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Mehmaan Nawazi ke Adaab

Mehmaan Nawazi ke Adaab

दोस्तों आज किस टॉपिक पर मेहमान नवाजी के आदाब Mehmaan Nawazi ke Adaab के बारे में बात करेंगे, जब आप किसी के घर में मेहमान के तौर पर जाते हैं तो वह शख्स जिसके घर में आप जा रहे हैं वह आप की मेहमान नवाजी करता है तो इसी तरह अगर आपके घर में कोई मेहमान आ रहा है तो आप उस मेहमान को किस तरह से ट्रीट करते हैं किस तरह से उसके साथ पेश आते हैं उसी के बारे में आज हदीस के जरिए और अल्लाह के रसूल सल्लाहू अलैहि वसल्लम की जिंदगी के मुताबिक हम जाने कि कैसे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेहमान नवाजी क्या करते थे।

अरबों में मेहमान नवाजी का बहुत ही अच्छा तरीका रहा है अरब के लोग मेहमान नवाजी करने में बहुत ज्यादा आगे होते थे जब किसी के घर में कोई मेहमान आ जाता था तो वह पूरा पूरा ऊंट जिबह करवा देते थे इस तरह से वह मेहमान की ख्याल करते थे।

Mehmaan ke baare me pyare Nabi ka Irshaad

हजरत शरीह काबी राजियल्लाहू से रिवायत है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया कि जो शख्स अल्लाह और कयामत के दिन पर ईमान रखता है तो उसको चाहिए कि अपने मेहमान की इज्जत करें, मेहमान के साथ तकल्लुफ एहसान करने का वक्त एक दिन और एक रात है और मेहमान दारी का 3 दिन है, इसके बाद जो दिया जाएगा वह हदिया यानी गिफ्ट और खैरात होगा,और मेहमान के लिए जायज नहीं कि वह मेजबान के यहां 3 दिन से ज्यादा ठहरे कि वह तंगी आ जाए।

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एक और हदीस में रसूलल्लाह सल्लल्लाहु वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स अल्लाह और कयामत के दिन पर ईमान रखता हो तो उसको चाहिए कि वह अपने मेहमान की इज्जत करें।

और जो शख्स अल्लाह और कयामत के दिन पर ईमान रखता हो तो उसको चाहिए कि वह अपने पड़ोसियों को तकलीफ ना दे

और जो शख्स अल्लाह कयामत के दिन पर ईमान रखता हो तो उसको चाहिए की भली बात कहें या खामोश रहे। (बुखारी शरीफ)

मेहमान नवाजी के आदाब में से एक ही यह है कि मेहमान के आते हैं जो कुछ खाने पीने की चीज हो जल्दी से उसको लाकर दे दे उसके सामने रख दे फिर अगर अल्लाह ताला ने आपको खूब पैसे से नवाजा हो तो उसकी और मेहमान नवाजी का इंतजाम बाद में करें।

आने वाले मेहमान को चाहिए कि सलाम में पहल करें और दूसरों को चाहिए कि जवाब दें।यानी जिस घर में हम मेहमान बन कर जा रहे हैं हमें चाहिए कि उस घर में दाखिल होते ही हम पहले सलाम करें।

मेहमान नवाजी के लिए बहुत ज्यादा तकलीफ वा फिक्र में ना पड़े

मेहमान नवाजी के लिए जो चीज आसानी से मिल जाए वह मेहमान की खिदमत में पेश कर दें जो चीजें नहीं मिल पा रही है उसके लिए ज्यादा परेशान ना हो।

मेहमान के आदाब में से यह भी एक ही मेहमान के सामने जो चीज पेश की जाए उसको कबूल करें, खाने को दिल ना चाहे तो थोड़ा बहुत दिल रखने के लिए शरीक हो जाए और अगर वह नुकसान देने वाली चीज हो तो मना कर दे मेहमान का मेजबान को इस तरह दुआ देना सुन्नत है

अल्लाहुम्मा बारिक लहूम फ़ीमा रजक़ तहुम वगफिर लहुम वर हम्हुम।

मेहमान को चाहिए कि सिर्फ खाना वगैरह सामने रखकर चला ना जाए बल्कि उस पर नजर रखें मेहमान खा रहा है या नहीं मगर यह नजर इस तरह हो की मेहमान के खाने पीने को देखता ना रहे सरसरी नजर से देख ले क्योंकि मेहमान के खाने के निवाले को देखना आदाब के खिलाफ है और मेहमान के लिए शर्मिंदगी का जरिया है।

मेहमान को रुखसत करने के लिए घर के दरवाजे या बाहर कुछ दूर तक उसके साथ जाना सुन्नत है

अल्लाह के रसूल सल्ला वाले वसल्लम ने फरमाया जिस घर में मेहमान को खाना खिलाया जाता है वहां ख़ैर यानी रिज्क में बरकत और भलाई इतनी तेजी से पहुंचती है जिस तरह ऊंट का गोश्त काटने में छुरी तेजी से कोहान की तरफ जाती है।

हजरत मालिक बिन फजाला रजि अल्लाह ताला अनु कहते हैं कि मैंने अर्ज किया या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो सल्लम अगर मैं किसी शख्स के यहां जाकर मेहमान बन जाऊं और वह मेरी मेहमान नवाजी ना करें और मेरी जियाफत का हक अदा ना करें फिर वह शख़्स मेरे यहां कभी मेहमान बनकर आए तो क्या मैं उसकी मेहमान नवाजी करूं या उससे बदला लूं आप सल्लल्लाहो वसल्लम ने फरमाया नहीं उससे बदला ना लो बल्कि उसकी मेहमान नवाजी करो।

दोस्तों आज के इस टॉपिक Mehmaan Nawazi ke Adaab में अपने मेहमान नवाजी के  बारे में जाना और अल्लाह के रसूल के तरीके को जाना कि अलग रसूल सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम ने मेहमान नवाजी के बारे में और उसके आदाब के बारे में हमें क्या तालीम फरमाई है अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो दोस्तों के साथ शेयर करिए ताकि दीन की सही मालूमात और दूसरे लोगों तक पहुंच सके।

Jazakallah hu khair

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