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सीरते मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम

सीरते मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम

आज के इस टॉपिक सीरते मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर बात करेंगे |अल्लाह के रसूल की मुबारक हालते ज़िन्दगी के बारे में बात करेंगे |

  • हजरत मुहम्मद मुस्तफा (saw) की पैदाइश

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के आख़िरी पैगम्बर हैं आप की पैदाइश मक्के में हुई।आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की औलाद में से थे ,मक्का में एक खानदान कुरैश का था हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कुरेश खानदान ही से थे, काव्य का जिम्मेदारी भी इसी खानदान के हाथ में थी।इसीलिए सारे अरब के लोग कुरेश खानदान की बहुत इज्जत करते थे हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम हजरत इस्माइल अलैहि स सलाम के लगभग ढाई हजार साल बाद पैदा हुए, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पैदा होने की तारीख 20 अप्रैल 571 ईसवी है। इस्लामी सन हिजरी से 53 साल पहले 9 रवि अव्वल को सोमवार के दिन आप सल्ला वसल्लम की पैदाइश से 5 महीना पहले आप सल्ला वसल्लम के वालिद का इंतकाल हो चुका था आप सल्ला वसल्लम के वालिद का नाम अब्दुल्ला और मां का नाम आमीना था जब आप सल्लल्लाहो सल्लम 6 साल के हुए तो बीबी आमिना का इंतकाल हो गया अब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दादा अब्दुल अब्दुल मुत्तालिब ने आपको बड़ा किया लेकिन 2 साल के बाद दादा का भी देहान्त हो गया वह भी दुनिया से चल बसे इस तरह हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 8 साल की उम्र में मां बाप और दादा के साए से महरूम हो गए, इसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा जिनका नाम अबू तालिब था उन्होंने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की परवरिश कि उनका पालन पोषण किया चाचा अबू तालिब के घर पर ही आप जवान हुए।

उस जमाने में पढ़ने लिखने का रिवाज नहीं था आप सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने भी कुछ नहीं पढ़ा जवान हुए और चाचा के साथ तिजारत करने लगे, इसी सिलसिले में शाम( Syria)(एक मुल्क का नाम) की तरफ गए आप सल्लल्लाहो सल्लम हर तरह की बुरी बातों से बचे रहें आप सल्लल्लाहो सल्लम बड़े सच्चे थे अरब के लोग आपको आप की सच्चाई को देखकर आपको सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सादिक (सच्चा) पुकारने लगे, लेन-देन और कारोबार में भी आपने हमेशा मामला साफ रखा एक पैसे का भी उलटफेर कभी नहीं किया, रुपए पैसे के मामले में पूरी ईमानदारी से काम लिया अरब वाले आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अमानत दारी देखकर आप सल्लल्लाहो वाले वसल्लम को अमानतदार कहने लगे।

  • हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तिजारत

सीरते मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इस खंड में हम अल्लाह के रसूल के व्यापार के बारे में बात करेंगे मक्के में एक मालदार औरत थी उसका नाम बीबी खदीजा था उनकी उम्र 40 साल थी उनकी दोबारा शादी हो चुकी थी लेकिन दोनों शौहर का इंतकाल हो चुका था, हज़रत खदीजा के वालिद का भी इंतकाल हो चुका था, बीबी खदीजा लोगों को अपना माल देकर तिजारत करवाती थी, जब उन्होंने हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ईमानदारी और सच्चाई का हाल सुना तो आप सल्ला वसल्लम से मामला किया, और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को तिजारत का माल देकर सीरिया की तरफ भेजा जब आप सीरिया से लौटे तो एक एक पैसे का हिसाब समझाया इस बार दुगना फायदा हुआ,बीबी खदीजा ने अपने नौकरों से जो आपके साथ सीरिया गए थे इसके बारे में पूछा उन सब ने आपकी अच्छी आदतों की तारीफ की उन बातों का असर हजरत खदीजा पर यह हुआ कि उन्होंने अपनी तरफ से शादी का पैगाम आपके पास भिजवाया, आप सल्लल्लाहो सल्लम ने अपने चाचा से राय ली और इसके बाद आपकी शादी हजरत खदीजा रजि अल्लाह ताला अनहा के साथ हो गई, उस वक्त आपकी उम्र 25 साल की थी और हजरत खदीजा की उम्र 40 साल थी यानि आप से 15 साल छोटे थे।

  • हज़रत मुहम्मद मुस्तफा (saw) का टाइम अरब का हाल।

यह वह जमाना था कि जब मक्का शहर और अरब के लोग बुरे कामों में फंसे हुए थे एक खुदा के बदले बहुत से मूर्तियों को पूजने लगे थे काबा जो एक खुदा की इबादत के लिए बनाया गया था अब वहां 360 मूर्तियां रखी हुई थी लोग शराब पीते जुआ खेलते हैं जरा जरा सी बात पर लड़ते हैं और एक दूसरे को क़त्ल कर देते लड़की की पैदाइश को लोग बुरा समझते थे बहुत से लोग दो लड़कियों को पैदा होते ही मार देते थे या जमीन में जिंदा दफन कर दिया करते थे।

