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Acche Akhlaq ki Ahmiyat aur Fazilat

Acche Akhlaq ki Ahmiyat aur Fazilat

Acche Akhlaq ki Ahmiyat aur Fazilat की तालीम इस्लाम की बुनियादी तालीमात में से है और लोगों की एक अखलाकी और रूहानी इस्लाह व दुरुस्ती उन खास मकसद में से है जिन को पूरा करने के लिए रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम नबी बना कर भेजे गए थे

खुद हुजूर सल्ललाहू अला वसल्लम का इरशाद है

“मैं अल्लाह की तरफ से इसलिए भेजा गया हूं कि अच्छे अखलाक की तालीम दूं और उन्हें मर्तबा कमाल तक पहुंचाऊं”

Acche Akhlaq ki Ahmiyat

इस्लाम में अच्छे अखलाक की जो अहमियत और फजीलत है उसका कुछ अंदाजा रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वल्लम की इन हदीसो से किया जा सकता है

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो वाले वसल्लम का इरशाद है

“तुम में बेहतरीन शख्स वह है जिनके अखलाक बहुत अच्छे हैं”

एक और हदीस में आया है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया

“कयामत के दिन मेरी नजर में सबसे ज्यादा महबूब वह शख्स होगा जिसके अखलाक सबसे अच्छे होंगे”

एक और हदीस में रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया

“कयामत के दिन आमाल के तराजू में सबसे ज्यादा वजन अच्छे अखलाक का होगा”

एक और रिवायत में है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा गया कि वह कौन सी सिफत है जो इंसान को जन्नत में ले जाती है आप सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने फरमाया

“अल्लाह का खौफ और अच्छे अखलाक यह दोनों चीजें इंसान को जन्नत में ले कर जाती है”

एक और हदीस में आया कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया

“अच्छे अखलाक वाले मोमिन को दिनों के रोज़ों और रातों के क़याम (यानी नफील नमाज़ पढ़ने) का सवाब मिलता है”

मतलब यह है कि जिस अल्लाह के बंदे को ईमान नसीब हुआ और वह अल्लाह के मुकर्रर किए हुए फर्ज अदा करता हो, और ज्यादा नफिल रोजे ना रखता हो, और ना रात को बहुत ज्यादा नफिल नमाज पढ़ता हो, मगर उसके अख्लाक अच्छे हो तो अल्लाह ताला उसको उम्दा अखलाक की वजह से ही उन लोगों के बराबर सवाब देगा जो दिन में रोजे भी रखते हैं और रात में नफील नमाज़ में भी पढ़ते हैं उनके बराबर सवाब अल्लाह ताला उस शख्स को देगा जिसके अखलाक सबसे अच्छे होंगे।

तो दोस्तों मालूम हुआ कि अच्छे अख्लाक और उम्दा सिफात की वजह से अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कितनी फजीलत वाली हदीस बयान फरमाई है इससे अंदाजा होता है कि जिस शख्स के अच्छे सिफात हैं और अच्छे अखलाक हैं वह शख्स बहुत ही अच्छा और बेहतर है।

Bure Akhlaq ki Nahoosat

जिस तरह हुजूर सल्ला वाले वसल्लम ने अच्छे अख्लाक कि यह फजीलत बयान फरमाई हैं इसी तरह बुरे अखलाक की नहूसत से भी आप सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने हमको खबरदार किया है।

एक हदीस में हुजूर सल्लल्लाहु वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया

“बुरे अखलाक वाला आदमी जन्नत में ना जा सकेगा”

एक और रिवायत में हुजूर सल्ला वाले वसल्लम इरशाद फरमाते हैं

“कोई गुनाह अल्लाह ताला के नजदीक बुरे अखलाक से बदतर नहीं”

