखलास पर अपने नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के दीन पर और अपने बाप इब्राहीम अलैहिस्सलाम की मिल्लत पर को पूरे मुसलमान थे ,और वो मुशरिकों में से नहीं थे

○اَللّٰھُمَّ فَاطِرَ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِ، عَالِمَ الْغَیْبِ وَالشَّھَادَةِ، لَا اِلٰهَ اِلاَّ أَنْتَ رَبَّ كُلِّ شَیْءٍ وَمَلِیْكَهُ أَعُوْذُبِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِیْ وَمِنْ شَرِّ الشَّیْطَانِ وَشِرْكِهِ وأَنْ اَقْتَرِفَ عَلٰی نَفْسِیْ سُوْءًا أَوْ أَجُرَّهُ اِلٰی مُسْلِمٍ(صبح1)
ऐ अल्लाह! आसमानों और ज़मीनों के पैदा करने वाले,चुप और खुले को जानने वाले,तेरे सिवा कोई माबूद नहीं,तू हर चीज का रब है,और उसका मालिक है मैं तेरी पनाह लेता हूं अपने नफ्स के शर से और शैतान के शर से और उसके शिरक के शर से ,और ये की मैं अपने जान पर या किसी मुसलमान को किसी गुनाह के काम की तरफ ले जाऊं।

○اَللّٰھُمَّ أَنْتَ رَبِّیْ لَا اِلٰهَ اِلَّا أَنْتَ خَلَقْتَنِیْ وَأَنَا عَبْدُكَ وَاَنَا عَلٰی عَھْدِكَ وَوَعْدِكَ مَااسْتَطَعْتُ أَعُوْذُبِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ اَبُوْءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَیَّ وَ أَبُوْءُ بِذَنْبِیْ فَاغْفِرْلِیْ اِنَّهُ لَا یَغْفِرُ الذُّنُوْبَ اِلَّا اَنْتَ
ऐ अल्लाह ! तू ही मेरा रब है,तेरे सिवा कोई माबूद नहीं,तूने मुझे पैदा किया और मै तेरा बंदा हूं और मै पनी हैसियत के मुताबिक तुझ से किये हुए अहद और वादे पर क़ायम हूं, मैं तेरी पनाह लेता हूं हर बुराई से जो मैंने की, मै अपने ऊपर तेरी नेमतों को कुबूल करता हूं और अपने गुनाहों को भी कबूल करता हूं बस मुझे बख्श दे यकीनन तेरे सिवा और कोई बख्शने वाला नहीं है।

○اَللّٰھُمَّ اِنِّیْ أَسْاَلُكَ الْعَافِیَةَ فِی الدُّنْیَا وَالْاٰخِرَةِ، اَللّٰھُمَّ اِنِّیْ أَسْاَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِیَةَ فِیْ دِیْنِیْ وَدُنْیَایَ وَأَھْلِیْ وَمَالِیْ، اَللّٰھُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِیْ وَ آمِنْ رَوْعَاتِیْ اَللّٰھُمَّ احْفَظْنِیْ مِنْ بَیْنِ یَدَیَّ وَمِنْ خَلْفِیْ وَعَنْ یَمِیْنِیْ وَعَنْ شِمَالِیْ وَمِنْ فَوْقِیْ وَأَعُوْذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ اُغْتَالَ مِنْ تَحْتِیْ

ऐ अल्लाह! बेशक मै तुझसे दुनिया और आखिरत में आफियत मांगता हूं, अय अल्लाह !बेशक मै तुझ से डर गुजर का कौर आफियत का सवाल करता हूं अपने दीन में ,अपनी दुनिया में,अपने अहल में और अपने माल में,ऐ अल्लाह मेरे सारे अयेब को ढांक से और मुझे खौफ से अमन दे। ऐ अल्लाह मेरी हिफाज़त फरमा मेरे सामने से मेरे पीछे से और मेरे दाएं से और मेरे बाएं से और मेरे ऊपर से और में पनाह चाहता हूं तेरी अजमत के जरिए (उससे) कि मैं अपने नीचे से हलाक किया जाऊं।

لَا اِلٰهَ اِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِیْكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَھُوَ عَلٰی كُلِّ شَیْئٍ قَدِیْرٌ

अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं वो अकेला है उसका कोई शरीक नहीं उसी के लिए बादशाहत है और उसी के लिए सब तारीफ है
और वो हर चीज़ पर पूरी तरह कुदरत रखने वाला है

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّیْتَ عَلَى إِبْرَاهِیمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِیمَ إِنَّكَ حَمِیدٌ مَجِیدٌ

اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِیمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِیمَ إِنَّكَ حَمِیدٌ مَجِیدٌ ( 10x)
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Morning Azkar। सुबह के वक्त पढ़ने वाले अज़्कार को हर रोज़ जरूर पढ़े और रब कि खुस्नूदी और अपनी ज़िंदगियों में सुकून पाएं।

अल्लाह हम सब को अमल करने की तौफीक अता फरमाए।

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