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  • हज़रत मुहम्मद मुस्तफा (saw) को नबी बनाया जाना।

मक्के के पास एक पहाड़ था उस पहाड़ में एक घर था एक गुफा थी इस गुफा का नाम गारे हिरा था अक्सर खाली टाइम में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस गुफा में चले जाते थे और कई कई दिन इसमें रहते और फिक्र करते इसी में पूरा वक्त गुजारते और खुदा को याद करते जब आप सल्लल्लाहो सल्लम 40 साल के हो गए तो एक रात जब आप गुफा में इबादत कर रहे थे अल्लाह ताला ने अपने सबसे बड़े फरिश्ते हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम के जरिए अपना पैगाम पहुंचाया हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने आपको नबी होने की खुशखबरी दी।

  • हज़रत मुहम्मद मुस्तफा (saw) पर क़ुरान मजीद का उतरना।

नबी होने के साथ-साथ आप पर कुरान करीब उतरना शुरू हो गया, आप कुरान करीम लोगों को सुनाने लगे अल्लाह का हुक्म समझाने लगे मूर्ति पूजा से रोकने लगे आप सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम ने लोगों को बुरी बातों से टोका और अच्छे काम करने को कहा, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवी हजरत खदीजा, आप के चचेरे भाई हजरत अली, और आपके दोस्त हजरत अबू बकर सिद्दीक, ने आपको नबी मान लिया और मुसलमान हो गए, और आपके साथ मिलकर अल्लाह के हुक्म को फैलाने लगे मक्के के लोग मुसलमान होने लगे जो मुसलमान नहीं हुए वह काफिर कहलाए काफिरों ने मुसलमानों और अल्लाह के नबी को सताना शुरू किया काफिर मुसलमानों को कोड़े मारते, कड़ी धूप में अरब की गर्म रेत पर लिटा देते उनका तरह तरह से मजाक उड़ाते हैं लेकिन उनकी उनको कामयाबी नहीं हुई वह किसी मुसलमान को इस्लाम से हटा नहीं सके मक्के में इस्लाम की तबलीग का काम 13 साल तक होता रहा फिर अल्लाह के नबी और मुसलमानों को सताते रहे अब अल्लाह की तरफ से हिजरत हुक्म हुआ इस हुक्म के मुताबिक नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने मुसलमानों से कहा कि वह मदीना चले जाएं क्योंकि वहां के बहुत से लोगों ने आकर पहले ही इस्लाम कबूल कर लिया था और मदीना चलने के लिए आप सल्ला वसल्लम से बार-बार कहते थे।

  • हज़रत मुहम्मद मुस्तफा (saw) की हिजरत

जब सारे मुसलमान मदीना चले गए तो हुजूर सल्लल्लाहु वाले वसल्लम ने भी जाने का इरादा किया काफिरों को मुसलमानों का मदीना जाना अच्छा नहीं लगा उन्होंने अल्लाह के नबी को कत्ल करने का मंसूबा बना लिया, दिन और तारीख भी मुकर्रर कर ली, एक रात काफिरों ने आपके घर का घेराव कर लिया लेकिन अल्लाह के हुक्म से उसी रात हुजूर अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम उस घर से इस तरह से निकले कि आपको किसी ने नहीं देखा सुबह को मालूम हुआ फिर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का पीछा किया लेकिन पा न सके हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम घर से निकलकर हजरत अबू बकर के घर आए उन को साथ लिया 3 दिन पहाड़ कि गुफा में छिपे रहे हैं उसके बाद मदीना चले गए मदीने वालों ने आपका इस्तकबाल धूमधाम से किया आप मदीना पहुंचे मदीने वालों ने हुजूर सल्ला वसल्लम का बड़ा साथ दिया वह तकरीबन सारे के सारे मुसलमान हो गए यह बात मक्के वालों को पसंद नहीं आई

मक्के वालों ने एक बड़ा लश्कर लेकर मदीने पर हमला कर दिया लेकिन निहत्थे मुसलमान से बुरी तरह हारे मुसलमान कम थे लेकिन उन्होंने मक्के वालों के छक्के छुड़ा दिए और उन्हें नाकाम वापस होना पड़ा इन लड़ाईयों में पहली लड़ाई गज़वाए बद्र दूसरी गजवाए ओहद तीसरी लड़ाई को गाज़वाए खंदक कहा गया है बद्र की लड़ाई में 313 मुसलमानों ने 1200 हथियारबंद काफिरों को हराया और ओहद की लड़ाई में मुसलमानों ने 3000 काफिरों का मुकाबला किया फिर काफिरों का 10000 का लस्कर सामान और हथियार के साथ मदीना पर चढ़ायी करने निकला इस लड़ाई में आप सल्ला वसल्लम ने शहर को बचाने के लिए उसके चारों तरफ से खंदक खुदवाई फिर काफिर बहुत दिनों तक डेरा डाले हुए थे आखिरकार बड़ी आंधी आई उनका सब कुछ तहस नहस गया।