तो दोस्तों जिस तरह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु वाले वसल्लम ने अच्छे अख्लाक उमदा सिफात की तमाम फजीलत और उसकी अहमियत बयान फरमाई है उसी तरह बुरे अखलाक की नहूसत उसे भी हम सबके सामने बात करना ही है यानी कि बुरे अखलाक वाला शख्स कितना भी नमाज़ का पाबंद हो रोजे रखता हो , नाफिल नमाजें पढ़ता हो लेकिन अगर उसके (behaviour) अखलाक अच्छे नहीं है उसका गुनाह अल्लाह के नजदीक सबसे ज्यादा बढ़ा है।

दोस्तों यूं तो कुरान और हदीस में तमाम अच्छे अखलाक और उम्दा और रूहानी सिफात की तालीम दी गई है और सब बुरे अख्लाक और बुरी आदत से बचने की ताकीद की गई है यानी उस काम से मना किया गया है लेकिन यहां हम इस्लाम के सिर्फ जरूरी और बुनियादी दर्जे की चंद बातो का जिक्र करेंगे जिनके बगैर कोई शख्स सच्चा मोमिन नहीं हो सकता उसके बारे में हम पढ़ने जा रहे हैं।

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इस्लाम में सच्चाई कितनी अहमियत है कि हर मुसलमान को हमेशा सच बोलने की बात की गई है और इसके अलावा उसकी भी ताकीद फरमाए गई है कि हमेशा सच बोलने वालों के साथ रहो और सच बोलो। अल्लाह ताला ने कुरान ए मुकद्दस मे इरशाद फरमाया है

“या अय्यूहल्लजीना आ मनुत्तकुल्लाहा वकुनू मा अस सदिकीन “

Tarjuma:- ऐ ईमान वालों! खुदा से डरो और सिर्फ सच्चो के साथ रहो।

हदीस में है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक मौके पर सहाबा किराम रजि अल्लाह ताला अन्हुु से इरशाद फरमाया।

“जो यह चाहे कि अल्लाह या रसूल सल्ला वाले वसल्लम से उसको मोहब्बत हो या अल्लाह ताला और अल्लाह के रसूल उसको मोहब्बत करें तो उसको लाजिम है कि जब बात करें तो हमेशा सच बोले”।

एक और हदीस में है कि आप सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया

“सच्चाई इख्तियार करो अगर तुम्हें इसमें अपनी बर्बादी और मौत नजर आए तब भी, क्योंकि जिंदगी और निजात सच्चाई ही में है और झूठ से परहेज करो चाहे तुम्हें इसमें कामयाबी और फलाह(succes) नज़र आए क्योंकि झूठ का अंजाम बर्बादी और ना मुरादी होता है”

एक और रिवायत में आप सल्लल्लाहु वाले वसल्लम से किसी ने पूछा अहले जन्नत की क्या अलामत है? यानी जो जन्नत के लोग होंगे उनकी क्या निशानियां है”?

आप सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने फरमाया

“सच बोलना”

और उसके बिल मुकाबिल एक दूसरी हदीस में आया है कि आप सल्ला वाले वसल्लम ने फरमाया

“झूठ बोलना मुनाफिक की खास निशानियां में से एक है “

एक और हदीस में आता है कि अल्लाह के रसूल से किसी ने पूछा

क्या मोमिन बुजदिल हो सकता है?

आपने फ़रमाया

हां हो सकता है

फिर पूछा गया क्या मोमिन कंजूस हो सकता है?

आपने फ़रमाया

हां हो सकता है

फिर सवाल किया गया

क्या मोमिन झूठ बोल सकता है यानी झूठा हो सकता है ?

आपने फ़रमाया

नहीं ! झूठ की आदत और ईमान एक साथ जमा नहीं हो सकते।

दोस्तों आज हमने Acche Akhlaq ki Ahmiyat aur Fazilat के बारे में जाना, और जाना की मुसलमान की वह कौन-कौन सी आदत होती है जिन से वो सच्चा मुसलमान मालूम हो सच बोलना झूठ ना बोलना सच के साथ होना यह सब तमाम तरीके की जो बातें होती हैं यह एक सच्चे मुसलमान में होना जरूरी है।

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Jazakallah hu khair

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