  • सुलह हुदैबिया

सीरते मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इस खंड हुदईबिया के बारे में बात करेंगे मुसलमानों की बड़ी तमन्ना थी कि मक्का जाकर काबे का तवाफ करें क्योंकि हुजूर सल्ला वसल्लम ने जिन फायदा 6 हिजरी में उमरे का इरादा फरमाया और डेढ़ हजार सहाबा के साथ मक्का की तरफ रवाना हो गए काफिरों को जब मालूम हो तो उन्होंने अपना भीड़ जमा की और मुसलमानों का मुकाबले के लिए तैयार हो गए हुजूर अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने हुदईबिया के मकाम पर पड़ाव किया और काफिरों को पैगाम भेजा कि वह सिर्फ उमरा की नियत से आए हैं चंद दिनों बाद काफिरों के साथ इस बात पर सुलह हुई कि मुसलमान आइंदा साल आकर उमरा करे।

इसी साल आप सल्ला वाले वसल्लम ने बहुत से बादशाहों के नाम दीन की तबलीग से मुतालिक बहुत से संदेश भेजे थे अक्सर बादशाहों ने आपके साथ के अच्छा बर्ताव किया है लेकिन किसरा के बादशाह ईरान ने आपके खत के टुकड़े-टुकड़े कर दिए जिसके नतीजे में उसके मुल्क के के भी टुकड़े टुकड़े हो गए।

7 हिजरी में आप सल्लल्लाहो वसल्लम ने मक्का कि काफिरों के साथ हुए समझौते के मुताबिक उमरा किया इसी साल खैबर ब फिदक का इलाका फतेह किया को की शाम सीरिया का एक इलाका होता था वहां के सरबराह ने हुजूर अकरम सल्लल्लाहो वसल्लम के कासिद को क़त्ल कर डाला उसका बदला लेने के लिए हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने हज़रत ज़ैद बिन हारसा की कयादत में एक फौज रवाना की अल्लाह ताला ने डेढ़ लाख दुश्मनों के मुकाबले में मुसलमानों की सिर्फ 3000 की फौज को फतेह नसीब फरमाया ये 8 हिजरी का वाकया है।

सुलह हुड़ेबिया के 2 साल बाद मक्का के काफिरों ने सुलह के खिलाफ काम करते हुए मुसलमानों के एक कबीले के लोगों पर हमला किया और उनके बहुत से लोगों को क़त्ल कर डाला हुजूर अकरम सल्लल्लाहो सल्लम वादा तोड़ने की वजह से 10000 फौज लेकर मक्का की तरफ रवाना हुए यह देखकर काफिर घबरा गए और सिर्फ चंद झड़पों में ही मक्का फतह हो गया और मुसलमानों का मक्का मुकर्रमा में शानदार दाखिला हो गया अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम ने तमाम काफिरों को जिन्होंने आप पर जुल्म किया था माफ कर दिया यह वाकया रमजान 8 हिजरी का है।

इसी साल साल हुनाइं और ताइफ की जंग हुई और इसमें मुसलमानों को फतह हासिल हुई और ताईफ वाले खुद आकर मुसलमान हुए 9 हिजरी में मऊता के लोगों ने रोम के बादशाह के साथ मिलकर मुसलमानों के मुकाबले में एक बड़ी जबरदस्त फौज तैयार की हुजूर अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम 30,000 फौज लेकर तब बुक रवाना हुए लेकिन यह जंग नहीं हो सकी चुनांचे 20 रोज आप ठहर कर मदीना वापस तशरीफ लाए।

दिल ही जानो हिजरी को आप सल्ला वाले वसल्लम ने हजरत अबू बकर रजी अल्लाह ताला अनु की कयादत में एक हज के लिए पहला काफिला रवाना किया और दूसरे साल आपने खुद हट फरमाया यह आपका पहला और आखरी हंस था जिसे हज्जतुल वादा कहलाता है आप सल्ला वसल्लम ने मैदानी आरफात ने अपना आखिरी खुतबा दिया जिसमें मुसलमानों को बहुत सारी नसीहत है कि

रबी उल अव्वल 11 हिजरी मुताबिक 632 ईसवी को आप सल्ला वसल्लम इस दुनिया से पर्दा फरमा गए।

  • हज़रत मुहम्मद मुस्तफा (saw) की बीवियां और साहबजादे ।

आप के कुल 11 बीवियां थी सबसे पहली बीवी हजरत खदीजा रजि अल्लाह ताला अन्हा और सबसे कम उम्र की बीवी हज़रत आयशा बिनते अबू बक्र रजि अल्लाह ताला अनहा थीं आपकी की कुल 7 औलादें थी तीन साहबजादे और चार साहबजादिया साहबजादे में कोई जिंदा नहीं रहा सब औलाद हजरत खदीजा के से थी सिर्फ हजरत इब्राहिम मारिया किबतिया रजि0 अल्लाह ताला अनहा से पैदा हुए।

  • निष्कर्श

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